कमजोर ग्रहों का फल: जब ग्रह निर्बल होते हैं, तो इस प्रकार देते हैं कष्ट
Kamjor Graho ke Dushprabhav | ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति और प्रभाव का विशेष महत्व है। जब कोई ग्रह कुंडली में निर्बल या अनिष्टकारी स्थिति में होता है, तो वह संबंधित भावों को दूषित कर जीवन में विभिन्न कष्ट उत्पन्न करता है। इससे व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आज हम विस्तार से जानेंगे कि प्रत्येक ग्रह की कमजोरी से कौन-कौन से दुख भोगने पड़ सकते हैं। यह ज्ञान न केवल समस्याओं की पहचान में सहायक है, बल्कि उपायों के माध्यम से इनसे बचाव भी संभव है। आइए, ग्रहवार विश्लेषण करें।
सूर्य ग्रह की कमजोरी से कष्ट
सूर्य, जो आग का प्रतीक है, शरीर की जठराग्नि और तापक्रम को नियंत्रित करता है। निर्बल सूर्य के कारण:
- मंदाग्नि, ज्वर, क्षय रोग (टीबी जैसी बीमारियां) और अतिसार (डायरिया) जैसी समस्याएं।
- राजकीय या सरकारी नौकरी में विरोध और संघर्ष।
- आत्मविश्वास की कमी और नेत्र संबंधी परेशानियां।
उपाय सुझाव: सूर्य को मजबूत करने के लिए रविवार को गुड़ का दान करें और सूर्य मंत्र का जाप करें।
चंद्रमा ग्रह की कमजोरी से कष्ट
चंद्रमा जल तत्व प्रधान होने से मन और भावनाओं का कारक है। कमजोर चंद्रमा के प्रभाव:
- जल से भय (जैसे डूबने का खतरा) और मानसिक अशांति।
- अनिर्णय की स्थिति, मन की अस्थिरता और चिंता-तनाव।
- नींद संबंधी विकार और माता से संबंधित कष्ट।
उपाय सुझाव: सोमवार को शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं और चंद्र मंत्र का पाठ करें।
मंगल ग्रह की कमजोरी से कष्ट
मंगल ऊर्जा और साहस का प्रतीक है, लेकिन निर्बल होने पर विनाशकारी सिद्ध होता है। इसके फलस्वरूप:
- आग से खतरा, चोट-चपेट, दुर्घटनाएं और रक्त विकार।
- उग्र स्वभाव, चिड़चिड़ापन, अत्यधिक क्रोध से वैवाहिक तनाव और रिश्तों में झगड़े।
- कानूनी विवाद और भाई-बहनों से मतभेद।
उपाय सुझाव: मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें और लाल चंदन का तिलक लगाएं।
बुध ग्रह की कमजोरी से कष्ट
बुध बुद्धि, संचार और निर्णय क्षमता का कारक है। कमजोर बुध के कारण:
- स्मृति (याददाश्त) की कमजोरी और सीखने में कठिनाई।
- निर्णय लेने में देरी, संवाद संबंधी बाधाएं।
- त्वचा रोग, नर्वस सिस्टम की समस्याएं और व्यापार में हानि।
उपाय सुझाव: बुधवार को गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें और हरी सब्जियों का दान करें।
गुरु ग्रह की कमजोरी से कष्ट
गुरु ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य का दाता है। निर्बल गुरु के प्रभाव में:
- लीवर संबंधी रोग (जैसे हेपेटाइटिस) और पाचन विकार।
- गुरुजनों या वरिष्ठों से वैरभाव, विवाह में विलंब।
- सामाजिक सम्मान में कमी और संतान सुख में बाधा।
उपाय सुझाव: गुरुवार को पीले वस्त्र पहनें और केले का दान करें।
शुक्र ग्रह की कमजोरी से कष्ट
शुक्र सौंदर्य, प्रेम और भोग-विलास का स्वामी है। कमजोर शुक्र से:
- प्रेम संबंधों और वैवाहिक जीवन में कलह, जीवनसाथी से मतभेद।
- शारीरिक सौंदर्य में कमी, प्रजनन संबंधी समस्याएं।
- विलासिता और वाहन सुख में हानि।
उपाय सुझाव: शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा करें और सफेद मिठाई का दान दें।
शनि ग्रह की कमजोरी से कष्ट
शनि कर्मफल और अनुशासन का प्रतीक है। निर्बल शनि के फल:
- हड्डी, नस, जोड़ों और तंत्रिका तंत्र संबंधी रोग (जैसे गठिया)।
- जीवन में संघर्ष, सफलता में विलंब और मानसिक दबाव।
- कर्मों की कठोर परीक्षा और गरीबी का भय।
उपाय सुझाव: शनिवार को तेल दान करें और शनि मंत्र का जाप करें।
राहु ग्रह की कमजोरी से कष्ट
राहु छाया ग्रह होने से भ्रम और अचानक परिवर्तन लाता है। कमजोर राहु के कारण:
- माइग्रेन, मानसिक तनाव, भ्रम और निर्णय में कठिनाई।
- विदेश यात्रा में बाधा, धोखा और नशे की प्रवृत्ति।
- पारिवारिक कलह और अप्रत्याशित हानि।
उपाय सुझाव: राहु के लिए काले तिल का दान और दुर्गा सप्तशती पाठ।
केतु ग्रह की कमजोरी से कष्ट
केतु मोक्ष और आध्यात्मिकता का कारक है, लेकिन निर्बल होने पर अलगाव पैदा करता है। इसके प्रभाव:
- अकेलापन, रिश्तों में तनाव और संतान से कष्ट।
- आकस्मिक चोटें, त्वचा रोग और आध्यात्मिक भटकाव।
- पूर्वजन्म के कर्मों से उत्पन्न रहस्यमय समस्याएं।
उपाय सुझाव: केतु के लिए गणेश पूजा और कंबल दान।
कमजोर ग्रहों से बचाव के उपाय
ज्योतिष में ग्रहों की कमजोरी को पहचानकर उपायों से मजबूत किया जा सकता है। कुंडली विश्लेषण करवाकर व्यक्तिगत रत्न धारण, मंत्र जाप या दान-पुण्य से कष्टों को कम किया जा सकता है। याद रखें, ग्रहों का प्रभाव भाग्य के साथ-साथ कर्मों पर भी निर्भर करता है। यदि आपकी कुंडली में कोई ग्रह कमजोर है, तो ज्योतिषी से परामर्श लें। शुभकामनाएं!
(यह जानकारी सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांतों पर आधारित है। व्यक्तिगत सलाह के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें।)
यह भी पढ़ें…
देवउठनी एकादशी आज: 2025 और 2026 में शादियों के शुभ मुहूर्तों की पूरी जानकारी, जानें कब-कब हैं विवाह के योग
मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।









