आईएएस निलेश देवरे चार्टर प्लेन विवाद इन दिनों बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। प्रशासनिक गलियारों से लेकर विधानसभा तक इस मामले को लेकर तीखी बहस छिड़ी है। विवाद की शुरुआत जुलाई 2025 में हुई, जब यह आरोप लगा कि निलेश रामचंद्र देवरे ने अपने परिवार के साथ चार्टर प्लेन से यात्रा की। विपक्ष, खासकर आरजेडी, इस यात्रा के खर्च और औचित्य पर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक और जातिगत रंग देने का आरोप लगा रहा है।
डॉक्टर से आईएएस तक का सफर
महाराष्ट्र के नासिक निवासी निलेश रामचंद्र देवरे 2011 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। उनके पिता कृषि विभाग में कार्यरत थे, जिससे उन्हें सरकारी सेवा की प्रेरणा मिली। दिलचस्प तथ्य यह है कि देवरे पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर हैं। हालांकि, उन्होंने चिकित्सा सेवा के बजाय प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना। मधुबनी, बांका और छपरा जैसे जिलों में बतौर जिलाधिकारी उनकी सख्त और प्रभावी कार्यशैली की चर्चा रही है। वर्तमान में वे बिहार पर्यटन विभाग के सचिव के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निजी सचिव भी रह चुके हैं।
विधानसभा में उठे तीखे सवाल
विधानसभा में आरजेडी विधायक राहुल शर्मा ने इस मुद्दे को उठाते हुए पूछा कि एक सरकारी अधिकारी ने निजी चार्टर विमान का खर्च कैसे वहन किया। विपक्ष का कहना है कि यदि यह निजी यात्रा थी तो खर्च का स्रोत स्पष्ट होना चाहिए। वहीं, मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि उसी विमान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और वे स्वयं भी मौजूद थे। उनका तर्क है कि यदि विमान पहले से निर्धारित था और अधिकारी उसी से लौटे, तो इसमें गलत क्या है? उन्होंने विपक्ष पर जातिगत राजनीति करने का आरोप भी लगाया।
आगे क्या?
आईएएस निलेश देवरे चार्टर प्लेन विवाद फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है। अब देखना यह है कि मामला औपचारिक जांच तक पहुंचता है या फिर यह सिर्फ विधानसभा की बहस बनकर रह जाता है।
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