देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडर संकट की खबरों के बीच सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार घरेलू गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है और वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिलीवरी कोड सिस्टम लागू किया गया है। फिलहाल कई शहरों में गैस सिलेंडर की डिलीवरी में लगभग 2.5 दिन का समय लग रहा है।
एलपीजी सिलेंडर संकट के बीच डिलीवरी कोड सिस्टम लागू
एलपीजी सिलेंडर संकट को देखते हुए सरकार ने गैस वितरण प्रक्रिया में डिलीवरी कोड (DC) सिस्टम लागू किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैस सिलेंडर सही उपभोक्ता तक पहुंचे और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या कालाबाजारी को रोका जा सके।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। इनमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आती है।
उन्होंने बताया कि भारत के लिए दो एलएनजी कार्गो रास्ते में हैं और अगले एक-दो दिनों में देश पहुंचने की उम्मीद है। इससे एलपीजी सिलेंडर संकट की स्थिति में कुछ राहत मिल सकती है।
रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
एलपीजी सिलेंडर संकट को नियंत्रित करने के लिए देश की प्रमुख रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियों से घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने को कहा गया है।
सरकार ने इस पूरे मामले की निगरानी के लिए एक विशेष समिति भी गठित की है। यह समिति गैस की उपलब्धता, वितरण और कीमतों पर लगातार नजर रख रही है।
दिल्ली में फिलहाल एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग 913 रुपये है। हालांकि कुछ स्थानों पर घबराहट के कारण गैस की बुकिंग तेजी से बढ़ गई है।
घरेलू और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी सिलेंडर संकट के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और अन्य आवश्यक सेवाओं को भी गैस आपूर्ति में प्राथमिकता दी जा रही है।
सरकार राज्य प्रशासन और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है जिससे गैस का वितरण निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।
कई शहरों में रेस्टोरेंट और कैंटीन प्रभावित
एलपीजी सिलेंडर संकट का असर देश के कई शहरों में दिखाई देने लगा है। कुछ स्थानों पर रेस्टोरेंट और छोटे होटल गैस की कमी के कारण अपने मेन्यू में बदलाव करने को मजबूर हो गए हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन में भी गैस सिलेंडर की कमी के कारण पका हुआ भोजन फिलहाल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। यहां केवल हल्के खाद्य पदार्थ जैसे सैंडविच, सलाद और फ्रूट चाट ही परोसे जा रहे हैं।
प्रशासन ने कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए
एलपीजी सिलेंडर संकट के बीच कई राज्यों में प्रशासन ने गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र के नागपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने होटल, रेस्टोरेंट और गैस गोदामों पर छापेमारी शुरू की है।
पुलिस ने चेतावनी दी है कि अगर कोई व्यक्ति गैस सिलेंडरों की जमाखोरी या अवैध बिक्री करता पाया गया तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
गैस बचाने के लिए सरकार की सलाह
एलपीजी सिलेंडर संकट को देखते हुए सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल ने उपभोक्ताओं को गैस बचाने के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं। कंपनी ने सलाह दी है कि रसोई में प्रेशर कुकर का अधिक उपयोग किया जाए।
प्रेशर कुकर में एक साथ कई खाद्य पदार्थ पकाने से गैस की बचत होती है और खाना जल्दी तैयार हो जाता है। इससे एलपीजी की खपत कम की जा सकती है।











