महाकाल मंदिर सुरक्षा लापरवाही का गंभीर मामला उज्जैन में सामने आया है, जिसने देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रम विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि महाकालेश्वर मंदिर परिसर में सुरक्षा सेवाएं दे रही निजी कंपनी के पास वैध श्रम लाइसेंस ही नहीं था। इतना ही नहीं, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि सुरक्षा कर्मियों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम भुगतान किया जा रहा था। यह स्थिति न केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि मंदिर जैसी संवेदनशील जगह की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।
श्रम विभाग की जांच में सामने आई
मंगलवार शाम श्रम निरीक्षक की टीम अचानक महाकाल मंदिर परिसर पहुंची और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि संबंधित निजी कंपनी लंबे समय से बिना वैध लेबर लाइसेंस के सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर रही थी। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद कई सुरक्षा कर्मियों के बयान भी दर्ज किए, जिनमें उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें तय न्यूनतम वेतन से कम भुगतान मिल रहा है। इस खुलासे के बाद महाकाल मंदिर सुरक्षा लापरवाही का मामला प्रशासनिक स्तर पर गंभीर माना जा रहा है।
कंपनी को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
मामले के उजागर होते ही श्रम विभाग ने संबंधित निजी कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कंपनी से प्राप्त जवाब के आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही पाए गए, तो कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ अनुबंध रद्द करने तक की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। प्रशासन का कहना है कि धार्मिक स्थल की सुरक्षा और कर्मचारियों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
महाकालेश्वर मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जहां हर दिन हजारों लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में महाकाल मंदिर सुरक्षा लापरवाही का खुलासा सुरक्षा प्रबंधन की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। प्रशासन अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके और मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नियमों के अनुरूप सुनिश्चित की जा सके।










