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करवा चौथ की यह संपूर्ण पूजा विधि, जानें सरगी से चंद्र अर्घ्य तक की प्रक्रिया

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करवा चौथ की यह संपूर्ण पूजा विधि, जानें सरगी से चंद्र अर्घ्य तक की प्रक्रिया

Karwa chouth Pooja vidhi | करवा चौथ का व्रत हिन्दू धर्म में पति-पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के साथ-साथ पति भी रख सकते हैं। इस दिन सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला और निराहार व्रत रखा जाता है, और शाम को शिव-पार्वती, कार्तिकेय, और करवा माता की पूजा की जाती है। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स द्वारा बताई गई करवा चौथ 2025 की संपूर्ण पूजा विधि इस प्रकार है:

सुबह की तैयारी और सरगी

  • सूर्योदय से पहले: व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर नहा-धोकर साफ कपड़े पहनती हैं।
  • सरगी: सूर्योदय से पहले सरगी खाकर जल ग्रहण किया जाता है। इसके बाद निर्जला व्रत शुरू होता है।
  • व्रत संकल्प: साफ मन से पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत का संकल्प लिया जाता है।

पूजा की सामग्री

  • श्रृंगार और कपड़े: शाम को पूजा से पहले महिलाएं श्रृंगार करती हैं और नए या साफ कपड़े पहनती हैं।
  • पूजा थाली: थाली में करवा माता की मूर्ति या तस्वीर, दीपक, रोली, चावल, मिठाई, फल, फूल, और पानी से भरा करवा रखा जाता है।
  • विशेष सामग्री: कुछ स्थानों पर गेहूं या चावल को पीसकर गोलियां बनाई जाती हैं।

कथा श्रवण और पूजा

  • मुहूर्त के अनुसार पूजा: शाम को सभी महिलाएं एक साथ पूजा स्थल पर बैठती हैं।
  • कथा श्रवण: करवा चौथ की कथा पढ़ी या सुनी जाती है।
  • पूजा विधि: करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती, और श्री गणेश की पूजा की जाती है। रोली, चावल, फूल, और प्रसाद अर्पित किए जाते हैं।
  • करवे की परिक्रमा: महिलाएं अपने-अपने करवे की परिक्रमा करती हैं और उन्हें आपस में बदलती हैं।
  • प्रार्थना: पूजा के अंत में पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।

चंद्रमा को अर्घ्य और व्रत खोलना

  • चंद्र दर्शन: चंद्रमा उदय होने पर महिलाएं पूजा थाली और छलनी लेकर छत या बाहर जाती हैं।
  • छलनी से दर्शन: छलनी में दीपक रखकर पहले चंद्रमा का दर्शन किया जाता है, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखा जाता है।
  • अर्घ्य: चंद्रमा को जल या दूध से अर्घ्य दिया जाता है।
  • व्रत खोलना: पति अपनी पत्नी को पानी और मिठाई खिलाकर व्रत तुड़वाते हैं।

इस प्रकार करवा चौथ की पूजा विधि पूरी होती है, जो पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास को और मजबूत करती है।

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