प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता ने भारत-ब्राज़ील संबंधों को नई ऊंचाई दे दी है। इस मुलाकात की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत-ब्राज़ील दुर्लभ खनिज समझौता रहा, जो न केवल दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह साझेदारी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि तकनीक, ऊर्जा, रक्षा और वैश्विक दक्षिण की एकजुटता को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
दुर्लभ खनिज समझौता और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला
बैठक के दौरान हुआ भारत-ब्राज़ील दुर्लभ खनिज समझौता लचीली और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला बनाने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा और वैश्विक आपूर्ति जोखिम को कम करेगा। खनन और इस्पात आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग के लिए भी समझौता हुआ, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। कुल मिलाकर नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो आर्थिक सहयोग को नई दिशा देंगे।
अमेरिका के टैरिफ फैसले पर ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति
बैठक में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ आदेश को रद्द किए जाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस फैसले के प्रभावों का गहन अध्ययन करने और फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाने पर सहमति जताई। विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पी. कुमारन ने कहा कि प्रशासन की अगली कार्रवाई और संभावित प्रभावों का आकलन करने के बाद ही कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। यह रुख दर्शाता है कि भारत और ब्राज़ील वैश्विक व्यापार परिवर्तनों पर सतर्क और रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं।
ऊर्जा, तकनीक और रक्षा में नई गति
प्रधानमंत्री मोदी ने ऊर्जा सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों का मजबूत स्तंभ बताया। नवीकरणीय ऊर्जा, एथेनॉल मिश्रण और सतत विमानन ईंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। ब्राज़ील को ‘नवीकरणीय ऊर्जा सुपरपावर’ और भारत को ‘डिजिटल सुपरपावर’ बताते हुए दोनों देशों की पूरक क्षमताओं पर जोर दिया गया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सुपरकंप्यूटर, सेमीकंडक्टर और ब्लॉकचेन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे भारत-ब्राज़ील दुर्लभ खनिज समझौता के साथ तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग को रणनीतिक साझेदारी का अभिन्न स्तंभ बताया गया। दोनों देशों ने सह-डिजाइन और सह-उत्पादन की संभावनाओं पर जोर दिया, जिसमें भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल और ब्राज़ील के रक्षा औद्योगिक आधार को जोड़ने की योजना है। इसके अलावा ब्राज़ील ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए व्यापार वीज़ा की अवधि 10 वर्ष तक बढ़ाने की घोषणा की, जिससे व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
Global South और संयुक्त राष्ट्र सुधार पर साझा आवाज
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लूला ने वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी सदस्यता विस्तार की आवश्यकता दोहराई। G4 ढांचे के तहत, जिसमें जापान और जर्मनी भी शामिल हैं, दोनों देशों ने एक-दूसरे की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन दोहराया। भारत ने 2028-29 के लिए UNSC की अस्थायी सदस्यता हेतु ब्राज़ील के समर्थन का स्वागत किया।
दोनों देशों ने आतंकवाद की कड़ी निंदा की, जिसमें पहलगाम आतंकी हमला और लाल किले की घटना शामिल है। इस साझा रुख ने दर्शाया कि भारत-ब्राज़ील दुर्लभ खनिज समझौता केवल आर्थिक साझेदारी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। भारत और ब्राज़ील की यह रणनीतिक निकटता आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में नई दिशा तय कर सकती है।









