ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना पाकिस्तान पर समुद्र से हमला करने से कुछ ही मिनट दूर थी, लेकिन उसी समय पाकिस्तान ने कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया। इस खुलासे ने भारत की सैन्य तैयारियों और रणनीतिक क्षमता को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
ऑपरेशन सिंदूर में नौसेना की आक्रामक तैयारी
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने बेहद तेज और आक्रामक रणनीति अपनाई थी। एडमिरल त्रिपाठी के अनुसार, नौसेना की यूनिट्स ने तुरंत तैनाती की और पूरे समय उच्च सतर्कता बनाए रखी। इस ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय नौसेना किसी भी परिस्थिति में तुरंत जवाब देने के लिए तैयार रहती है।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि यह अब कोई छिपी बात नहीं है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत समुद्र के रास्ते हमला करने के बेहद करीब पहुंच चुका था।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ अभियान
ऑपरेशन सिंदूर पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने अपनी सैन्य ताकत और रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया। नौसेना के अधिकारियों को इस अभियान में उत्कृष्ट सेवा के लिए युद्ध सेवा पदक भी प्रदान किए गए।
इस अभियान के जरिए देशवासियों का भरोसा भारतीय नौसेना पर और मजबूत हुआ है।
वैश्विक हालात और समुद्री सुरक्षा पर चिंता
ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में एडमिरल त्रिपाठी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण कई व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए हैं। करीब 1900 जहाज इस संघर्ष के चलते प्रभावित हुए हैं और समुद्री मार्गों पर आवाजाही भी कम हुई है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में समुद्र केवल सहायक युद्ध क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह रणनीतिक टकराव का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
आत्मनिर्भरता और नौसेना की बढ़ती ताकत
ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के साथ भारतीय नौसेना लगातार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही है। एक साल में 12 नए जहाज और पनडुब्बियों को शामिल करना इस दिशा में बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा म्यांमार और श्रीलंका जैसे देशों में राहत और बचाव अभियानों के जरिए भारत ने क्षेत्र में अपनी भूमिका को और मजबूत किया है।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय नौसेना की ताकत, तत्परता और रणनीतिक क्षमता को दुनिया के सामने पेश किया है। यह अभियान आने वाले समय में भारत की सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
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