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MP News: बड़ा फैसला पहली बार बिना संगठन महामंत्री के चल रही मध्य प्रदेश बीजेपी

MP News: बड़ा फैसला पहली बार बिना संगठन महामंत्री के चल रही मध्य प्रदेश बीजेपी
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MP News: भोपाल मध्य प्रदेश की राजनीति में एक अहम और अभूतपूर्व स्थिति सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश इकाई इस समय बिना संगठन महामंत्री के काम कर रही है। यह स्थिति पहली बार बनी है जब राज्य बीजेपी के पास यह बेहद महत्वपूर्ण पद खाली है।

हितानंद शर्मा की वापसी के बाद खाली हुआ पद

संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में वापस लौटने के बाद यह पद खाली हुआ। आमतौर पर बीजेपी में संगठन महामंत्री की नियुक्ति पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा की जाती है। अब तक परंपरा रही है कि संघ से मुक्त किसी प्रचारक को इस पद की जिम्मेदारी दी जाती थी। लेकिन इस बार अब तक कोई नियुक्ति नहीं हो सकी है।

संघ और पार्टी के बीच निर्णय को लेकर असमंजस

अब सवाल यह है कि क्या संघ किसी प्रचारक को मुक्त कर बीजेपी को देगा या पार्टी अपने स्तर पर किसी नेता को संगठन महामंत्री बनाएगी। संघ की ओर से जिन प्रचारकों के नाम चर्चा में हैं उनमें मध्य भारत के प्रांत प्रचारक विमल गुप्ता मालवा के प्रांत प्रचारक राजमोहन और विद्या भारती के प्रांत संगठन सचिव निखिलेश महेश्वरी शामिल हैं। हालांकि संघ ने अब तक किसी भी प्रचारक को मुक्त नहीं किया है।

MP News: बड़ा फैसला पहली बार बिना संगठन महामंत्री के चल रही मध्य प्रदेश बीजेपी

दूसरे राज्यों से भी आ सकता है संगठन महामंत्री

पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि किसी अन्य राज्य के संगठन महामंत्री को मध्य प्रदेश भेजा जा सकता है। लेकिन बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस विषय पर अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। इसी कारण यह अटकलें तेज हैं कि फिलहाल इस पद पर किसी की नियुक्ति न भी की जाए।

संगठन महामंत्री का पद क्यों है इतना अहम

बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में संगठन महामंत्री को सबसे ताकतवर पदों में गिना जाता है। संगठन से जुड़े लगभग हर बड़े फैसले में उनकी सहमति जरूरी मानी जाती है। ऐसे में बिना संगठन महामंत्री के पार्टी नेताओं के लिए निर्णय लेना कठिन हो रहा है। कई नेता यह समझ नहीं पा रहे हैं कि संगठनात्मक दिशा कैसे तय की जाए।

पहले भी संघ प्रचारक संभालते रहे हैं जिम्मेदारी

अब तक मध्य प्रदेश में कृष्ण मुरारी मोगे कप्तान सिंह सोलंकी माखन सिंह सुहास भगत और हितानंद शर्मा जैसे नेता संघ के प्रचारक रह चुके हैं और बाद में संगठन महामंत्री बने। केवल अरविंद मेनन का मामला अलग था जिन्हें संगठन महामंत्री बनने के बाद प्रचारक बनाया गया था।

आगे क्या होगा नजरें टिकी हैं फैसले पर

अब सबकी नजरें बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व और संघ के फैसले पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस अहम पद को कब और कैसे भरती है या फिर बिना संगठन महामंत्री के ही आगे बढ़ने का रास्ता चुनती है।

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