पति दो साल बाहर था तो बच्‍चा किसका?

हिन्‍दी कहानी : स्‍त्री और पुरुष में कौन सबसे ज्‍यादा बुद्धिमान होता है इस कहानी को पढ़ने से समझ में आएगा, जरूर पढ़ें

हिन्‍दी कहानी : एक समय की बात है, एक समृद्ध राज्य में एक धनी और प्रतिष्ठित आदमी रहता था, जिसका नाम राजवीर था। उसकी संपत्ति और ताकत के चर्चे दूर-दूर तक फैले थे, और वह खुद को हर मामले में अजेय मानता था। लेकिन एक क्षेत्र था, जहां वह बार-बार हार जाता था – अपनी बुद्धिमान पत्नी श्रेया के साथ तर्क-वितर्क में। श्रेया अपनी तीव्र बुद्धि के लिए जानी जाती थी, और हर बार किसी भी बहस में वह विजयी होती थी, चाहे राजवीर कितना भी प्रयास कर ले।

पति दो साल बाहर था तो बच्‍चा किसका?

श्रेया का विश्वास था कि महिलाएं भी पुरुषों के बराबर हैं। “स्त्रियां किसी भी मायने में पुरुषों से कम नहीं हैं,” वह अक्सर कहती थी, यह साबित करते हुए कि अगर महिलाओं को मौका दिया जाए, तो वे पुरुषों की तरह हर कार्य कर सकती हैं। राजवीर, हालांकि वह श्रेया से बहुत प्रेम करता था, कभी-कभी महसूस करता था कि उसकी पत्नी के विचार उसके अधिकार को चुनौती दे रहे हैं।

एक दिन, एक गरमागरम बहस के दौरान, राजवीर ने हार मानते हुए, थोड़ा खीझ कर, एक साहसिक चुनौती पेश की। “मुझे कुछ आवश्यक व्यापारिक कार्य के लिए दो साल के लिए विदेश जाना है। मेरी अनुपस्थिति में, यदि तुम यह साबित कर सको कि महिलाएं पुरुषों के बराबर हैं, तो मैं मान जाऊंगा।”

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पति दो साल बाहर था तो बच्‍चा किसका?

“तुम्हें महल बनाना होगा, व्यापार में लाभ कमाना होगा, और हमारे एक बच्चे को जन्म देना होगा।”

श्रेया ने, अपनी सदा की शांति से मुस्कराते हुए कहा, “यह सब मैं कर दिखाऊंगी।”

राजवीर, यह सोचकर कि श्रेया ने खुद से बड़ी चुनौती ले ली है, संतुष्ट होकर विदेश चला गया, और उसे इंतजार था कि वह दो साल बाद लौटकर देखेगा कि उसकी पत्नी इस चुनौती में कैसे असफल रही।

योजना की शुरुआत

जैसे ही राजवीर विदेश गया, श्रेया ने सारे कर्मचारियों और श्रमिकों को इकट्ठा किया। उसने उन्हें समझाया, “किसी भी सफल व्यापार की नींव ईमानदारी और मेहनत पर आधारित होती है। आज से, आप सबको आपकी मेहनत के लिए उचित वेतन मिलेगा, और मैं यह सुनिश्चित करूंगी कि आपकी सभी जरूरतें पूरी हों। बदले में, मैं आपसे निष्ठा और समर्पण की उम्मीद करती हूं। हम सब मिलकर बड़े काम कर सकते हैं।”

कर्मचारी, जो पहले बिना सराहना के काम करते थे, अब श्रेया की न्यायप्रियता और प्रेरक शब्दों से प्रभावित हुए। उनके वेतन में बढ़ोतरी हुई, और उन्हें काम के प्रति एक नई ऊर्जा मिली। अब वे पूरी निष्ठा और उत्साह से काम करने लगे।

श्रेया के कुशल प्रबंधन के तहत व्यापार तेजी से फलने-फूलने लगा। उसने लाभ को वापस व्यापार में निवेश किया, और हर निर्णय सावधानी से लिया। जल्द ही, व्यापार में इतना मुनाफा होने लगा कि पहले की तुलना में दोगुना हो गया।

महल का निर्माण

व्यापार में सफलता के बाद, श्रेया ने महल बनाने की योजना बनाई। उसने राज्य के सर्वश्रेष्ठ वास्तुकारों और कारीगरों को बुलवाया, और महल का हर पहलू बारीकी से डिजाइन और निर्मित करवाया। महल, जो अब धरती पर खड़ा था, किसी चमत्कार से कम नहीं था – इतना भव्य और सुंदर कि राजवीर भी उसकी कल्पना नहीं कर सकता था।

लेकिन श्रेया की योजनाएं यहीं खत्म नहीं हुईं। उसने कई गायें खरीदीं और उन्हें बड़े प्रेम से पाला। गायों से बहुत अच्छा दूध मिलने लगा, और श्रेया ने इसे भी अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करने की सोची।

गुप्त योजना

श्रेया ने सबसे चतुर योजना बनाई। उसने गायों का दूध दही में बदलकर उसे बेचने का फैसला किया। लेकिन वह यह कार्य साधारण तरीके से नहीं करने वाली थी। उसने वेश बदला और खुद को एक साधारण गूजरी (दूध बेचने वाली) के रूप में तैयार किया।

उसने राजवीर के शहर में जाकर अपना दही बेचना शुरू कर दिया। उसके सौंदर्य और विनम्रता ने सबका ध्यान आकर्षित किया, और कुछ ही समय बाद, राजवीर भी उसके दही का ग्राहक बन गया। वह हर दिन उस गूजरी से दही खरीदने आता, बिना यह जाने कि वह उसकी अपनी पत्नी है।

कुछ समय बाद, राजवीर उस गूजरी पर मोहित हो गया। उसने उससे संबंध बनाने की कोशिश की और उसे उपहार देने लगा। उनमें से एक उपहार थी एक अंगूठी, जिसे वह अपने संबंध का प्रतीक मानता था।

श्रेया ने योजना के अनुसार वह अंगूठी रख ली, और राजवीर को अपने जाल में फंसाया। उसने उसे बिना पहचान के वापस अपने राज्य लौटने का फैसला किया, जहां वह अगले कदम की तैयारी में जुट गई।

राजवीर की वापसी

दो साल बीत गए, और राजवीर वापस अपने राज्य लौट आया। उसने सोचा था कि श्रेया उसकी चुनौती को पूरा नहीं कर पाई होगी। लेकिन जैसे ही वह महल के पास पहुंचा, उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। उसके सामने एक शानदार महल खड़ा था, जो किसी स्वप्न से कम नहीं था। अंदर, व्यापार फल-फूल रहा था, कर्मचारी खुश थे, और श्रेया गर्व के साथ खड़ी थी।

लेकिन जैसे ही उसकी नजर श्रेया की गोद में एक छोटे बच्चे पर पड़ी, उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने क्रोध से चिल्लाते हुए पूछा, “यह बच्चा किसका है?”

श्रेया ने शांतिपूर्वक जवाब दिया, “यह तुम्हारा ही बच्चा है।”

राजवीर ने गुस्से में कहा, “मैं दो साल से बाहर था, यह बच्चा कैसे मेरा हो सकता है?”

श्रेया मुस्कराई और अपनी जेब से वह अंगूठी निकाली, जो उसने गूजरी के रूप में राजवीर से ली थी। “इस अंगूठी को पहचानते हो?” उसने पूछा।

राजवीर की आंखें आश्चर्य से फैल गईं। “यह अंगूठी तो मैंने उस गूजरी को दी थी!” उसने चौंकते हुए कहा।

श्रेया ने हंसते हुए कहा, “वह गूजरी मैं ही थी, राजवीर। मैंने दही बेचा, व्यापार संभाला, और तुम्हारी चुनौती को पूरा किया।”

राजवीर को अब समझ आ गया कि उसकी पत्नी ने न केवल उसकी चुनौती को स्वीकार किया, बल्कि उसे हर मोड़ पर मात दी। उसने श्रेया के आगे सिर झुका लिया। “तुमने साबित कर दिया कि महिलाएं वाकई पुरुषों के बराबर हैं, और शायद उनसे भी ज्यादा बुद्धिमान,” उसने स्वीकार किया। “मुझे तुम्हारी बुद्धिमानी पर कभी संदेह नहीं करना चाहिए था।”

सीख

श्रेया ने उसे उठाते हुए कहा, “यह प्रतिस्पर्धा नहीं थी, राजवीर। यह दिखाने का प्रयास था कि जब हम एक साथ काम करते हैं, तो हम दोनों ही अधिक शक्तिशाली बन जाते हैं। पुरुष और स्त्री एक-दूसरे के पूरक होते हैं, और साथ मिलकर ही महानता हासिल की जा सकती है।” उस दिन के बाद, राजवीर और श्रेया ने समान रूप से अपने राज्य पर शासन किया। उनकी साझेदारी में न केवल राज्य और समृद्ध हुआ, बल्कि उनका प्रेम भी गहराता गया। और इस प्रकार, श्रेया की बुद्धिमानी और राजवीर की विनम्रता की यह कहानी पीढ़ी दर पीढ़ी बताई जाने लगी, यह याद दिलाते हुए कि सच्ची ताकत ईमानदारी, परिश्रम, और साझेदारी में होती है।

कहानी की सीख: एक बुद्धिमान नारी ही एक सशक्त घर की नींव होती है, और जब पुरुष और स्त्री एक साथ काम करते हैं, तो वे ऐसी महानता प्राप्त कर सकते हैं जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

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