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इंदौर पेयजल त्रासदी की होगी न्यायिक जांच, हाई कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में आयोग गठित

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इंदौर पेयजल त्रासदी की होगी न्यायिक जांच, हाई कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में आयोग गठित

Indore News | इंदौर:
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से हुई मौतों के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने इस मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग के गठन का निर्देश दिया है, जो चार सप्ताह के भीतर अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट को बताया कि करीब एक माह पहले भागीरथपुरा इलाके में हुई 16 मौतों का संबंध दूषित पेयजल से फैलने वाले उल्टी-दस्त के प्रकोप से हो सकता है। इस पर अदालत ने कहा कि मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जांच अत्यंत आवश्यक है।


जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया आदेश

मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने की। अदालत ने भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत को लेकर दायर अलग-अलग जनहित याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को सुना और देर रात आदेश सुरक्षित रखते हुए न्यायिक आयोग के गठन का निर्देश दिया।


पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता बनाए गए आयोग प्रमुख

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता को इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल के दूषित होने के कारणों, इससे हुई मौतों और इसके शहर के अन्य हिस्सों पर पड़े प्रभाव की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है।


मौतों की वास्तविक संख्या और जिम्मेदारी तय करेगा आयोग

न्यायिक आयोग को यह जांच करने का दायित्व सौंपा गया है कि

  • पेयजल किन कारणों से दूषित हुआ,

  • दूषित पानी के सेवन से मौतों की वास्तविक संख्या क्या है,

  • प्रथम दृष्टया किन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही या जिम्मेदारी बनती है।

इसके साथ ही आयोग प्रभावित नागरिकों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मुआवजे से जुड़े दिशा-निर्देश भी सुझाएगा।


आयोग को मिलेंगी दीवानी अदालत जैसी शक्तियां

हाई कोर्ट द्वारा गठित आयोग को

  • अधिकारियों और गवाहों को तलब करने,

  • सरकारी विभागों, अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और नगरीय निकायों से रिकॉर्ड मंगवाने,

  • मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से पानी की गुणवत्ता की जांच कराने,

  • मौके पर जाकर निरीक्षण करने
    जैसी दीवानी अदालत की शक्तियां प्रदान की गई हैं।


दिसंबर के अंत में शुरू हुआ था प्रकोप

उल्लेखनीय है कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त का प्रकोप दिसंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हुआ था। स्थानीय स्तर पर अब तक कम से कम 28 मौतों का दावा किया गया है, जबकि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में 23 मृतकों की ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट पेश की है, जिसमें 16 मौतों को दूषित पेयजल से जुड़ा बताया गया है।


चार मौतों का प्रकोप से संबंध नहीं: रिपोर्ट

शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के पांच विशेषज्ञों की समिति द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि

  • चार मौतों का इस प्रकोप से कोई संबंध नहीं पाया गया,

  • जबकि तीन अन्य मामलों में मृत्यु के कारण को लेकर स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकल सका

इस पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि उसकी रिपोर्ट किस वैज्ञानिक आधार पर तैयार की गई है। अदालत ने सरकार द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘वर्बल ऑटोप्सी’ शब्द पर भी हैरानी जताई।


निष्पक्ष जांच न होने का आरोप

एक याचिकाकर्ता के वकील अजय बागड़िया ने आरोप लगाया कि प्रकोप के दौरान हुई मौतों की निष्पक्ष जांच नहीं की गई। अदालत ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्थिति चेतावनी देने वाली है, क्योंकि इंदौर के पास महू क्षेत्र में भी दूषित पेयजल का मामला सामने आया है।


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