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‘आरक्षण रुकेगा जब ब्राह्मण बेटी ‘दान’ दे दें’: IAS संतोष वर्मा का बयान सुन ब्राह्मण समाज भडक़ा- माफी मांगी

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‘आरक्षण रुकेगा जब ब्राह्मण बेटी ‘दान’ दे दें’: IAS संतोष वर्मा का बयान सुन ब्राह्मण समाज भडक़ा- माफी मांगी

IAS Santosh Verma Controversy | 26 नवंबर 2025: मध्य प्रदेश में आरक्षण नीति पर एक IAS अधिकारी का विवादास्पद बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष संतोष वर्मा की ‘ब्राह्मण बेटी दान’ वाली टिप्पणी से ब्राह्मण समाज में व्यापक आक्रोश फैल गया। संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी, लेकिन मामले को तूल पकड़ते देख वर्मा ने ब्राह्मण समाज से सार्वजनिक माफी मांग ली। इंदौर में नर्मदेय ब्राह्मण समाज और परशुराम सेना ने विरोध प्रदर्शन कर पुलिस आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। आइए जानते हैं पूरा विवाद और उसका पटाक्षेप…

विवाद की शुरुआत: क्या कहा IAS संतोष वर्मा ने?

23 नवंबर को भोपाल में अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन के दौरान संतोष वर्मा आरक्षण पर अपने 27 मिनट के भाषण में विचार रख रहे थे। उन्होंने कहा, “आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान में नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता।” उनका तर्क था कि बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा दी गई आरक्षण व्यवस्था सामाजिक पिछड़ापन दूर करने के लिए है, जो जातिगत भेदभाव को समाप्त करेगी। वर्मा ने ‘रोटी-बेटी’ के संबंधों को आरक्षण की समाप्ति का पैमाना बताया, जिसमें कन्यादान का जिक्र भी शामिल था।

यह बयान वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कईयों ने इसे आरक्षण के पक्ष में व्यंग्यात्मक बताया, तो ब्राह्मण संगठनों ने इसे अपनी बेटियों के लिए अपमानजनक करार दिया।

ब्राह्मण समाज का रोष: आंदोलन की धमकी

बयान पर सबसे तेज प्रतिक्रिया खिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने दी। उन्होंने इसे “बेटियों के सम्मान पर सीधा प्रहार” बताते हुए वर्मा से स्पष्टीकरण और माफी की मांग की। मिश्रा बोले, “यह टिप्पणी समाज में विद्वेष फैलाने वाली है। यदि माफी नहीं मांगी गई, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन होगा।”

इंदौर में नर्मदेय ब्राह्मण समाज और परशुराम सेना के सैकड़ों सदस्यों ने मंगलवार को सड़क पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने बैनर-स्लोगन के साथ पुलिस आयुक्त को ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया: “संतोष वर्मा का बयान समुदाय विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। यह वैमनस्यता फैलाने का प्रयास है।” प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई न हुई, तो आंदोलन तेज होगा। प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी ब्राह्मण संगठनों की आपत्तियां दर्ज हो रही हैं।

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माफी का ऐलान: वर्मा की सफाई और क्षमा याचना

विवाद बढ़ते देख IAS संतोष वर्मा ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए ब्राह्मण समाज से क्षमा मांगी। उन्होंने स्पष्ट किया:

“मेरा उद्देश्य बाबासाहेब के आरक्षण को सामाजिक समानता के संदर्भ में समझाना था। जातिगत व्यवस्था को समाप्त करने के लिए ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते आवश्यक हैं। मैंने कन्यादान की बात कही, जो कई विद्वानों ने पहले भी उठाई है। मेरा इरादा किसी समाज या उनकी बेटियों के प्रति अपशब्द कहना कदापि नहीं था। यदि किसी की भावनाएं आहत हुईं, तो मैं तहे दिल से माफी मांगता हूं।”

वर्मा ने जोर देकर कहा कि उनका बयान “श्रद्धा और सम्मान के साथ” था, लेकिन यदि गलतफहमी हुई तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। अजाक्स के पदाधिकारियों ने भी वर्मा के पक्ष में बयान जारी कर कहा कि यह आरक्षण की मजबूती पर जोर देने वाला था, न कि किसी को ठेस पहुंचाने वाला।

आगे क्या? विवाद का पटाक्षेप या नई बहस?

माफी के बाद ब्राह्मण संगठन शांत पड़ने के संकेत दे रहे हैं, लेकिन कुछ नेताओं ने कहा कि “सिर्फ माफी काफी नहीं, जिम्मेदारी भी लें।” यह घटना आरक्षण बहस को फिर से गरमा सकती है, जहां सामाजिक न्याय और जातिगत संवेदनशीलता का टकराव साफ दिखा। मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

नोट: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया और संगठनों के बयानों पर आधारित है। व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचें और सामाजिक सद्भाव बनाए रखें। अधिक अपडेट के लिए बने रहें।


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