बाबा काशी विश्वनाथ दरबार में अब श्रद्धालुओं को और अधिक स्वच्छ वातावरण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। लाखों भक्तों की उपस्थिति और समीप स्थित मणिकर्णिका घाट से उठने वाले धुएं के कारण वायु गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से ‘संजीवन’ पहल शुरू की गई है। इस पहल के अंतर्गत श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर में उन्नत स्वदेशी एयर प्यूरीफिकेशन प्रणाली स्थापित की जा रही है, जिससे मंदिर क्षेत्र की हवा को शुद्ध और सुरक्षित बनाया जा सके।
‘संजीवन’ पहल से बदलेगा वायु वातावरण
‘संजीवन’ पहल जिंदल स्टेनलेस द्वारा अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत संचालित की जा रही है। इस परियोजना को अमीदा क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से लागू किया जा रहा है। पहल के अंतर्गत एसकेवीडी रैम्प भवन और मणिकर्णिका घाट के समीप वायु शोधन प्रणाली स्थापित की जाएगी। इसका उद्देश्य दाह संस्कार से उत्पन्न धुएं और अन्य प्रदूषकों को नियंत्रित कर आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाना है।
यह परियोजना पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अनुरूप है। श्री काशी विश्वनाथ धाम प्राधिकरण से आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्नत तकनीक से प्रदूषण पर नियंत्रण
इस परियोजना में अमीदा की अट्रेक्ट-कैप्चर-एलिमिनेट (एसीई+) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह प्रणाली हवा में मौजूद प्रदूषकों को आकर्षित कर उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता रखती है। नैनो ब्लैक कार्बन, परागकण, जैविक कणों के साथ-साथ सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों को भी नियंत्रित किया जाएगा।
कुल 58 स्टेनलेस स्टील वायु शुद्धिकरण इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी, जिनकी संयुक्त क्षमता प्रति घंटे लगभग तीन लाख घन मीटर से अधिक हवा को शुद्ध करने की होगी। इससे मंदिर परिसर और मुख्य गलियारे तक पहुंचने वाली हवा में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।
श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की दिशा में बड़ा कदम
जिंदल स्टेनलेस ने कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कंपनी का उद्देश्य स्थानीय निवासियों और लाखों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करना है। अमीदा क्लीनटेक ने भी स्वच्छ वायु को सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य बताते हुए इसे सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में बड़ा प्रयास माना है।
‘संजीवन’ पहल न केवल वायु गुणवत्ता सुधारने का प्रयास है, बल्कि यह आध्यात्मिक धाम में पर्यावरण संरक्षण की नई सोच का प्रतीक भी है।










