भारत सरकार ने विदेशी निवेश को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए एफडीआई नियमों में ढील देने का फैसला किया है। इस निर्णय के तहत चीन सहित उन सभी देशों के लिए निवेश नियमों में बदलाव किया गया है जो भारत के साथ भूमि सीमा साझा करते हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। एफडीआई नियमों में ढील के बाद इन देशों से आने वाले निवेश को पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया जा सकता है।
सरकार ने इस संबंध में 2020 के प्रेस नोट-3 में संशोधन किया है।
एफडीआई नियमों में ढील: क्या है नया बदलाव
पहले लागू नियमों के अनुसार चीन और अन्य सीमावर्ती देशों की कंपनियों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए सरकार से अनिवार्य मंजूरी लेनी पड़ती थी। अब एफडीआई नियमों में ढील के बाद इस प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया गया है।
भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों में चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं।
भारत में चीन का निवेश कितना
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक भारत में कुल एफडीआई इक्विटी निवेश में चीन की हिस्सेदारी लगभग 0.32 प्रतिशत रही है। इस अवधि में चीन से करीब 2.51 अरब डॉलर का निवेश भारत में आया है।
हालांकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कम होने के बावजूद भारत और चीन के बीच व्यापार काफी बड़ा है।
भारत-चीन व्यापार में बढ़ा घाटा
ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में भारत का चीन को निर्यात घटकर 14.25 अरब डॉलर रह गया, जबकि इससे पहले यह 16.66 अरब डॉलर था। दूसरी ओर चीन से आयात बढ़कर 113.45 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
इस वजह से भारत का व्यापार घाटा 2024-25 में बढ़कर लगभग 99.2 अरब डॉलर हो गया।
गलवान घटना के बाद बदले थे नियम
साल 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुए सैन्य संघर्ष के बाद भारत ने निवेश नियमों को कड़ा कर दिया था। इसके बाद चीन से जुड़े कई मोबाइल ऐप जैसे टिकटॉक, वीचैट और यूसी ब्राउज़र पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।
अब एफडीआई नियमों में ढील को विदेशी निवेश को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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