30 साल पहले टंकी में तैरता पूरा मानव कंकाल, हजारों लोगों ने ‘सड़ी-गली लाश’ का पानी पिया और नहाया

30 साल पहले टंकी में तैरता पूरा मानव कंकाल, हजारों लोगों ने ‘सड़ी-गली लाश’ का पानी पिया और नहाया

indore water tank human skeleton found years ago | इंदौर, 4 जनवरी 2026 — मध्य प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पेयजल की त्रासदी ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। भागीरथपुरा इलाके में सीवर पानी मिलने से डायरिया, उल्टी और पेट दर्द जैसी बीमारियों से अब तक आधिकारिक रूप से 4-10 मौतें पुष्टि हुई हैं, जबकि स्थानीय निवासी, मेयर और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मृतकों की संख्या 14 से 16 तक पहुंच चुकी है (जिसमें 6 महीने का शिशु भी शामिल)। 1400 से 2800 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें 200-272 अस्पताल में भर्ती हैं, और 30-32 आईसीयू में जीवन-मरण संघर्ष कर रहे हैं।

इस बीच, शहरवासियों की यादों में 30 साल पुरानी एक भयावह घटना फिर ताजा हो गई है — जब सुभाष चौक इलाके की पानी की टंकी में एक मानव कंकाल मिला था और हजारों लोगों ने अनजाने में सड़ी-गली लाश का पानी पी लिया था। दोनों घटनाओं में एक बात समान है — प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की नाकामी

30 साल पहले सुभाष चौक टंकी में क्या हुआ था?

यह घटना लगभग 1995-1996 (25-30 साल पहले) की बताई जाती है, जब इंदौर नगर निगम पर कांग्रेस का शासन था और मधुकर वर्मा महापौर थे। शहर के पश्चिमी इलाके (सुभाष चौक के आसपास) की बड़ी पानी की टंकी से सप्लाई होती थी।

  • लोगों के घरों में कई दिनों से गंदा, बदबूदार पानी आ रहा था।
  • निवासी पेट दर्द, दस्त, उल्टी और बुखार से पीड़ित हो रहे थे।
  • शिकायतों के बाद जब नगर निगम की टीम ने टंकी का ढक्कन खोला, तो होश उड़ाने वाला मंजर सामने आया — पानी में एक पूर्ण मानव कंकाल तैर रहा था।
  • शरीर का मांस, चमड़ी और रेशे पूरी तरह गलकर पानी में घुल चुके थे। सिर्फ हड्डियों का ढांचा बचा था।

हजारों घरों में लोग इस पानी से पीते, खाना बनाते, नहाते-धोते और बच्चों को पिलाते रहे थे। एक पूरा शव अनजाने में लोगों के शरीर में समा चुका था। कई लोगों पर साइड इफेक्ट्स भी हुए, लेकिन बड़ी संख्या में मौतें नहीं हुईं।

खबर फैलते ही शहर में आक्रोश फैला। कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए, बीजेपी ने विरोध जताया। मामला हत्या का दर्ज हुआ, लेकिन कंकाल किसका था, कैसे टंकी में पहुंचा — यह रहस्य आज तक अनसुलझा है। टंकी साफ की गई, लेकिन लोगों के मन में डर बरकरार रहा।

पूर्व विधायक और बीजेपी नेता सत्यनारायण सत्तन (जो उस समय घटना के गवाह थे) कहते हैं: “दोनों घटनाओं में सिस्टम की नाकामी एक जैसी है। न पानी की गुणवत्ता की जांच, न शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई।”

आज भागीरथपुरा में क्या हो रहा है? (2026 त्रासदी)

  • कारण — पुलिस चौकी के शौचालय (बिना सेफ्टी टैंक) के नीचे मुख्य पानी की लाइन में लीकेज से सीवर पानी मिल गया। पाइपलाइन 1998 (27 साल पुरानी) की है, जिसे 3 साल पहले बदलने का प्रस्ताव पास हुआ था, लेकिन काम अटका रहा।
  • मौतों का आंकड़ा — आधिकारिक (स्वास्थ्य विभाग): 4-6 मौतें पोस्टमॉर्टम से पुष्टि। मेयर पुष्यमित्र भार्गव: 10 मौतें। स्थानीय/मीडिया: 14-16 मौतें।
  • प्रभावित — 1400-2800 लोग बीमार, बैक्टीरिया (ई.कोलाई, क्लेबसिएला) की पुष्टि 26 सैंपल में।
  • सरकारी कार्रवाई — आयुक्त दिलीप यादव हटाए गए, नए आयुक्त क्षितिज सिंघल नियुक्त। कई अधिकारी सस्पेंड। मृतकों के परिवार को 4 लाख मुआवजा। टैंकर से पानी सप्लाई, लेकिन कुछ टैंकर भी पुराने/जंग लगे बताए जा रहे।
  • राजनीतिक घमासान — कांग्रेस ने कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की, राहुल गांधी और जीतू पटवारी ने हमला बोला। उमा भारती ने सरकार को “शर्मिंदगी” बताया। NHRC ने नोटिस जारी किया।

इंदौर, जो 8 बार स्वच्छ सर्वेक्षण में नंबर 1 रहा, आज पानी के जहर से जूझ रहा है। CAG रिपोर्ट्स (2019) ने भी 6 साल पहले पानी की बर्बादी और क्वालिटी पर चेतावनी दी थी, लेकिन अनदेखी हुई।


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