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इंदौर डबल डेकर ब्रिज पर बड़ा काम शुरू, 800 टन स्ट्रक्चर जोड़ने की तैयारी

इंदौर डबल डेकर ब्रिज पर बड़ा काम शुरू, 800 टन स्ट्रक्चर जोड़ने की तैयारी
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इंदौर डबल डेकर ब्रिज को लेकर अब बड़ा अपडेट सामने आया है। शहर के लवकुश चौराहे पर बन रहे इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में 800 टन वजनी बो-स्ट्रिंग को जोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। रविवार रात ट्रैफिक रोककर इस भारी संरचना को लॉन्च करने की प्रक्रिया शुरू हुई, हालांकि फिलहाल इसे कुछ मीटर तक खिसकाकर काम रोकना पड़ा। अब इसे दोबारा आगे बढ़ाया जाएगा।

इंदौर डबल डेकर ब्रिज की खासियत और महत्व

इंदौर डबल डेकर ब्रिज प्रदेश का पहला ऐसा पुल है, जो दो स्तरों पर ट्रैफिक और मेट्रो दोनों के लिए तैयार किया जा रहा है। इस ब्रिज की ऊंचाई जमीन से करीब 65 मीटर से अधिक है और इसकी लंबाई एक किलोमीटर से ज्यादा है। 175 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह प्रोजेक्ट शहर के ट्रैफिक सिस्टम को नई दिशा देगा।

इंदौर डबल डेकर ब्रिज में कैसे हो रहा है निर्माण

इंदौर डबल डेकर ब्रिज के निर्माण में दोनों लेन पर 400-400 टन की बो-स्ट्रिंग लगाई जा रही है। इसके बाद उस पर ट्रैक तैयार किया जाएगा, जिससे वाहनों की आवाजाही शुरू हो सकेगी। यह पूरा काम ऊंचाई पर हो रहा है, इसलिए बड़े और अत्याधुनिक क्रेनों की मदद ली जा रही है।

रविवार रात ट्रैफिक डायवर्ट कर इस कार्य को अंजाम दिया गया। दोनों ओर से क्रेनों ने मध्य हिस्से को आगे बढ़ाया, लेकिन सुरक्षा कारणों से फिलहाल प्रक्रिया रोक दी गई है।

इंदौर डबल डेकर ब्रिज में देरी की वजह

इंदौर डबल डेकर ब्रिज का निर्माण कार्य करीब तीन साल पहले शुरू हुआ था और इसे फरवरी तक पूरा करने का लक्ष्य था। हालांकि काम की गति धीमी होने के कारण इसमें देरी हुई है। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट का लगभग 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 800 टन की बो-स्ट्रिंग चंडीगढ़ से तैयार होकर लाई गई है, जिसे अब जोड़ा जा रहा है।

इंदौर डबल डेकर ब्रिज और मेट्रो का समन्वय

इंदौर डबल डेकर ब्रिज के मध्य हिस्से में मेट्रो ट्रैक भी बनाया जा रहा है। इसी वजह से निर्माण कार्य में अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, ताकि किसी भी तरह की तकनीकी समस्या उत्पन्न न हो। दोनों सिरे जुड़ने के बाद इस ब्रिज को मानसून से पहले चालू किया जा सकता है।

इंदौर डबल डेकर ब्रिज से मिलेगा बड़ा फायदा

इंदौर डबल डेकर ब्रिज के तैयार होने से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। खासतौर पर उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ मेले के दौरान इसका बड़ा फायदा देखने को मिलेगा, क्योंकि उस समय भारी संख्या में वाहन इंदौर से होकर गुजरते हैं।

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