भारत की बदलती जनसांख्यिकी: 10 वर्षों में 24.6% की दर से बढ़ी मुस्लिम आबादी, PM मोदी के ‘हाई-पावर डेमोग्राफी मिशन’ से घुसपैठ और धर्मांतरण पर लगेगी रोक?

भारत की बदलती जनसांख्यिकी: 10 वर्षों में 24.6% की दर से बढ़ी मुस्लिम आबादी, PM मोदी के ‘हाई-पावर डेमोग्राफी मिशन’ से घुसपैठ और धर्मांतरण पर लगेगी रोक?

PM Modi on Infiltration and Conversion | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देश को संबोधित करते हुए एक गंभीर मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने भारत की बदलती जनसांख्यिकी (Demography) को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया। पीएम मोदी ने घोषणा की कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए एक ‘हाई-पावर डेमोग्राफी मिशन’ शुरू कर रही है। यह मिशन अवैध घुसपैठ, जबरन धर्मांतरण, और जनसंख्या संतुलन में हो रहे असंतुलन को नियंत्रित करने पर केंद्रित होगा। विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों जैसे असम, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, और झारखंड में अवैध घुसपैठ के कारण जनसांख्यिकी में तेजी से बदलाव हो रहा है, जो सामाजिक, सांस्कृतिक, और सुरक्षा के दृष्टिकोण से चिंताजनक है। इस लेख में हम इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं, इसके कारणों, प्रभावों, और सरकार की रणनीति पर विस्तार से चर्चा करेंगे। PM Modi on Infiltration and Conversion

जनसांख्यिकी में बदलाव: आंकड़े और तथ्य

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) और प्रोफेसर शमिका रवि की एक रिसर्च के अनुसार, 2001 से 2011 के बीच भारत की जनसंख्या में महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं। इस दौरान देश की कुल जनसंख्या 17.7% बढ़ी, लेकिन विभिन्न धार्मिक समूहों की वृद्धि दर में उल्लेखनीय अंतर रहा।

  • मुस्लिम आबादी में तेज वृद्धि: मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या 24.6% की दर से बढ़ी, जो सभी धार्मिक समूहों में सबसे अधिक थी। 2001 में मुस्लिमों का हिस्सा 13.43% था, जो 2011 में बढ़कर 14.23% हो गया।

  • हिंदू आबादी में कमी: हिंदुओं का हिस्सा 80.46% से घटकर 79.8% हो गया। 227 जिलों में हिंदू आबादी का हिस्सा 0.7% से अधिक कम हुआ।

  • ईसाई और अन्य समुदाय: ईसाई आबादी 69% जिलों में बढ़ी, विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों (नागालैंड, मिजोरम, मेघालय, और अरुणाचल प्रदेश) में, जहां 238 जिलों में 50% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। जैन समुदाय की वृद्धि दर सबसे कम (5.4%) रही।

  • अन्य बदलाव: जिन लोगों ने जनगणना में अपना धर्म नहीं बताया, उनकी संख्या में तीन गुना वृद्धि हुई, जो सामाजिक बदलाव का एक और संकेत है।

सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज (CPS) की जनवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, केरल में मुस्लिम बच्चों का जन्म अनुपात हिंदुओं से अधिक हो गया है। 2008 से 2019 के बीच, मुस्लिम बच्चों की हिस्सेदारी 36% से बढ़कर 44% हो गई, जबकि हिंदुओं की हिस्सेदारी 45% से घटकर 41% और ईसाइयों की 17% से 14% हो गई। यह दर्शाता है कि मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर उनकी कुल जनसंख्या के अनुपात से कहीं अधिक है।

whatsapp group link

ग्रुप जॉइन करने के लिए क्लिक करें: https://whatsapp.com/channel/0029ValRqro5K3zMVUrxrl28

अवैध घुसपैठ: सीमावर्ती राज्यों में गहराता संकट

भारत के सीमावर्ती राज्यों, विशेष रूप से असम, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, और झारखंड में अवैध घुसपैठ एक गंभीर समस्या बन चुकी है। बांग्लादेश और म्यांमार से आने वाले अवैध प्रवासियों, विशेष रूप से बांग्लादेशी मुस्लिमों और रोहिंग्या, ने इन राज्यों की जनसांख्यिकी को प्रभावित किया है।

असम: बांग्लादेशी घुसपैठ का केंद्र

असम में बांग्लादेश के साथ खुली सीमा के कारण अवैध घुसपैठ लंबे समय से एक समस्या रही है। 2011 की जनगणना के अनुसार, असम में मुस्लिम आबादी 2001 के 30.9% से बढ़कर 34% हो गई। धुबरी, बारपेटा, गोलपाड़ा, और मोरीगांव जैसे जिले अब मुस्लिम-बहुल हो गए हैं। 2019 में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की प्रक्रिया में 19 लाख लोग अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए, जिनमें से अधिकांश अवैध बांग्लादेशी प्रवासी माने गए।

अवैध प्रवासियों द्वारा नकली आधार कार्ड, राशन कार्ड, और अन्य दस्तावेज बनवाकर स्थानीय संसाधनों पर कब्जा करने की घटनाएं आम हैं। असम सरकार ने ‘ऑपरेशन पुशबैक’ के तहत ऐसे प्रवासियों की पहचान, हिरासत, और निर्वासन की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन यह चुनौती अभी भी बनी हुई है।

पश्चिम बंगाल: राजनीतिक तुष्टिकरण का प्रभाव

पश्चिम बंगाल में भी बांग्लादेशी घुसपैठ एक गंभीर मुद्दा है। मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर 24 परगना, और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी में तेज वृद्धि देखी गई है। कुछ रिपोर्ट्स में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह वोट बैंक की राजनीति के लिए अवैध प्रवासियों के प्रति नरम रवैया अपनाती है। इन क्षेत्रों में हिंदू आबादी का अनुपात 1% से अधिक कम हुआ है, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।

अन्य राज्य

त्रिपुरा, झारखंड, और जम्मू-कश्मीर में भी अवैध प्रवासियों की उपस्थिति ने जनसांख्यिकी को प्रभावित किया है। त्रिपुरा में हिंदू जनजातीय समुदायों की आबादी पर दबाव बढ़ा है, जबकि झारखंड में आदिवासी क्षेत्रों में अवैध प्रवासियों और धर्मांतरण की गतिविधियों ने स्थानीय संस्कृति को खतरे में डाला है।

धर्मांतरण: एक सोची-समझी रणनीति?

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में संकेत दिया कि कुछ संगठन और समूह भारत की धार्मिक संरचना को बदलने के लिए विदेशी फंडिंग का उपयोग कर रहे हैं। यह विशेष रूप से दो रूपों में देखा जा रहा है:

  1. इस्लामी धर्मांतरण: छांगुर पीर जलालुद्दीन जैसे व्यक्तियों और संगठनों पर विदेशी धन के माध्यम से धर्मांतरण गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप है। यह मुख्य रूप से गरीब और कमजोर वर्गों को निशाना बनाता है।

  2. ईसाई मिशनरी गतिविधियां: पूर्वोत्तर राज्यों में ईसाई मिशनरियां ‘प्रार्थना सभाओं’ के नाम पर आर्थिक प्रलोभन, शिक्षा, और स्वास्थ्य सेवाओं का वादा देकर धर्मांतरण को बढ़ावा दे रही हैं। नागालैंड, मिजोरम, और मेघालय में ईसाई आबादी में 50% से अधिक की वृद्धि इसका प्रमाण है।

सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव

जनसांख्यिकी में बदलाव केवल संख्याओं का खेल नहीं है; इसके सामाजिक, सांस्कृतिक, और सुरक्षा पर गहरे प्रभाव पड़ रहे हैं। कुछ प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  • हिंदू संस्कृति पर खतरा: असम, पश्चिम बंगाल, और केरल जैसे राज्यों में हिंदू आबादी के अनुपात में कमी ने स्थानीय संस्कृति और परंपराओं पर दबाव डाला है। उदाहरण के लिए, धुबरी (असम) में जून 2025 में एक हनुमान मंदिर में बकरीद के बाद गाय का कटा हुआ सिर मिला, जिसने स्थानीय हिंदुओं में भय पैदा किया। इसी तरह, उत्तर प्रदेश के संभल में एक प्राचीन हरिहर मंदिर को मस्जिद बताने को लेकर विवाद हुआ, जहां हिंदू मंदिर अब सुनसान पड़े हैं।

  • धार्मिक असहिष्णुता: मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में हिंदू त्योहारों जैसे होली, दीवाली, रामनवमी, और गणेशोत्सव पर आपत्तियां और हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। रामनवमी और हनुमान जयंती के जुलूसों पर पथराव और हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। कुछ मामलों में, मस्जिदों से भीड़ जुटाने के ऐलान किए गए।

  • सुरक्षा पर खतरा: अवैध घुसपैठिए सीमा पार तस्करी, हिंसा, और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है, खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में।

राजनीतिक प्रभाव: इतिहास और वर्तमान

जनसांख्यिकी में बदलाव का राजनीतिक प्रभाव भी गहरा है। मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में एकजुट वोटिंग पैटर्न के कारण राजनीतिक तुष्टिकरण बढ़ा है। यह इतिहास में भी देखा गया है, जब 1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधारों और 1935 के भारत सरकार अधिनियम के तहत मुस्लिमों को पृथक निर्वाचिका दी गई थी। इसने मुस्लिम लीग को सशक्त किया और अंततः भारत के विभाजन का कारण बना।

1946 के प्रांतीय चुनावों में मुस्लिम लीग ने 87% मुस्लिम सीटें जीतीं, जो उनकी अलगाववादी मांगों को दर्शाता है। जिन्ना के ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ ने व्यापक हिंसा को जन्म दिया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोग मारे गए और देश का बंटवारा हुआ। आज, कुछ मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में ‘मिनी पाकिस्तान’ जैसे हालात बन रहे हैं, जहां मुख्यधारा से अलगाव और कट्टरपंथी सोच बढ़ रही है।

हाई-पावर डेमोग्राफी मिशन: सरकार की रणनीति

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित ‘हाई-पावर डेमोग्राफी मिशन’ इस संकट से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस मिशन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. अवैध घुसपैठ पर रोक: ‘ऑपरेशन पुशबैक’ को और सशक्त करते हुए, अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत, और निर्वासन की प्रक्रिया को तेज करना।

  2. धर्मांतरण पर नियंत्रण: जबरन या प्रलोभन के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कानून बनाना और लागू करना। कई राज्यों में पहले से ही धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हैं, जिन्हें और प्रभावी किया जाएगा।

  3. सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी: असम, पश्चिम बंगाल, और त्रिपुरा जैसे राज्यों में सीमा सुरक्षा को मजबूत करना और अवैध प्रवास को रोकने के लिए उन्नत तकनीक का उपयोग करना।

  4. जागरूकता और सामाजिक संतुलन: जनसांख्यिकी में बदलाव के प्रभावों के बारे में जनता को जागरूक करना और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए नीतियां लागू करना।

भारत की धर्मनिरपेक्षता और भविष्य

भारत की धर्मनिरपेक्षता हिंदू बहुसंख्यक आबादी के कारण बनी हुई है, जो सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता का आधार प्रदान करती है। हालांकि, जनसांख्यिकी में तेजी से बदलाव इस संतुलन को खतरे में डाल सकता है। यदि हिंदू आबादी का अनुपात कम होता गया, तो भारत का धर्मनिरपेक्ष चरित्र कमजोर हो सकता है, जैसा कि बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों में देखा गया है।

2021 के एक सर्वे में 74% भारतीय मुस्लिमों ने कहा कि वे शरिया कानून को भारत के कानूनों से ऊपर मानते हैं। यह मुख्यधारा से अलगाव और कट्टरपंथी सोच का संकेत है। बांग्लादेश में हाल की हिंसा, जहां चरमपंथी ताकतों ने हिंदुओं को निशाना बनाया, भारत के लिए एक चेतावनी है। PM Modi on Infiltration and Conversion

भारत की जनसांख्यिकी में हो रहे बदलाव केवल आंकड़ों की बात नहीं हैं; यह देश की संस्कृति, सुरक्षा, और धर्मनिरपेक्षता पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए भारत की बदलती जनसांख्यिकी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया। उन्होंने ‘हाई-पावर डेमोग्राफी मिशन’ की शुरुआत की घोषणा की, जिसका उद्देश्य अवैध घुसपैठ, जबरन धर्मांतरण, और जनसंख्या असंतुलन को नियंत्रित करना है। विशेष रूप से असम, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, और झारखंड जैसे सीमावर्ती राज्यों में अवैध घुसपैठ के कारण जनसांख्यिकी में तेजी से बदलाव हो रहा है, जो सामाजिक, सांस्कृतिक, और सुरक्षा के दृष्टिकोण से चिंताजनक है। यह लेख इस मुद्दे के कारणों, प्रभावों, और सरकार की रणनीति पर विस्तृत चर्चा करता है। PM Modi on Infiltration and Conversion


यह भी पढ़ें….
इंडोनेशिया में 5.7 तीव्रता का भूकंप: सुलावेसी में डोली धरती, रिंग ऑफ फायर की भूगर्भीय गतिविधियों ने बढ़ाई चिंता

Leave a Comment

अहान पांडे कौन हैं? साउथ के मशहूर विलेन कोटा श्रीनिवास का निधन Kota Srinivasa Rao death news शर्मनाक जांच! ठाणे के स्कूल में छात्राओं के कपड़े उतरवाए गए अर्चिता फुकन और Kendra Lust की वायरल तस्‍वीरें! जानिए Babydoll Archi की हैरान कर देने वाली कहानी बाइक और स्कूटर चलाने वालों के लिए बड़ी खबर! Anti-Lock Braking System लो हो गया पंचायत सीजन 4 रिलीज, यहां देखें