MP सरकार रोज हेलीकॉप्टर किराए पर खर्च कर रही 21 लाख, प्रति घंटे का खर्च 5 लाख से अधिक

MP सरकार रोज हेलीकॉप्टर किराए पर खर्च कर रही 21 लाख, प्रति घंटे का खर्च 5 लाख से अधिक

MP Government Helicopter Expense | भोपाल, 6 दिसंबर 2025 | मध्य प्रदेश में सड़कों की खस्ता हालत पर बहस हो रही है, लेकिन हवा में उड़ने वाले खर्चों ने अब विपक्ष को तीर बना दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार किराए के विमानों और हेलीकॉप्टलों पर रोजाना औसतन 21 लाख रुपये उड़ा रही है। विधानसभा में पेश आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि जनवरी 2024 से नवंबर 2025 तक हवाई यात्राओं पर 143 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं – यानी हर दिन करीब 21 लाख का ‘हवाई तमाशा’! पिछले तीन सालों (2021-2023) की तुलना में यह खर्च 50% से ज्यादा बढ़ गया है। सरकारी विमान 2021 के क्रैश के बाद धूल खा रहा है, लेकिन न मरम्मत का नाम, न नए विमान का। कांग्रेस ने इसे ‘लोकतंत्र का अपमान’ बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। आइए, आंकड़ों और बहस की इस ‘हाई-फ्लाइट’ कहानी को डिकोड करते हैं।

आंकड़ों का ‘क्लाउड बर्स्ट’: 290 करोड़ का हवाई बिल, 2019 से 55 गुना उछाल

विधानसभा में कांग्रेस विधायकों प्रताप ग्रेवाल और पंकज उपाध्याय के सवालों पर सरकार ने जो जवाब दिया, वह चौंकाने वाला है। जनवरी 2021 से नवंबर 2025 तक किराए के विमानों पर कुल 290 करोड़ रुपये का खर्च!

  • 2019 में सालाना खर्च: सिर्फ 1.63 करोड़ रुपये।
  • 2025 में नवंबर तक: पहले से ही 90 करोड़ रुपये पार!

जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के 23 महीनों में 143 करोड़ उड़ चुके हैं, जो औसतन 21 लाख प्रति दिन बनता है। वहीं, 2021-2023 के तीन सालों में 147 करोड़ का खर्च था, यानी 14 लाख प्रतिदिन। CM यादव के कार्यकाल में यह ‘हवाई खर्च’ 50% से ज्यादा फुल थ्रॉटल हो गया। एक घंटे के हेलीकॉप्टर किराए का रेट? 5 लाख से ज्यादा – जो विपक्ष के मुताबिक ‘सैकड़ों करोड़ हवा में उड़ाने’ जैसा है।

सरकार का बचाव: कोविड, ईंधन और चुनाव का ‘टर्बुलेंस’

सरकार ने सफाई दी कि 2023 में किराए की दरें 20-30% बढ़ीं। कारण?

  • पोस्ट-कोविड डिमांड: चार्टर्ड प्लेनों की मांग आसमान छू गई।
  • महंगाई का झटका: ईंधन, मेंटेनेंस और क्रू कॉस्ट बढ़े।
  • चुनावी उड़ानें: विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरे बढ़े।

लेकिन विपक्ष इसे ‘बहाना’ बता रहा है। राज्य के पास सिर्फ एक हेलीकॉप्टर ही काम कर रहा है। मई 2021 में ग्वालियर एयरपोर्ट पर क्रैश हुआ सरकारी विमान आज भी खराब हालत में पड़ा है – न मरम्मत, न नया खरीदा गया। नतीजा? प्राइवेट कंपनियों पर निर्भरता, और खर्च का ‘रनवे’ लंबा होता जा रहा।

कांग्रेस का ‘ग्राउंड अटैक’: करोड़ों बचाकर विकास पर लगाएं, न कि ‘हेलीकॉप्टर राज’ पर

कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए कहा, “अगर पुराने विमानों की मरम्मत कराई जाती या नए खरीदे जाते, तो हर साल करोड़ों बच जाते। यह पैसा सड़क, स्कूल या किसानों के लिए लगाया जा सकता था।” पार्टी ने 2023 के कोविड बहाने को ‘हास्यास्पद’ करार दिया – “कोविड तो 2020 में था, अब 2025 में क्या बहाना?” पूर्व CM कमलनाथ ने ट्वीट कर तंज कसा: “MP में सड़कें टूटीं, लेकिन हवाई खर्च चमक रहा। जनता का पैसा हेलीकॉप्टर पर उड़ रहा, विकास जमीन पर!”

क्या होगा आगे? ‘लैंडिंग’ की उम्मीद या और ‘टेकऑफ’?

यह खुलासा MP की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है। बजट सत्र में और सवाल उठ सकते हैं। सरकार ने वादा किया है कि विमान मरम्मत पर काम चल रहा है, लेकिन समयसीमा? साफ नहीं। फिलहाल, 21 लाख रोज का यह ‘हवाई बिल’ MP की ‘ग्राउंड रियलिटी’ से टकरा रहा है – जहां किसान सड़कों पर हैं, वहीं नेता आसमान में। क्या यह खर्च विकास की उड़ान भरेगा या सिर्फ चुनावी ‘फ्लाइट’ साबित होगा?


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