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14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास, भारत बना अंडर 19 वर्ल्ड कप चैंपियन छठी बार

14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास भारत बना अंडर 19 वर्ल्ड कप चैंपियन छठी बार
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अंडर 19 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत ने इंग्लैंड को 100 रन से हराकर इतिहास रच दिया। 14 साल के वैभव सूर्यवंशी की तूफानी पारी ने मैच को एकतरफा बना दिया और भारत को छठी बार विश्व चैंपियन बना दिया।

क्रिकेट में कुछ पारियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ मैच नहीं जिताती बल्कि इतिहास बना देती हैं। अंडर 19 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत के लिए वही काम किया वैभव सूर्यवंशी ने। एक 14 साल के खिलाड़ी ने ऐसा खेल दिखाया कि पूरी दुनिया देखती रह गई। भारत ने इंग्लैंड को बड़े अंतर से हराकर छठी बार अंडर 19 वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया

वैभव सूर्यवंशी की ऐतिहासिक पारी

फाइनल मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने 175 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उन्होंने केवल 55 गेंदों में शतक पूरा किया और इंग्लैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह तोड़ दिया। उनकी पारी में 13 छक्के और 13 चौके शामिल रहे। वैभव सूर्यवंशी 175 रन बनाकर अंडर 19 वर्ल्ड कप फाइनल की सबसे बड़ी पारी खेलने वाले बल्लेबाज बन गए। वह डबल सेंचुरी से सिर्फ 25 रन दूर रह गए लेकिन इसके बावजूद उनकी पारी को अब तक की सबसे महान पारियों में गिना जा रहा है।

14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास भारत बना अंडर 19 वर्ल्ड कप चैंपियन छठी बार

भारत का रिकॉर्ड स्कोर

वैभव सूर्यवंशी की 175 रन की पारी के बाद भारत को थोड़ी मुश्किल जरूर आई लेकिन कनीष्क चौहान ने 20 गेंदों में 37 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। भारत ने निर्धारित ओवरों में 411 रन बनाए जो अंडर 19 वर्ल्ड कप फाइनल का सबसे बड़ा स्कोर है। कप्तान आयुष म्हात्रे ने भी 53 रनों की अहम पारी खेली और वैभव के साथ 142 रनों की साझेदारी की।

इंग्लैंड की पारी में बड़ा पतन

412 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की शुरुआत ठीक रही लेकिन इसके बाद विकेटों का पतन शुरू हो गया। 93 रन पर एक विकेट के बाद इंग्लैंड ने 84 रन के अंदर छह विकेट गंवा दिए। आर एस अम्बरीश और दीपेश देवेंद्रन ने दो दो विकेट लिए जबकि खिलान पटेल कनीष्क चौहान और आयुष म्हात्रे ने भी अहम विकेट चटकाए। इंग्लैंड की पूरी टीम 311 रन पर सिमट गई।

भारत बना छठी बार चैंपियन

इस जीत के साथ भारत ने अंडर 19 वर्ल्ड कप का खिताब छठी बार अपने नाम किया और अपने ही रिकॉर्ड को और मजबूत किया। वैभव सूर्यवंशी 175 रन की पारी इस फाइनल की पहचान बन गई। इस जीत ने साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

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