दुश्मनों के लिए काल: प्रोजेक्ट-18 नेक्स्ट जेनरेशन डिस्ट्रॉयर, 144 मिसाइलों और ब्रह्मोस के साथ
Project_18_Next_Generation_Destroyer | आज का वैश्विक परिदृश्य सैन्य तनावों और तकनीकी होड़ से भरा हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास संघर्ष, और हाल ही में थाईलैंड-कंबोडिया के बीच सैन्य तनाव ने विश्व को दो खेमों में बांट दिया है। इसके साथ ही, हर देश अपनी रक्षा प्रणालियों को मजबूत करने में जुटा है। भारत, जिसकी सीमाएं पाकिस्तान और चीन जैसे चुनौतीपूर्ण पड़ोसियों से घिरी हैं, अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार उन्नत कर रहा है। पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव और चीन के आक्रामक रवैये ने भारत को अपनी सेना के तीनों अंगों—नौसेना, थल सेना, और वायुसेना—को अत्याधुनिक बनाने के लिए प्रेरित किया है। इस दिशा में भारतीय नौसेना का प्रोजेक्ट-18 एक क्रांतिकारी कदम है, जो नेक्स्ट जेनरेशन डिस्ट्रॉयर के साथ भारत की समुद्री शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। Project_18_Next_Generation_Destroyer
प्रोजेक्ट-18 के तहत विकसित होने वाला नेक्स्ट जेनरेशन डिस्ट्रॉयर भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे बड़ा और तकनीकी रूप से सबसे उन्नत युद्धपोत होगा। लगभग 13,000 टन वजनी यह डिस्ट्रॉयर आकार और मारक क्षमता के मामले में मौजूदा विशाखापट्टनम-क्लास डिस्ट्रॉयर से कहीं आगे होगा। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, इसे क्रूजर श्रेणी में भी वर्गीकृत किया जा सकता है। यह युद्धपोत 144 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) सेल्स से लैस होगा, जो इसे हवा, जमीन, और समुद्र में किसी भी खतरे से निपटने की बहुआयामी क्षमता प्रदान करेगा।
हथियार प्रणाली: 144 मिसाइलों का अचूक प्रहार
इस डिस्ट्रॉयर की हथियार प्रणाली इसे दुश्मनों के लिए अभेद्य बनाती है। इसकी मारक क्षमता निम्नलिखित है:
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32 VLS सेल: जहाज के पिछले हिस्से में तैनात, जिनमें PGLRSAM (लॉन्ग रेंज सर्फेस-टू-एयर मिसाइल) मिसाइलें होंगी। ये मिसाइलें 250 किमी की रेंज में विमान और बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम हैं।
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48 VLS सेल: ब्रह्मोस एक्सटेंडेड रेंज क्रूज मिसाइल और स्वदेशी तकनीक से विकसित क्रूज मिसाइलों के लिए, जो जल और जमीन पर सटीक हमले कर सकती हैं।
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64 VLS सेल: कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए, जो जहाज की अंतिम रक्षा पंक्ति के रूप में काम करेंगी।
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8 स्लांट लॉन्चर: संभवतः हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-2 मिसाइलों के लिए, जो भविष्य की युद्ध प्रणालियों में क्रांति लाएंगी।
इसके अतिरिक्त, युद्धपोत में एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो ट्यूब, और 76 मिमी या 127 मिमी की नेवल गन भी शामिल होगी, जो इसे हर तरह के समुद्री युद्ध के लिए तैयार करेगी।
अत्याधुनिक रडार और सेंसर प्रणाली
प्रोजेक्ट-18 डिस्ट्रॉयर की सबसे बड़ी ताकत इसकी उन्नत रडार और सेंसर प्रणाली है, जिसे डीआरडीओ और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इसमें चार Active Electronically Scanned Array (AESA) रडार शामिल हैं, जिनमें:
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एस-बैंड प्राइमरी रडार: लंबी दूरी की निगरानी और लक्ष्य ट्रैकिंग के लिए।
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वॉल्यूम सर्च रडार: हवाई और समुद्री खतरों की त्वरित पहचान के लिए।
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मल्टी-सेंसर मस्त: 360-डिग्री निगरानी और 500 किमी से अधिक दूरी के लक्ष्यों को ट्रैक करने की क्षमता।
ये प्रणालियां इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के जटिल वातावरण में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकती हैं, जिससे यह डिस्ट्रॉयर आधुनिक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है।
आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक
प्रोजेक्ट-18 ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत पहल का एक शानदार उदाहरण है। इस युद्धपोत में 75% से अधिक स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। इसके प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:
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इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (IEP) सिस्टम: ऊर्जा दक्षता और गति के लिए।
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स्टील्थ फीचर्स: दुश्मन के रडार से बचने के लिए डिजाइन।
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मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर: दो हेलीकॉप्टरों की तैनाती और रेल-लेस हेलीकॉप्टर ट्रैवर्सिंग सिस्टम।
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स्वायत्त जलयान: पनडुब्बी रोधी और बारूदी सुरंग खोज अभियानों के लिए।
ये विशेषताएं युद्धपोत को न केवल शक्तिशाली, बल्कि बहुमुखी और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाती हैं।
निर्माण और भविष्य की योजना
प्रोजेक्ट-18 की योजना के अनुसार, अगले पांच वर्षों में परियोजना की रूपरेखा पूरी की जाएगी, और अगले दस वर्षों में सभी डिस्ट्रॉयर भारतीय नौसेना को सौंप दिए जाएंगे। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) जैसे प्रमुख भारतीय शिपयार्ड इस परियोजना में अहम भूमिका निभाएंगे। भारत का लक्ष्य 2035 तक अपनी नौसेना में 170-175 युद्धपोतों की संख्या हासिल करना है, और प्रोजेक्ट-18 इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये डिस्ट्रॉयर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करेंगे।
इंडो-पैसिफिक में भारत की रणनीतिक बढ़त
चीन के इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव और हिंद महासागर में उसकी नौसैनिक गतिविधियों के बीच, प्रोजेक्ट-18 डिस्ट्रॉयर भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। यह युद्धपोत न केवल क्षेत्रीय खतरों, बल्कि वैश्विक स्तर पर समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और भारत के सामरिक हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रोजेक्ट-18 नेक्स्ट जेनरेशन डिस्ट्रॉयर केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की समुद्रीशक्ति, तकनीकीआत्मनिर्भरता, और रणनीतिकसंकल्प का प्रतीक है। 144 मिसाइलों, ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों, और अत्याधुनिक रडार प्रणालियों से लैस यह डिस्ट्रॉयर भारत को वैश्विक स्तर पर सबसे उन्नतनौसैनिक शक्तियों में शामिल करेगा। यह परियोजनाआत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने और वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। Project_18_Next_Generation_Destroyer
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मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।









