हाउसफुल 5 मूवी रिव्यू: अक्षय-रितेश की कॉमेडी, सस्पेंस का तड़का और दो धमाकेदार क्लाइमेक्स
Housefull 5 Movie Review | तरुण मनसुखानी द्वारा निर्देशित हाउसफुल 5 6 जून 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह कॉमेडी-थ्रिलर फिल्म अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, अभिषेक बच्चन, जैकलीन फर्नांडीज, नरगिस फाखरी, सोनम बाजवा, और एक विशाल स्टार कास्ट के साथ हाउसफुल फ्रेंचाइजी का पांचवां भाग है। 2010 में शुरू हुई इस फ्रेंचाइजी ने अपनी पहली फिल्म के साथ दर्शकों का दिल जीता था, जिसमें अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, दीपिका पादुकोण, और लारा दत्ता जैसे सितारों ने धमाल मचाया था। इसके बाद के सीक्वल्स ने भी कॉमेडी और अतार्किक मनोरंजन का तड़का लगाया, जिसने इसे बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय कॉमेडी फ्रेंचाइजी बनाया। Housefull 5 Movie Review
हाउसफुल 5 का ट्रेलर इतना मजेदार और हंसी से भरा था कि इसने दर्शकों की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुंचा दीं। लेकिन क्या यह फिल्म अपने हाइप के मुताबिक खरी उतरती है? क्या यह दर्शकों को हंसा-हंसा कर लोटपोट करती है, या फिर यह भीड़भाड़ वाली स्टार कास्ट के बीच उलझकर रह जाती है? इस रिव्यू में हम फिल्म की कहानी, अभिनय, संगीत, और निर्देशन का विस्तार से विश्लेषण करेंगे और बताएंगे कि क्या यह आपके वीकेंड के लिए परफेक्ट मसाला मनोरंजन है। Housefull 5 Movie Review
कहानी: हंसी, सस्पेंस और क्लाइमेक्स का डबल डोज
हाउसफुल 5 की कहानी एक शानदार क्रूज पर सेट है, जहां रंजीत (नाना पाटेकर) अपने 100वें जन्मदिन की भव्य पार्टी आयोजित करता है। लेकिन पार्टी के बीच उसकी रहस्यमयी मौत हो जाती है। मरने से पहले रंजीत एक होलोग्राम वसीयत के जरिए घोषणा करता है कि उसकी 69 बिलियन पाउंड की संपत्ति उसके उत्तराधिकारी जॉली को मिलेगी। लेकिन ट्विस्ट तब आता है जब तीन अलग-अलग जॉली – अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, और अभिषेक बच्चन – अपनी-अपनी पत्नियों (जैकलीन फर्नांडीज, नरगिस फाखरी, और सोनम बाजवा) के साथ यह दावा करते हैं कि वे ही असली जॉली हैं।
कहानी में और उलझन तब बढ़ती है जब एक मर्डर मिस्ट्री सामने आती है, और तीनों जॉली इस हत्या के संदिग्ध बन जाते हैं। रंजीत के परिवार और कंपनी के बोर्ड मेंबर्स में से हर किसी के पास उसे मारने का कोई न कोई मकसद है। फिल्म का सस्पेंस यह सवाल उठाता है कि असली हत्यारा कौन है? क्या यह जॉली में से कोई है, या फिर कोई और किरदार इसमें शामिल है?
फिल्म की सबसे अनोखी बात यह है कि मेकर्स ने दो अलग-अलग क्लाइमेक्स के साथ हाउसफुल 5A और हाउसफुल 5B रिलीज किए हैं। अगर आप 5A देखते हैं, तो आपको एक क्लाइमेक्स मिलेगा, और 5B में दूसरा। यह रिव्यू हाउसफुल 5A पर आधारित है, जिसमें क्लाइमेक्स हैरान करने वाला और मजेदार है, खासकर बॉबी देओल की सरप्राइज एंट्री और अभिषेक बच्चन से जुड़े ट्विस्ट के साथ। दूसरा क्लाइमेक्स भी उतना ही प्रभावशाली बताया जा रहा है, जो दर्शकों को थिएटर में दोबारा लाने का माद्दा रखता है।
हालांकि, कहानी में 17 किरदारों की भीड़ और 165 मिनट का लंबा रनटाइम इसे थोड़ा खींचा हुआ बनाता है। अगर किरदारों की संख्या कम होती और स्क्रिप्ट को और कसा जाता, तो यह फिल्म और भी मजेदार हो सकती थी। फिर भी, क्लाइमेक्स की मजबूत पकड़ और कॉमेडी का तड़का इसे एक मनोरंजक अनुभव बनाता है।
अभिनय: स्टार्स की चमक, लेकिन कुछ किरदार बेकार
हाउसफुल 5 की सबसे बड़ी ताकत इसकी विशाल स्टार कास्ट है, जिसमें 17 कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। लेकिन क्या सभी किरदारों को न्याय मिल पाया? आइए देखें:
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अक्षय कुमार: हमेशा की तरह, अक्षय अपनी कॉमिक टाइमिंग और चेहरे के हाव-भाव से दर्शकों को हंसाने में कामयाब रहते हैं। उनका किरदार जॉली नंबर 1 के रूप में मजेदार और ऊर्जावान है। उनके डायलॉग्स और फनी एक्सप्रेशंस फिल्म का हाईलाइट हैं।
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रितेश देशमुख: रितेश इस फ्रेंचाइजी के पुराने खिलाड़ी हैं और अपनी कॉमेडी टाइमिंग से फिर से दिल जीतते हैं। उनका किरदार जॉली नंबर 2 के रूप में अक्षय के साथ शानदार केमिस्ट्री बनाता है।
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अभिषेक बच्चन: अभिषेक का किरदार जॉली नंबर 3 के रूप में न केवल हास्यपूर्ण है, बल्कि क्लाइमेक्स में उनके ट्विस्ट से दर्शकों को चौंका देता है। उनकी कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस सराहनीय है।
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जैकी श्रॉफ और संजय दत्त: इन दोनों दिग्गजों को कुछ शानदार सीन मिले हैं, और उनकी बहुमुखी प्रतिभा फिल्म को नया रंग देती है। जैकी का मजेदार अंदाज और संजय की दमदार मौजूदगी दर्शकों को बांधे रखती है।
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महिला कलाकार: जैकलीन फर्नांडीज, नरगिस फाखरी, और सोनम बाजवा ग्लैमर का तड़का लगाती हैं। पहले हाफ में उनके कुछ कॉमिक सीन मजेदार हैं, लेकिन दूसरे हाफ में उनकी भूमिका कमजोर पड़ जाती है। फिर भी, वे अपने किरदारों में आकर्षक दिखती हैं।
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सहायक कलाकार: जॉनी लीवर अपनी पंचलाइंस और सीन के साथ हंसी का डोज देते हैं। लेकिन फरदीन खान, श्रेयस तलपड़े, डिनो मोरिया, चित्रांगदा सिंह, और चंकी पांडे जैसे कलाकारों को ज्यादा मौका नहीं मिला। श्रेयस तलपड़े और निकितिन धीर लगभग गायब से नजर आते हैं, और सौंदर्या शर्मा की मौजूदगी सिर्फ कुछ एडल्ट कॉमेडी सीन तक सीमित है।
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कैमियो: नाना पाटेकर का छोटा लेकिन दमदार कैमियो फिल्म का हाईलाइट है। उनकी गंभीर शैली में भी हास्य का पुट दर्शकों को खूब पसंद आएगा। बॉबी देओल की अंत में सरप्राइज एंट्री (5A में) क्लाइमेक्स को और रोमांचक बनाती है।
कुल मिलाकर, स्टार कास्ट की भीड़ के बावजूद कुछ किरदार सिर्फ फिलर बनकर रह गए। अगर मेकर्स ने किरदारों को कम रखा होता, तो स्क्रिप्ट और कसी हुई हो सकती थी।
कॉमेडी और सस्पेंस: पहले हाफ में धमाल, दूसरे में सुस्ती
फिल्म का पहला हाफ कॉमेडी और सस्पेंस का शानदार मिश्रण है। अक्षय, रितेश, और अभिषेक की तिकड़ी अपनी फनी टाइमिंग, डायलॉग्स, और बॉडी लैंग्वेज से दर्शकों को हंसाने में कामयाब रहती है। पुरानी हाउसफुल फिल्मों के आइकॉनिक मोमेंट्स जैसे “प्रादा का बेटा गुच्ची” और बंदर की वापसी फैंस के लिए नॉस्टैल्जिया का तड़का लगाते हैं।
एडल्ट कॉमेडी को समझदारी से हैंडल किया गया है, जो न तो जबरदस्ती लगता है और न ही ओवरबोर्ड। पहले हाफ का लेखन कुरकुरा और मनोरंजक है, जो दर्शकों को बांधे रखता है। लेकिन इंटरवल के बाद कहानी अपनी लय खो देती है। 165 मिनट का रनटाइम और कई किरदारों को स्क्रीन टाइम देने की कोशिश स्क्रिप्ट को भटकाती है। कुछ सीन अनावश्यक लगते हैं, और कहानी को खींचा हुआ महसूस होता है।
क्लाइमेक्स से ठीक पहले फिल्म फिर से गति पकड़ती है। हाउसफुल 5A का क्लाइमेक्स सस्पेंस और हंसी का शानदार मिश्रण है, जिसमें बॉबी देओल की एंट्री और अभिषेक के ट्विस्ट दर्शकों को हैरान करते हैं। हाउसफुल फ्रेंचाइजी की खासियत इसका अतार्किक लेकिन मजेदार अंदाज रहा है, और इस बार थोड़ा लॉजिक जोड़कर सस्पेंस को बढ़ाया गया है।
संगीत: ‘लाल परी’ चमकी, बाकी गाने फीके
हाउसफुल फ्रेंचाइजी के गाने हमेशा चार्टबस्टर रहे हैं, जैसे ‘अनारकली डिस्को चली’ और ‘आपका क्या होगा (धन्नो)’। लेकिन हाउसफुल 5 का संगीत इस बार उतना प्रभावशाली नहीं है। फिल्म में चार गाने हैं, जिनमें से केवल ‘लाल परी’ दर्शकों के दिमाग में रहता है। यह गाना अपनी मस्ती और ऊर्जा के लिए थिएटर में तालियां बटोरता है। बाकी तीन गाने सुनने में अच्छे हैं, लेकिन वे न तो यादगार हैं और न ही आपके साथ थिएटर से बाहर निकलते हैं। अगर संगीत को और मजबूत किया जाता, तो फिल्म का मनोरंजन स्तर और बढ़ सकता था।
निर्देशन और लेखन: अच्छी कोशिश, लेकिन कमियां बरकरार
साजिद नाडियाडवाला द्वारा लिखित कहानी और स्क्रीनप्ले पहले हाफ में शानदार हैं, लेकिन दूसरे हाफ में असंगत हो जाते हैं। तरुण मनसुखानी का निर्देशन पहले हाफ में प्रभावी है, जहां कॉमेडी और मर्डर मिस्ट्री का बैलेंस अच्छा बनता है। लेकिन दूसरे हाफ में स्क्रिप्ट की कमजोर पकड़ और लंबा रनटाइम फिल्म को कमजोर करता है।
मर्डर मिस्ट्री को कॉमेडी के साथ बैलेंस करना चुनौतीपूर्ण है, और मेकर्स इसमें पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाए। फिर भी, क्लाइमेक्स की अनोखी रणनीति (दो अलग-अलग क्लाइमेक्स) और स्टार कास्ट का उपयोग इसे एकमनोरंजक अनुभव बनाता है।
अच्छी बातें
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अक्षय, रितेश, और अभिषेक की तिकड़ी की शानदार कॉमिक टाइमिंग।
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जैकी श्रॉफ, संजय दत्त, और नाना पाटेकर के दमदार सीन।
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पहले हाफ में मजेदार डायलॉग्स और नॉस्टैल्जिक मोमेंट्स।
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दो अलग-अलग क्लाइमेक्स का अनोखा कॉन्सेप्ट।
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‘लाल परी’ गाना और बैकग्राउंड म्यूजिक का ऊर्जावान अंदाज।
कमियां
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165 मिनट का लंबा रनटाइम, जो दूसरे हाफ में खींचा हुआ लगता है।
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बहुत सारे किरदार, जिनमें से कई का उपयोग नहीं हो पाया।
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दूसरे हाफ में स्क्रिप्ट की कमजोर पकड़ और अनावश्यक सीन।
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संगीत में पहले जैसी धमक की कमी।
निर्णय: देखें या छोड़ें?
हाउसफुल 5 एक मसाला कॉमेडी है, जो अपने पहले हाफ में हंसी और सस्पेंस का शानदार मिश्रण देती है। अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, और अभिषेक बच्चन की तिकड़ी दर्शकों को खूब हंसाती है, और क्लाइमेक्स का डबल डोज (5A और 5B) इसे अनोखा बनाता है। हालांकि, लंबा रनटाइम और किरदारों की भीड़ फिल्म को थोड़ा कमजोर करती है। अगर आप हाउसफुल फ्रेंचाइजी के दीवाने हैं और अतार्किक, हल्की-फुल्की कॉमेडी पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक बार देखने लायक है। खासकर बॉबीदेओल और नाना पाटेकर जैसे सरप्राइज एलिमेंट्स और शानदार स्टार कास्ट इसे थिएटर में मजेदार बनाते हैं।
रेटिंग: 3/5 (हाउसफुल 5A के लिए)
सुझाव: अगर आप हाउसफुल 5A देख चुके हैं, तो 5B का क्लाइमेक्स देखने के लिए दोबारा थिएटर जाएं। यह अनोखा प्रयोग आपके अनुभव को और मजेदार बना सकता है।
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मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।









