इंदौर में दूषित पानी से मौतें: राजनीतिक घमासान तेज, कांग्रेस ने कैलाश विजयवर्गीय को घेरा, 11 जनवरी तक इस्तीफे की मांग

इंदौर में दूषित पानी से मौतें: राजनीतिक घमासान तेज, कांग्रेस ने कैलाश विजयवर्गीय को घेरा, 11 जनवरी तक इस्तीफे की मांग

Indore News | इंदौर, 4 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हुई मौतों और बीमारियों का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए हैं, जहां कांग्रेस ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की है, वहीं भाजपा ने आरोपों को खारिज किया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 4-7 मौतें हुई हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों और मीडिया रिपोर्ट्स में 10-16 मौतों का दावा किया जा रहा है। 1400 से अधिक लोग बीमार पड़े हैं, जिनमें 162-208 अस्पताल में भर्ती हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नगर निगम आयुक्त को हटाकर नए आयुक्त की नियुक्ति की है, लेकिन विपक्ष इसे नाकाफी बता रहा है। आइए जानते हैं पूरी घटना की विस्तृत जानकारी।

इंदौर, जो लगातार सात बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया है, अब दूषित पानी की त्रासदी से जूझ रहा है। भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा पाइपलाइन में सीवर का पानी मिल जाने से बैक्टीरिया (जैसे ई. कोलाई और क्लेबसिएला) फैल गया, जिससे डायरिया, उल्टी और पेट दर्द की शिकायतें बढ़ीं। घटना की शुरुआत 26 दिसंबर 2025 से हुई, जब निवासियों ने पानी में बदबू और पीला रंग की शिकायत की। लेकिन प्रशासन की ओर से समय पर कार्रवाई न होने से स्थिति बिगड़ गई।

  • मौतों की संख्या: आधिकारिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स में 4 मौतें पुष्टि हुई हैं, लेकिन स्थानीय पत्रकारों और परिवारों के अनुसार 14-16 मौतें हुई हैं, जिसमें एक 6 महीने का शिशु भी शामिल है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पोस्टमॉर्टम से 4 मौतें दूषित पानी से जुड़ी हैं, लेकिन संख्या बढ़ सकती है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 8 मौतों का जिक्र किया।
  • बीमारियां: 1400 से अधिक लोग प्रभावित, 208 अस्पताल में भर्ती (कुछ आईसीयू में)। स्वास्थ्य विभाग ने 26 पानी के सैंपल में बैक्टीरिया पाया।
  • कारण: पुरानी पाइपलाइन में रिसाव से सीवर का पानी मिला। निवासियों ने 1 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक मेयर हेल्पलाइन पर 457 शिकायतें दर्ज कीं, लेकिन उन्हें “सुलझी” बताकर बंद कर दिया गया। 2022 से समस्या थी, जनवरी 2023 में 2.65 करोड़ का टेंडर पास हुआ लेकिन काम नहीं हुआ।

इलाके में रिंग सर्वे चल रहा है, मेडिकल कॉलेज के सीनियर डॉक्टरों का पैनल जांच कर रहा है। अग्रवाल समाज ने 1000 आरओ वॉटर जार बांटे।

राजनीतिक घमासान: कांग्रेस-भाजपा का टकराव

शनिवार (3 जनवरी 2026) को कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल, जिसमें पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, विधायक महेश परमार, प्रताप गरेवाल, महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे शामिल थे, जांच रिपोर्ट लेकर भागीरथपुरा पहुंचा। लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने विरोध किया। “बाहरी व्यक्ति वापस जाओ” के नारे लगे, काले झंडे दिखाए गए, काली चूड़ियां फेंकी गईं और धक्का-मुक्की हुई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “घंटा पार्टी मुर्दाबाद” के नारे लगाए। पुलिस ने हस्तक्षेप कर 10 महिलाओं समेत 45 लोगों को हिरासत में लिया और बाद में मुचलके पर रिहा किया।

कांग्रेस ने इसे भाजपा के इशारे पर पुलिस कार्रवाई बताया। कांग्रेस ने दूषित पानी की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई थी, जिसकी रिपोर्ट पेश करने गई थी। कांग्रेस कार्यकर्ता “घंटा” (घंटी) लेकर पहुंचे, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया। यह मंत्री विजयवर्गीय के विवादित “घंटा” शब्द का प्रतीक था, जो उन्होंने नए साल पर दूषित पानी के सवाल पर पत्रकार से कहा था। पोस्टर पर “बेशर्म मंत्री” लिखा था।

पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को टैग कर सोशल मीडिया पर लिखा: “मुख्यमंत्री जी को अपनी रीढ़ की हड्डी दिखाते हुए 11 जनवरी तक कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा लेना चाहिए, वरना मैं पूरी मध्य प्रदेश कांग्रेस के साथ इंदौर में धरने पर बैठूंगा।” मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मांग की: “कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा और महापौर पर FIR दर्ज करो, वरना 11 जनवरी को इंदौर में जंगी आंदोलन होगा।”

राहुल गांधी ने ट्वीट कर भाजपा पर हमला किया: “इंदौर में पानी नहीं जहर बांटा गया।” उन्होंने इसे “मिसगवर्नेंस का एपिसेंटर” बताया। भाजपा की उमा भारती ने भी अपनी सरकार की आलोचना की और “पाप का प्रायश्चित” करने को कहा।

सरकार की कार्रवाई

  • अधिकारियों पर एक्शन: नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटा दिया गया। उनकी जगह 2014 बैच के आईएएस क्षितिज सिंघल को लगाया गया, जो पहले उज्जैन नगर निगम आयुक्त रह चुके हैं। अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसमोरिया और एक सब-इंजीनियर को सस्पेंड किया गया।
  • कलेक्टर का दौरा: इंदौर जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने भागीरथपुरा का दौरा किया और टैंकर से पानी पीकर देखा। उन्होंने कहा: “डॉक्टरों के अनुसार दूषित पानी से मौतें मानी जा रही हैं। आधिकारिक रूप से 6 मौतें पुष्टि हुई हैं।”
  • मुआवजा और राहत: मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया। टैंकर से साफ पानी की सप्लाई शुरू, स्वास्थ्य टीमों ने 351 मरीजों की निगरानी की। एआईआईएमएस विशेषज्ञों से समन्वय।
  • जांच: हाईकोर्ट में PIL दाखिल, नगर निगम को जिम्मेदारी लेने का निर्देश। सीएम ने कहा: “जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं।”

इलाके में तनाव बरकरार है, कई थानों की पुलिस तैनात। कांग्रेस ने पूरे राज्य में 4 जनवरी को भाजपा नेताओं के घरों पर “घंटा” बजाकर विरोध का ऐलान किया। विपक्ष इसे भाजपा की लापरवाही बता रहा है, जबकि सरकार इसे दुर्घटना मानकर कार्रवाई कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी पाइपलाइनों की मॉनिटरिंग के लिए सेंसर लगाने की जरूरत है।

यह त्रासदी रोकी जा सकती थी, लेकिन शिकायतों पर ध्यान न देने से बड़ा हादसा हो गया। सरकार और विपक्ष दोनों को राजनीति से ऊपर उठकर पीड़ितों की मदद करनी चाहिए। अधिक अपडेट के लिए बने रहें।


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