मध्य प्रदेश में 21 साल बाद ‘जनबस’ क्रांति: अप्रैल 2026 से 10,879 बसें दौड़ेंगी, ग्रामीण-आदिवासी इलाकों को जोड़कर बदलेंगी परिवहन का चेहरा
MP News Janbus Launch Update | मध्य प्रदेश की सड़कों पर 21 साल बाद एक बार फिर सरकारी बसों की वापसी होने जा रही है। 2005 में भारी घाटे के कारण राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें बंद कर दी गई थीं, लेकिन अब मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने एक नई क्रांति की शुरुआत की है। ‘जनबस’ नाम से शुरू हो रही यह योजना न केवल शहरी यात्रियों को राहत देगी, बल्कि इसका मुख्य जोर ग्रामीण, दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों पर होगा। 18 नवंबर को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कंपनी बोर्ड बैठक में 6,000 से अधिक रूटों को मंजूरी मिली है, जहां 10,879 बसें दौड़ेंगी।
यह सेंट्रलाइज्ड परिवहन प्रणाली राज्य परिवहन निगम की जगह ‘यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ कंपनी के तहत चलेगी। शुरुआत अप्रैल 2026 से इंदौर से होगी, और अप्रैल 2027 तक पूरे 25 जिलों और सभी संभागों में यह व्यवस्था पूरी तरह लागू हो जाएगी। योजना का लक्ष्य उन इलाकों तक बसें पहुंचाना है, जहां आज भी परिवहन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। निजी ऑपरेटर बसें चलाएंगे, लेकिन पूरी निगरानी सरकार की रहेगी। आइए, जानते हैं इस योजना की पूरी रूपरेखा, चरणबद्ध तरीके से संचालन, प्रबंधन और खासियतों को।
7 चरणों में ‘जनबस’ की दौड़: इंदौर से रीवा तक कनेक्टिविटी
योजना को 7 फेज में बांटा गया है, ताकि व्यवस्थित और तेजी से लागू किया जा सके। नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक चरण, संभाग/शहर, रूटों की संख्या, बसों की संख्या और समयसीमा का विवरण है:
| फेज | शहर/संभाग | रूटों की संख्या | बसों की संख्या | समयसीमा |
|---|---|---|---|---|
| पहला | इंदौर शहर | 32 | 310 | अप्रैल 2026 |
| दूसरा | इंदौर संभाग | 771 | 1,706 | जून 2026 |
| दूसरा | भोपाल शहर | 50 | 152 | जुलाई 2026 |
| दूसरा | उज्जैन शहर | 23 | 127 | जुलाई 2026 |
| तीसरा | भोपाल-नर्मदापुरम संभाग | 386 | 1,318 | नवंबर 2026 |
| चौथा | सागर-जबलपुर संभाग | 1,228 | 2,635 | दिसंबर 2026 |
| पांचवां | उज्जैन संभाग | तय नहीं | 1,843 | अप्रैल 2027 |
| छठा | रीवा-शहडोल संभाग | तय नहीं | 1,470 | अप्रैल 2027 |
| सातवां | ग्वालियर-चंबल संभाग | तय नहीं | 1,318 | अप्रैल 2027 |
ये चरण न केवल शहरों को जोड़ेंगे, बल्कि ग्रामीण इलाकों से जिला मुख्यालयों और बड़े शहरों तक की कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेंगे। कुल 25 जिलों में यह व्यवस्था लागू होगी, जिसमें आदिवासी बहुल क्षेत्र जैसे मंडला, डिंडोरी और बालाघाट पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की मौजूदा चुनौतियां
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में लगभग 60,000 यात्री बसें पंजीकृत हैं, लेकिन इनका संचालन मुख्य रूप से निजी ऑपरेटरों के हाथ में है। प्राइम रूट बस ओनर्स एसोसिएशन के मुताबिक, करीब 3,000 रूटों पर ये बसें चल रही हैं। हालांकि, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बसों की कमी के कारण लोग निजी वाहनों या असुरक्षित साधनों पर निर्भर हैं। 2005 में सरकारी बसें बंद होने के बाद से यह खाई और गहरी हो गई। ‘जनबस’ योजना इसी कमी को पूरा करेगी, साथ ही निजी ऑपरेटरों को नए अवसर प्रदान करेगी।
(व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें- https://whatsapp.com/channel/0029ValRqro5K3zMVUrxrl28)
प्रबंधन और निगरानी: त्रि-स्तरीय सिस्टम से पारदर्शिता
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली बैठक में योजना की रूपरेखा तय की गई। राज्य परिवहन प्राधिकरण के अधीन 7 सरकारी कंपनियां जिम्मेदारी संभालेंगी, जो वर्तमान में शहरों में लोकल बसें चला रही हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों और अंतर-जिला रूटों का संचालन भी शामिल होगा।
- कॉन्ट्रैक्ट मॉडल: रूट सरकार तय करेगी, लेकिन संचालन निजी ऑपरेटर करेंगे। कॉन्ट्रैक्ट के जरिए सरकार की निगरानी बनी रहेगी।
- किराया निर्धारण: 7 क्षेत्रीय कंपनियों को अपने संभागों में किराया तय करने का अधिकार। इससे स्थानीय जरूरतों के अनुरूप दरें तय होंगी। प्रारंभिक फंडिंग के रूप में प्रत्येक कंपनी को 1 करोड़ रुपये मिलेंगे।
- प्रशासनिक ढांचा:
- अध्यक्ष: राज्य सरकार द्वारा नियुक्त।
- डायरेक्टर: संभागीय मुख्यालय में जिला कलेक्टर या विकास प्राधिकरण के सीईओ।
- कार्यकारी संचालक: कंपनी मुख्यालय में नगर निगम आयुक्त या विकास प्राधिकरण के सीईओ।
- संचालक मंडल: लोक निर्माण और ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियंता शामिल।
- सलाहकार समिति: प्रत्येक जिले में जिला प्रभारी मंत्री, कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों की समिति, जो सलाह देगी और ऑपरेटरों के हितों की रक्षा करेगी।
- तकनीकी एकीकरण: यात्रियों और ऑपरेटरों के लिए डेडिकेटेड मोबाइल ऐप, तथा कंपनियों के लिए सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड।
संचालन करने वाली प्रमुख कंपनियां
ये 7 कंपनियां अपने-अपने संभागों में बसें चलाएंगी:
- भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड: भोपाल और नर्मदापुरम संभाग।
- जबलपुर, उज्जैन, सागर सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनियां: अपने-अपने संभाग।
- अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड: इंदौर संभाग।
- रीवा सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी: रीवा और शहडोल संभाग।
- ग्वालियर-चंबल संभाग: नई कंपनी का गठन होगा।
ई-बसों के संचालन और रखरखाव के लिए ग्रीन सेल मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यात्रियों और ऑपरेटरों के लिए खास सुविधाएं: कनेक्टिविटी से आगे
‘जनबस’ योजना केवल बसें चलाने तक सीमित नहीं है। इसके तहत:
- ग्रामीण-आदिवासी फोकस: दूरदराज इलाकों तक बसें पहुंचेंगी, जहां परिवहन अभियान एक सपना था।
- कार्गो सुविधा: बसों से माल परिवहन भी होगा, जिससे ऑपरेटरों की आय बढ़ेगी।
- बुनियादी ढांचा: हर जिले में आधुनिक बस स्टैंड, डिपो और स्टॉप बनेंगे। सरकार और निजी कंपनियां मिलकर यह काम करेंगी।
- परमिट प्राथमिकता: अनुबंधित बसों को परमिट में प्राथमिकता, लेकिन नियंत्रण सरकार का।
- पर्यावरण अनुकूल: ई-बसों पर जोर, जो प्रदूषण कम करेंगी।
ई-बसों की क्रांति: सस्ती, सुरक्षित और स्मार्ट
केंद्र की नेशनल ई-बस स्कीम के तहत मध्य प्रदेश को 582 ई-बसें मिल रही हैं (इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में)। इनमें 472 मिडी ई-बसें (26 सीटर) और 110 मिनी ई-बसें (21 सीटर) शामिल हैं। किराया मौजूदा सिटी बसों से काफी कम होगा।
ई-बसों की खासियतें:
- पूरी तरह एसी।
- 5 सीसीटीवी कैमरे (आगे, पीछे, ड्राइवर कैबिन और पैसेंजर एरिया में)।
- पैसेंजर काउंटिंग मशीन मुख्य गेट पर।
- दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर रैंप/लिफ्ट।
- डिपो निर्माण पर 58 करोड़ रुपये (केंद्र से 60% फंडिंग)। केंद्र 12 वर्षों तक संचालन-रखरखाव का खर्च वहन करेगा।
प्रभाव: आर्थिक उन्नति और सामाजिक बदलाव
यह योजना न केवल यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। आदिवासी क्षेत्रों में बाजारों, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच बढ़ेगी। ऑपरेटरों को स्थिर आय मिलेगी, जबकि सरकार को केंद्रीय फंडिंग से वित्तीय बोझ कम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘जनबस’ मध्य प्रदेश को परिवहन के मामले में अन्य राज्यों का मॉडल बना सकती है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “यह जनता की मांग थी। हम ग्रामीण भारत को शहरों से जोड़कर विकास की नई गति देंगे।” योजना की सफलता के लिए सरकार हर स्तर पर निगरानी रखेगी। क्या आप तैयार हैं इस नई यात्रा के लिए? अधिक अपडेट्स के लिए बने रहें।
यह भी पढ़ें…
30 साल के बाद कई गुना बढ़ जाता है COPD का खतरा, समय रहते पहचानें लक्षण और करें बचाव
मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।










