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एमपी में सिटी मॉन्टेसरी स्कूल और मदरसों का बड़ा घोटाला: फर्जी छात्रों के नाम पर हड़पे 57 लाख, खाली बिल्डिंग पर लगाया बोर्ड

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एमपी में सिटी मॉन्टेसरी स्कूल और मदरसों का बड़ा घोटाला: फर्जी छात्रों के नाम पर हड़पे 57 लाख, खाली बिल्डिंग पर लगाया बोर्ड

Madrasa Scam in Madhya Pradesh | मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सनसनीखेज छात्रवृत्ति घोटाला सामने आया है, जिसमें फर्जी मिशनरी स्कूलों और मदरसों ने अल्पसंख्यक बच्चों के लिए दी जाने वाली केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजना का दुरुपयोग कर लाखों रुपये हड़प लिए। इस घोटाले में भोपाल के जहांगीराबाद में ‘सिटी मॉन्टेसरी स्कूल’ जैसी संस्थाओं का नाम सामने आया है, जो सिर्फ कागजों पर चल रही थीं। इन संस्थानों ने खाली इमारतों पर स्कूल का बोर्ड लगाकर और फर्जी छात्रों की सूची बनाकर सरकारी खजाने से ₹57.78 लाख की राशि निकाल ली। Madrasa Scam in Madhya Pradesh

घोटाले का खुलासा: खाली इमारतें, फर्जी छात्र, और नकली दस्तावेज

जांच में पता चला कि भोपाल के जहांगीराबाद में एक पुरानी, सुनसान इमारत पर ‘सिटी मॉन्टेसरी स्कूल’ का बोर्ड लगा था। इस इमारत में न तो कोई क्लासरूम था, न शिक्षक, और न ही कोई पढ़ाई होती थी। फिर भी, इस स्कूल ने 29 फर्जी छात्रों के नाम पर ₹1.65 लाख की छात्रवृत्ति हासिल की। स्थानीय लोगों और एक पान वाले ने बताया कि इस जगह पर पिछले दो सालों में कोई स्कूल गतिविधि नहीं देखी गई। Madrasa Scam in Madhya Pradesh

इसी तरह, बेरसिया रोड पर एक बहुमंजिला इमारत में दो स्कूल—एमजे कॉन्वेंट और सेंट डी’सूजा कॉन्वेंट—कथित तौर पर चल रहे थे। ये स्कूल भी सिर्फ कागजों पर मौजूद थे। एमजे कॉन्वेंट ने 30 फर्जी छात्रों के नाम पर ₹1.7 लाख और सेंट डी’सूजा ने दो छात्रों के लिए ₹11,400 की छात्रवृत्ति हड़पी। जांच में यह भी सामने आया कि इन स्कूलों को 11वीं और 12वीं कक्षा तक की मान्यता ही नहीं थी, फिर भी इन्होंने इन कक्षाओं के लिए छात्रवृत्ति के दावे किए।

एक अन्य मामले में, एंबर्ले कॉन्वेंट स्कूल ने 33 फर्जी छात्रों के नाम पर ₹1.8 लाख का दावा किया, लेकिन यह स्कूल अब अस्तित्व में ही नहीं है। इसके पुराने पते पर अब एक क्लिनिक और दुकानें चल रही हैं। स्थानीय लोगों ने पुष्टि की कि वहां सालों से कोई स्कूल नहीं है।

घोटाले का तरीका: फर्जी दस्तावेज और नकली बैंक खाते

यह घोटाला बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। स्कूल और मदरसे फर्जी छात्रों की जानकारी नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर दर्ज करते थे। इन आवेदनों को बिना किसी सत्यापन के जिला और राज्य स्तर के अधिकारियों द्वारा मंजूरी दे दी जाती थी। इसके बाद, केंद्र सरकार से प्रति छात्र ₹5,700 की दर से छात्रवृत्ति की राशि स्वीकृत होकर बैंक खातों में ट्रांसफर हो जाती थी। लेकिन ये बैंक खाते छात्रों के नहीं, बल्कि स्कूल संचालकों के रिश्तेदारों या करीबी लोगों के होते थे। पैसे आते ही तुरंत निकाल लिए जाते थे, जिससे धोखाधड़ी को पकड़ना मुश्किल हो जाता था।

मदरसों की भी भूमिका

इस घोटाले में 40 संस्थानों में से 17 मदरसे और 23 मिशनरी स्कूल शामिल हैं। कुछ मदरसों ने भी बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया। उदाहरण के लिए, मदरसा मादुल उलूम ने ₹1.28 लाख और मदरसा दानिकी वसीरुल हयात ने ₹1.09 लाख की छात्रवृत्ति हड़पी। होली फील्ड स्कूल ने ₹3.81 लाख और यूनिटी मिशन स्कूल ने ₹3.70 लाख का गबन किया। सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा एफआर कॉन्वेंट स्कूल ने किया, जिसने ₹5.45 लाख की राशि फर्जी छात्रों के नाम पर निकाली। कई मदरसे या तो बंद हो चुके थे या फिर उनके पास 11वीं-12वीं कक्षा की मान्यता नहीं थी, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या ये संस्थान केवल सरकारी पैसे हड़पने के लिए बनाए गए थे।

जांच और कार्रवाई

यह घोटाला 17 जून 2025 को पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड की शिकायत के बाद सामने आया। भोपाल क्राइम ब्रांच ने 40 संस्थानों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, और गबन की धाराओं में FIR दर्ज की है। मध्य प्रदेश राज्य बाल आयोग (MPSCPCR) भी इस मामले की जांच शुरू करेगा और पूरे राज्य में नजर रखेगा। मंदसौर में भी कुछ मदरसों में ऐसी ही गड़बड़ियां पाई गई हैं।

पुलिस ने जांच तेज कर दी है और इस मामले को CBI को सौंपने की तैयारी है। केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने भोपाल के 83 संस्थानों को पहले ही ‘रेड फ्लैग’ कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद यह घोटाला बेरोकटोक चलता रहा

सरकार और मंत्री का रुख

पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने इस घोटाले से खुद को अलग करते हुए कहा कि यह उनके कार्यकाल से पहले का मामला है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। गौर ने कहा, “कोई भी छात्रों की छात्रवृत्ति का पैसा हड़पने का हक नहीं रखता। हम इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”

घोटाले का असर

इस घोटाले ने न केवल सरकारी खजाने को नुकसानपहुंचाया, बल्कि उन जरूरतमंद अल्पसंख्यक छात्रों को भी वंचित किया, जिन्हें यह छात्रवृत्ति वास्तव में मिलनी चाहिए थी। यह मामला शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। करदाताओं का पैसा बर्बाद होने के साथ-साथ उन बच्चों का भविष्य भी खतरे में पड़ गया, जो शिक्षा के लिए इस सहायता पर निर्भर थे।

यह घोटाला मध्य प्रदेश में शिक्षा और छात्रवृत्तियोजनाओं के प्रबंधन में गंभीर खामियों को दर्शाता है। सरकार को चाहिए कि नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर आवेदनों की कड़ाई से जांच की जाए और स्कूलों-मदरसों की मान्यता का भौतिक सत्यापन अनिवार्य हो। साथ ही, दोषी संस्थानों और उनके संचालकों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी को रोका जा सके।

यह मामला न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे देश में सरकारीयोजनाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त निगरानी और पारदर्शी तंत्र की जरूरत को रेखांकित करता है। Madrasa Scam in Madhya Pradesh


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कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।

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