धनतेरस 2024: जानिए इसकी पूजन विधि, इतिहास और महत्व
Prosperity Rituals for Dhanteras | धनतेरस का पर्व भारत में दिवाली महोत्सव की शुरुआत का प्रतीक है, जिसे पूरे देश में बड़े उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह दिन मुख्यतः धन और संपत्ति की देवी माँ लक्ष्मी तथा स्वास्थ्य और आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि को समर्पित है। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है, और इसे “धन त्रयोदशी” के नाम से भी जाना जाता है।
धनतेरस का इतिहास और पौराणिक कथाएं
धनतेरस के पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं, जो इस दिन के महत्व को बढ़ाती हैं। इनमें सबसे प्रमुख कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय धन्वंतरि भगवान अमृत कलश लेकर समुद्र से प्रकट हुए थे, जो आयुर्वेद के जनक माने जाते हैं। उनके साथ ही देवी लक्ष्मी भी समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुईं, जिनका आशीर्वाद समृद्धि और ऐश्वर्य के प्रतीक के रूप में माना गया। इसी कारण से धनतेरस के दिन माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। Prosperity Rituals for Dhanteras
एक अन्य कथा राजा हिम के पुत्र की मृत्यु से जुड़ी है, जिसमें मृत्यु को टालने के लिए उसकी पत्नी ने यमराज के आने के दिन दीप जलाकर अपने पति के प्राणों की रक्षा की थी। इस कथा से जुड़ी मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर दीप जलाना और नए बर्तन खरीदना शुभ माना गया है। Prosperity Rituals for Dhanteras
धनतेरस पूजन की विधि
धनतेरस की पूजा विशेष प्रकार से की जाती है और यह पूरे परिवार के लिए मंगलकारी मानी जाती है। यहाँ धनतेरस की पूजन विधि का संपूर्ण विवरण दिया गया है:
- सफाई और सजावट: इस दिन सुबह-सुबह घर को अच्छे से साफ करना चाहिए और पूजा स्थल को सजाना चाहिए। माना जाता है कि माँ लक्ष्मी साफ-सुथरे घर में ही वास करती हैं, इसलिए पूजा से पहले घर की सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।
- स्नान और संकल्प: स्नान के बाद पवित्र मन से संकल्प लें कि आप यह पूजा अपने घर की समृद्धि और सुख-शांति के लिए कर रहे हैं। यह भी मान्यता है कि इस दिन परिवार की भलाई और समृद्धि के लिए संकल्पित होकर पूजा करने से माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है। Prosperity Rituals for Dhanteras
- माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की स्थापना: पूजा स्थल पर माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की मूर्ति स्थापित करें। मूर्तियों को जल से स्नान कराएं और उसके बाद उन्हें गुलाब की पंखुड़ियों, अक्षत, चंदन, कुमकुम आदि से सजा दें।
- दीप जलाना: लक्ष्मी माँ की मूर्ति के समक्ष एक दीपक जलाएं। दीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और यह दीपक पूजा के समय अखंडित रहना चाहिए। साथ ही धन्वंतरि के समक्ष भी दीप जलाएं, जिससे स्वास्थ्य और जीवन में ऊर्जा का संचार होता है। Prosperity Rituals for Dhanteras
- फूल और प्रसाद अर्पण: माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि को ताजे फूल, धूप और मिठाई अर्पण करें। प्रसाद के रूप में गुड़, मिठाई या खीर का भोग लगाया जा सकता है। इसे समर्पित करने से माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
- धनिया के बीज का महत्व: धनतेरस पर धनिया के बीज का विशेष महत्व होता है। पूजा के दौरान धनिया के बीजों को घर के प्रत्येक सदस्य को दिया जाता है। यह समृद्धि का प्रतीक माना जाता है और इसे जमीन में बोने से आगामी वर्ष में अच्छी फसल होने की मान्यता है। Prosperity Rituals for Dhanteras
- पंचोपचार पूजा: माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पंचोपचार पूजा करें। पंचोपचार में जल, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप का प्रयोग किया जाता है। माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि को विधिपूर्वक पूजें और अपनी श्रद्धा के अनुसार उन्हें प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जाप करें। Prosperity Rituals for Dhanteras
- यमदीप दान: धनतेरस की शाम को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का दीप जलाना अत्यंत शुभ माना गया है। इसे यमदीप कहा जाता है, और यह अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है। इस दिन यमराज के लिए दीप जलाकर परिवार की रक्षा और दीर्घायु की कामना की जाती है। Prosperity Rituals for Dhanteras
- नए बर्तन और धातुओं की खरीदारी: इस दिन नए बर्तन, सोना-चांदी या अन्य कीमती धातुओं की खरीद करना शुभ माना गया है। इस दिन सोने-चांदी या बर्तनों की खरीद से घर में माँ लक्ष्मी का वास होता है और घर में समृद्धि का संचार होता है।
- प्रसाद वितरण: पूजा के अंत में भगवान का आशीर्वाद लेकर प्रसाद वितरण करें और सभी के मंगल की कामना करें। पूजा के दौरान जो भी सामग्रियाँ और प्रसाद अर्पित किए गए हों, उन्हें पूरे परिवार के सदस्यों में वितरित करें। Prosperity Rituals for Dhanteras
धनतेरस पर खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त
धनतेरस के दिन खरीदी का विशेष महत्व है। इस दिन का शुभ मुहूर्त दिन के कुछ खास समय में होता है, जब माँ लक्ष्मी की पूजा और खरीदी करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। धनतेरस के दिन दोपहर और शाम के बीच का समय सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन लोग आभूषण, बर्तन, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, या घर का कोई अन्य सामान खरीदते हैं, जो उनकी समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है।
धनतेरस के दिन ध्यान रखने योग्य बातें
धनतेरस पर कुछ खास बातों का ध्यान रखना आवश्यक है, जिससे इस पर्व की पवित्रता और महत्ता बढ़ जाती है:
- स्वच्छता: धनतेरस की पूजा में स्वच्छता का विशेष महत्व है। माना जाता है कि माँ लक्ष्मी स्वच्छ स्थानों पर ही वास करती हैं, इसलिए पूजा से पहले पूरे घर की सफाई जरूर करें। Prosperity Rituals for Dhanteras
- दक्षिण दिशा में दीपक: यमराज के नाम पर दीपक जलाने का विधान दक्षिण दिशा में ही होता है, जिसे यमदीपदान कहते हैं। इसे द्वार पर जलाने से घर के सदस्यों की रक्षा होती है। Prosperity Rituals for Dhanteras
- कूड़ा-कचरा न रखें: इस दिन घर में बेकार और कचरा सामग्री नहीं होनी चाहिए। धनतेरस पर सफाई के साथ घर की हर कोने की व्यवस्थित रखने की मान्यता है। Prosperity Rituals for Dhanteras
- सोने और चांदी की खरीदी: इस दिन सोना-चांदी और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इससे लक्ष्मी जी का आशीर्वाद मिलता है और साल भर सुख-समृद्धि का वास रहता है।
- व्रत और उपवास: कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और माँ लक्ष्मी से अपनी समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। इस दिन फलाहार करना और घर में मिठाइयाँ बनाना भी शुभ माना जाता है।
धनतेरस का पर्व हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जो न केवल समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करता है, बल्कि परिवार और समाज में खुशियाँ बाँटने का संदेश भी देता है। देवी लक्ष्मी की कृपा से भरा यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि हर छोटी-बड़ी चीज़ में देवी का वास है। धनतेरस का यह त्योहार सिर्फ खरीदी या पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन में स्वास्थ्य और समृद्धि के प्रतीक के रूप में उभरता है।
इस पर्व को मनाने का उद्देश्य सिर्फ धन-संपत्ति प्राप्ति नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक ऊर्जा से भरना भी है। धनतेरस के दिन माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ यमराज के नाम दीप जलाना हर किसी के जीवन में शुभता और सुख-शांति का प्रतीक है। Prosperity Rituals for Dhanteras
[maxbutton id=”3″]
[maxbutton id=”4″]
यह खबर भी पढ़ें –
धन और समृद्धि के लिए लक्ष्मी और कुबेर की पूजा: कौनसी पूजा है अधिक प्रभावी?
मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।