ग्रेच्युटी में 20-50% तक बढ़ोतरी! विभिन्न वेतन स्तरों पर गणना और लाभ – कर्मचारियों-नियोक्ताओं के लिए पूरी जानकारी
New Gratuity Calculator Labour Code 2025 | 4 दिसंबर 2025: भारत सरकार ने 21 नवंबर 2025 से चार नए श्रम संहिताओं – वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति संहिता 2020 – को प्रभावी कर दिया है। ये 29 पुराने श्रम कानूनों को एकीकृत करती हैं, जो कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी, पीएफ, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा में सुधार लाती हैं। विशेष रूप से, ‘मजदूरी’ की नई व्यापक परिभाषा से ग्रेच्युटी की गणना का आधार बढ़ेगा, जिससे पेआउट में 20-50% तक वृद्धि हो सकती है। ईवाई इंडिया के पार्टनर पुनीत गुप्ता के अनुसार, यह बदलाव अनुपालन को सरल बनाते हुए कर्मचारियों को अधिक लाभ सुनिश्चित करता है, लेकिन नियोक्ताओं पर वित्तीय बोझ भी बढ़ा सकता है।
मेनस्टे टैक्स एडवाइजर्स के पार्टनर कुलदीप कुमार बताते हैं, “पुराने कानूनों में ‘मजदूरी’ और ‘वेतन’ की अलग-अलग परिभाषाओं से गणना में असंगतियां और मुकदमेबाजी होती थी। अब एकसमान परिभाषा से ग्रेच्युटी, ओवरटाइम और अन्य लाभों की गणना आसान हो जाएगी।” आइए, नए नियमों की व्याख्या करें, गणना उदाहरण देखें और विभिन्न वेतन स्तरों पर प्रभाव समझें।
मजदूरी की नई परिभाषा: क्या शामिल, क्या बाहर?
सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 की धारा 2(y) के तहत ‘मजदूरी’ अब व्यापक है। इसमें शामिल:
- मूल वेतन (Basic Salary)
- महंगाई भत्ता (DA)
- प्रतिधारण भत्ता (Retention Allowance), यदि लागू हो
बाहर रखे गए (लेकिन 50% कैप के साथ):
- बोनस (कानूनी रूप से देय)
- घर-आवास, बिजली, पानी, चिकित्सा सुविधाएं
- पीएफ/पेंशन में नियोक्ता योगदान और ब्याज
- मकान किराया भत्ता (HRA)
- पुरस्कार/कोर्ट ऑर्डर से देय राशि
- ओवरटाइम भत्ता
- कमीशन
- ग्रेच्युटी, छंटनी मुआवजा या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ
महत्वपूर्ण शर्त: यदि ऊपर सूचीबद्ध बहिष्कृत भत्ते कुल पारिश्रमिक के 50% से अधिक हैं, तो अतिरिक्त राशि को मजदूरी में जोड़ा जाएगा। साथ ही, गैर-नकद लाभ (जैसे पिक-अप/ड्रॉप, मुफ्त भोजन) का मूल्य कुल मजदूरी के 15% तक जोड़ा जा सकता है। कुलदीप कुमार कहते हैं, “यह सुनिश्चित करता है कि कंपनियां वेतन घटकों को मैनिपुलेट न कर सकें, जिससे PF, ग्रेच्युटी जैसी गणनाएं बढ़ेंगी।”
ग्रेच्युटी गणना का नया फॉर्मूला
ग्रेच्युटी सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत देय है, जब कर्मचारी सेवानिवृत्त होता है, इस्तीफा देता है या समाप्ति पर। पुराने पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के तहत केवल मूल वेतन + DA पर आधारित थी। अब:
फॉर्मूला: ग्रेच्युटी = (अंतिम आहरित मजदूरी × 15/26) × सेवा वर्षों की संख्या
- 6 महीने से अधिक सेवा को पूरे वर्ष में गिना जाता है (नियमित कर्मचारियों के लिए)।
- अधिकतम सीमा: ₹20 लाख (सरकार संशोधन के बिना बढ़ा सकती है)।
- भुगतान: देय तिथि से 30 दिनों के अंदर, वरना 10% वार्षिक ब्याज + जुर्माना (पहली चूक पर ₹10,000, बाद में अधिक)।
विभिन्न वेतन स्तरों पर ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी: गणना उदाहरण
नई परिभाषा से ग्रेच्युटी का आधार बढ़ता है, खासकर जहां मूल वेतन CTC का 50% से कम है। नीचे विभिन्न CTC स्तरों के लिए तुलना (5 वर्ष सेवा मानकर, DA=0% के लिए सरलीकृत):
| CTC (मासिक) | मूल वेतन (पुराना आधार) | बहिष्कृत भत्ते (% CTC) | नई मजदूरी (50% कैप + 15% गैर-नकद) | पुरानी ग्रेच्युटी (₹) | नई ग्रेच्युटी (₹) | बढ़ोतरी (%) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| ₹50,000 | ₹20,000 (40%) | ₹30,000 (60%) | ₹28,000 (50% कैप लागू) | ₹2,30,769 | ₹2,84,615 | +23% |
| ₹1,00,000 | ₹40,000 (40%) | ₹60,000 (60%) | ₹57,600 (50% + 15% गैर-नकद) | ₹4,61,538 | ₹6,00,000 | +30% |
| ₹2,00,000 | ₹80,000 (40%) | ₹1,20,000 (60%) | ₹1,20,000 (50% + 15%) | ₹9,23,077 | ₹12,00,000 | +30% |
| ₹5,00,000 | ₹2,00,000 (40%) | ₹3,00,000 (60%) | ₹3,00,000 (50% + 15%) | ₹23,07,692 | ₹30,00,000 | +30% |
उदाहरण व्याख्या (₹1 लाख CTC वाले केस से):
- पुराना: मूल वेतन ₹40,000 → (40,000 × 15/26) × 5 = ₹4,61,538
- नया: बहिष्कृत भत्ते 60% > 50%, अतिरिक्त ₹10,000 जोड़ें + ₹7,600 (15% गैर-नकद) → मजदूरी ₹57,600 → (57,600 × 15/26) × 5 = ₹6,00,000
- फायदा: ₹1,38,462 अतिरिक्त!
(नोट: वास्तविक गणना में DA, गैर-नकद मूल्य आदि शामिल करें। BDO और TOI रिपोर्ट्स के आधार पर अनुमानित।)
फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए बड़ा लाभ
पुराने नियम: 5 वर्ष निरंतर सेवा जरूरी। नया: फिक्स्ड-टर्म (निश्चित अवधि) कर्मचारियों को 1 वर्ष सेवा के बाद आनुपातिक ग्रेच्युटी देय। उदाहरण (2 वर्ष सेवा, ₹50,000 CTC, मजदूरी ₹28,000): ग्रेच्युटी = (28,000 × 15/26) × 2 = ₹1,23,077 (पुराने में 0, क्योंकि 5 वर्ष नहीं)। कुलदीप कुमार कहते हैं, “यह लाखों कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को लाभ देगा, जो अक्सर जॉब स्विच करते हैं।”
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
- समावेशी कवरेज: गिग/प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा, महिलाओं को नाइट शिफ्ट की अनुमति।
- नियोक्ता दायित्व: CTC का कम से कम 50% बेसिक सैलरी अनिवार्य, टेक-होम सैलरी घट सकती है लेकिन PF/ग्रेच्युटी बढ़ेगी।
- अनिश्चितताएं: गैर-नकद लाभ (स्टॉक ऑप्शंस, टॉप-अप इंश्योरेंस) की व्याख्या अस्पष्ट – मुकदमेबाजी संभव। पुरानी सेवा पर लागू होगा या नहीं, अंतिम नियमों पर निर्भर।
- नियोक्ताओं के लिए: वित्त वर्ष 2025-26 में अतिरिक्त प्रावधान जरूरी; ग्रैंडफादरिंग क्लॉज की उम्मीद।
कर्मचारियों को फायदा, लेकिन स्पष्टता जरूरी
नए कोड से ग्रेच्युटी में वृद्धि और पात्रता आसान हो गई है, जो रिटायरमेंट सिक्योरिटी मजबूत करेगी। लेकिन कुलदीप कुमार चेताते हैं, “परिभाषा जटिल है – सरलीकरण की जरूरत।” कर्मचारियों को सैलरी स्ट्रक्चर चेक करें, नियोक्ताओं को अनुपालन सुनिश्चित करें। पूर्ण डिटेल्स के लिए श्रम मंत्रालय की वेबसाइट देखें। यह बदलाव भारत को आधुनिक श्रम बाजार की ओर ले जा रहे हैं
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मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।









