कोल्ड ड्रिंक्स पर भारी टैक्स का बोझ: व्यापारियों ने सरकार से मांगी राहत, 18% जीएसटी स्लैब की मांग

कोल्ड ड्रिंक्स पर भारी टैक्स का बोझ: व्यापारियों ने सरकार से मांगी राहत, 18% जीएसटी स्लैब की मांग

High GST on Soft Drinks Issue | नई दिल्ली: देशभर के छोटे व्यापारी, किराना दुकानदार, पान विक्रेता और फेरीवाले कोल्ड ड्रिंक्स पर लगने वाले 40% टैक्स से परेशान हैं। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर कार्बोनेटेड पेय पदार्थों को 18% जीएसटी स्लैब में शामिल करने की मांग की है। कैट का कहना है कि यह कदम छोटे व्यापारियों को राहत देने के साथ-साथ उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभकारी होगा। संगठन ने वैश्विक टैक्स दरों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि भारत में कोल्ड ड्रिंक्स पर लगने वाला टैक्स अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक है। High GST on Soft Drinks Issue


वर्तमान टैक्स ढांचा: 40% का बोझ

वर्तमान में कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक्स को ‘सिन गुड्स’ (हानिकारक वस्तुओं) की श्रेणी में रखा गया है। इन पर 28% जीएसटी और 12% क्षतिपूर्ति उपकर (cess) लगता है, जिससे कुल टैक्स 40% हो जाता है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भारतीया ने बताया कि छोटे व्यापारियों की बिक्री का लगभग 30% हिस्सा पेय पदार्थों से आता है। इतना अधिक टैक्स उनकी नकदी प्रवाह और आय को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। छोटे व्यापारी, जो पहले से ही कम मार्जिन पर काम करते हैं, इस टैक्स के कारण और अधिक दबाव में हैं। High GST on Soft Drinks Issue

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भारतीया ने कहा, “छोटे दुकानदार, किराना स्टोर और फेरीवाले देश की रिटेल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन पर लगने वाला भारी टैक्स न केवल उनके कारोबार को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त बोझ डालता है। टैक्स को तर्कसंगत करना अब समय की मांग है।” High GST on Soft Drinks Issue


वैश्विक तुलना: 16-18% टैक्स की मांग

कैट ने अपने पत्र में बताया कि वैश्विक स्तर पर कोल्ड ड्रिंक्स पर औसत टैक्स दर 16-18% के बीच है। भारत में 40% की दर न केवल व्यापारियों के लिए बोझिल है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी कहीं अधिक है। संगठन का तर्क है कि कार्बोनेटेड पेयों को 18% जीएसटी स्लैब में लाने से यह वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप होगा। इससे भारत के असंगठित रिटेल क्षेत्र, जो 80% से अधिक है, में औपचारिककरण को बढ़ावा मिलेगा और व्यापारियों को राहत मिलेगी।


जीएसटी सुधारों का स्वागत

कैट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित ‘नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी सुधारों’ का स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि जीएसटी को सरल और तर्कसंगत बनाने की दिशा में उठाए गए कदम छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा अवसर हैं। कैट ने अपने पत्र में लिखा, “प्रधानमंत्री का यह दृष्टिकोण देश के आंतरिक व्यापार तंत्र को मजबूत करने का एक सुनहरा मौका है। टैक्स स्लैब को तर्कसंगत करने और अनुपालनों का बोझ कम करने से छोटे व्यापारियों, किराना स्टोरों, फेरीवालों और पान दुकानदारों को सीधा लाभ होगा।” High GST on Soft Drinks Issue


टैक्स कम करने के संभावित लाभ

कैट का मानना है कि कोल्ड ड्रिंक्स पर टैक्स दर को 40% से घटाकर 18% करने से निम्नलिखित लाभ होंगे:

  1. व्यापारियों के लिए राहत: छोटे व्यापारियों की नकदी प्रवाह और आय में सुधार होगा, जिससे वे अपने कारोबार को अधिक टिकाऊ ढंग से चला सकेंगे।
  2. उपभोक्ताओं को फायदा: टैक्स में कमी से कोल्ड ड्रिंक्स की कीमतें कम होंगी, जिससे उपभोक्ताओं को सस्ते दामों पर उत्पाद उपलब्ध होंगे।
  3. रोजगार सृजन: कारोबार में सुगमता बढ़ने से रिटेल क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
  4. राजस्व वृद्धि: विस्तारित कर आधार के कारण मध्यम अवधि में सरकार का राजस्व बढ़ेगा।
  5. औपचारिककरण को बढ़ावा: कम टैक्स दर से असंगठित रिटेल क्षेत्र में औपचारिकता बढ़ेगी, जिससे अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ होगा।

हंसा रिसर्च का अध्ययन

कैट ने हंसा रिसर्च के साथ किए गए एक अध्ययन का उल्लेख किया, जिसमें पाया गया कि छोटे किराना स्टोरों की बिक्री का लगभग 30% हिस्सा पेय पदार्थों से आता है। यह पेय पदार्थ उनकी सबसे अधिक बिकने वाली श्रेणियों में से एक हैं। हालांकि, उच्च टैक्स दर ने उनकी तरलता और आय क्षमता को कम किया है। अध्ययन के अनुसार, टैक्स में कमी न केवल व्यापारियों को राहत देगी, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी न्यायसंगत होगी। High GST on Soft Drinks Issue


विपरीत प्रस्ताव: टैक्स बढ़ाने की सिफारिश

कैट की मांग के उलट, मंत्रियों के एक समूह (GoM) ने सुझाव दिया है कि कोल्ड ड्रिंक्स, सिगरेट और तंबाकू जैसे उत्पादों पर जीएसटी को 28% से बढ़ाकर 35% किया जाए। यह प्रस्ताव 21 दिसंबर 2024 को जीएसटी परिषद की बैठक में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य इन उत्पादों को ‘हानिकारक’ मानते हुए कर का बोझ बढ़ाना है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो कोल्ड ड्रिंक्स की कीमतें और बढ़ेंगी, जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।


कैट की उम्मीद

कैट ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करेगी और कोल्ड ड्रिंक्स को 18% जीएसटी स्लैब में शामिल करेगी। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भारतीया ने कहा, “प्रधानमंत्री की जीएसटी सुधारों की घोषणा ने व्यापारियों में नई उम्मीद जगाई है। हमें विश्वास है कि टैक्स का तर्कसंगतिकरण छोटे व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।”


कोल्डड्रिंक्स पर 40% टैक्स छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं केलिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। कैट की मांग और वैश्विक टैक्स दरों का हवाला इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है। दूसरी ओर, जीएसटी परिषद के सामने टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव इस मांग को और जटिल बनासकता है। आने वाले समय में यह देखनामहत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुखअपनाती है और क्या छोटे व्यापारियों को राहत मिल पाती है। High GST on Soft Drinks Issue


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