क्या भारत ने वाकई जापान को पीछे छोड़ दिया? GDP से आगे, लेकिन अनुशासन और जीवन स्तर में अब भी फासला
कुल अर्थव्यवस्था में भारत बना चौथे नंबर पर, लेकिन प्रति व्यक्ति आय, सिविक सेंस और जीवन गुणवत्ता में जापान अब भी आगे
India surpass Japan economy but life standards | भारत ने वर्ष 2025 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त कर लिया है। नॉमिनल GDP के आधार पर भारत की अर्थव्यवस्था 4.18 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गई है। यह उपलब्धि निश्चित रूप से देश के लिए गर्व का विषय है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल GDP के आधार पर यह मान लिया जाए कि भारत ने जापान को हर मायने में पीछे छोड़ दिया है?
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इसी सवाल को नए सिरे से बहस के केंद्र में ला दिया है।
जापान का सिविक सेंस और सामाजिक अनुशासन
जापान दुनिया भर में अपने अनुशासित समाज, साफ-सफाई और नागरिक जिम्मेदारी के लिए जाना जाता है।
वहाँ सार्वजनिक स्थानों पर नियमों का पालन किसी दबाव के कारण नहीं, बल्कि सामाजिक संस्कृति का हिस्सा है।
- एस्केलेटर पर लोग स्वतः बाईं ओर खड़े होते हैं, ताकि आपात स्थिति में दाईं ओर से रास्ता मिल सके
- ट्रेन और मेट्रो में न धक्का-मुक्की, न शोर-शराबा
- स्टेशन, सड़कें और सार्वजनिक स्थल अत्यंत साफ
- ड्रेसिंग सेंस और समय पालन में भी अनुकरणीय उदाहरण
यह सब दर्शाता है कि जापान में अनुशासन कानून से नहीं, संस्कारों से आता है।
अर्थव्यवस्था में भारत की बड़ी छलांग
आर्थिक मोर्चे पर भारत ने निश्चित रूप से बड़ी छलांग लगाई है।
- भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
- युवा आबादी और तेज विकास दर बनी ताकत
- वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा
विशेषज्ञों के अनुसार भारत की यह सफलता दीर्घकालिक आर्थिक सुधारों और मजबूत घरेलू बाजार का परिणाम है।
लेकिन प्रति व्यक्ति आय में बड़ा अंतर
जहां भारत की कुल GDP तेजी से बढ़ी है, वहीं प्रति व्यक्ति आय के मामले में स्थिति अलग है।
- जापान की प्रति व्यक्ति GDP: लगभग 32,000 डॉलर
- भारत की प्रति व्यक्ति GDP: लगभग 2,800–2,900 डॉलर
इसका अर्थ यह है कि
देश अमीर हो सकता है, लेकिन आम नागरिक की क्रय-शक्ति और जीवन स्तर अब भी सीमित है।
पासपोर्ट रैंकिंग में भी जापान आगे
वैश्विक मंच पर नागरिकों की ताकत का एक पैमाना पासपोर्ट भी है।
- जापान का पासपोर्ट दुनिया के सबसे ताकतवर पासपोर्ट में शामिल
- जापानी नागरिक 190 से अधिक देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल यात्रा कर सकते हैं
- भारत की पासपोर्ट रैंकिंग लगभग 85वीं
- भारतीय नागरिकों को लगभग 57 देशों में वीजा-मुक्त प्रवेश
यह अंतर भारत की वैश्विक गतिशीलता को सीमित करता है।
जीवन स्तर और सार्वजनिक सुविधाओं में फर्क
जापान में:
- बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं
- उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा
- विश्व-स्तरीय पब्लिक ट्रांसपोर्ट
- सुव्यवस्थित शहर और सुरक्षित माहौल
वहीं भारत में:
- विशाल जनसंख्या
- आय असमानता
- आधारभूत सुविधाओं की कमी
- सफाई और नागरिक सुविधाओं में असंतुलन
ये सभी कारण जीवन गुणवत्ता में अंतर पैदा करते हैं।
साफ शब्दों में कहें तो
GDP में जीत को संपूर्ण विकास की जीत नहीं कहा जा सकता।
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मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।














