क्वाड्रेंट फ्यूचर टेक रेलवे ऑटोमेशन की कहानी भारत की बदलती रेलवे प्राथमिकताओं से जुड़ी है। दशकों तक देश ने नई पटरियां बिछाईं, इंजन जोड़े और ट्रेनों की संख्या बढ़ाई। अब असली चुनौती विस्तार नहीं, बल्कि मौजूदा नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की है। यही वह मोड़ है, जहां क्वाड्रेंट फ्यूचर टेक जैसी कंपनी खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रही है। यह कंपनी ट्रेनें नहीं बनाती, बल्कि उन सिस्टम्स पर काम करती है जो ट्रेनों की रफ्तार, दूरी और सुरक्षा नियंत्रित करते हैं। इसी बदलाव को बाजार “अगली Siemens” की संभावित कहानी के रूप में देख रहा है।
केबल से सिग्नलिंग तक का सफर
कंपनी की शुरुआत विशेष केबल निर्माण से हुई थी। ये इलेक्ट्रॉन-बीम इरैडिएटेड केबल रेलवे, डिफेंस, नेवी, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उपयोग होती हैं। यह सेगमेंट अभी भी कंपनी की मौजूदा आय का मुख्य स्रोत है। दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में कंपनी ने लगभग 96.4 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया, जो सालाना आधार पर करीब 125–140 करोड़ रुपये का अनुमान देता है।
हालांकि असली दांव सिग्नलिंग व्यवसाय पर है। यह डिवीजन अभी निवेश चरण में है और राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान शुरू नहीं हुआ है। यहीं से क्वाड्रेंट फ्यूचर टेक रेलवे ऑटोमेशन की भविष्य की कहानी लिखी जानी है।
‘कवच’ और रेलवे की नई दिशा
भारतीय रेलवे अब ‘कवच’ नामक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लागू कर रही है। इसका उद्देश्य टक्कर, ओवरस्पीड और सिग्नल उल्लंघन रोकना है। यह सिस्टम ट्रेनों और कंट्रोल सॉफ्टवेयर के बीच निरंतर संवाद सुनिश्चित करता है। जब भी सुरक्षा सीमा पार होती है, सॉफ्टवेयर स्वतः हस्तक्षेप करता है।
यही वह क्षेत्र है जहां क्वाड्रेंट फ्यूचर टेक रेलवे ऑटोमेशन खुद को स्थापित कर रही है। कंपनी ने कवच से जुड़ा हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इन-हाउस विकसित किया है। दिसंबर 2025 तक कंपनी का ऑर्डर बुक लगभग 919 करोड़ रुपये का था, जो उसके मौजूदा वार्षिक राजस्व से छह गुना अधिक है। चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री और बनारस लोकोमोटिव वर्क्स से मिले बड़े ऑर्डर इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन ऑर्डर्स से वास्तविक सिग्नलिंग राजस्व FY27 से शुरू होने की उम्मीद है।
निवेश पहले, मुनाफा बाद में
इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी कंपनियों में अक्सर ऑर्डर पहले आते हैं और मुनाफा बाद में। क्वाड्रेंट फ्यूचर टेक रेलवे ऑटोमेशन भी इसी चरण में है। कंपनी ने इंजीनियर नियुक्त किए, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाई और सिग्नलिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया। दिसंबर 2025 तक नौ महीनों में कंपनी ने 27.6 करोड़ रुपये का EBITDA घाटा दर्ज किया, जो इस निवेश चरण का परिणाम है।
मोहाली स्थित एकीकृत उत्पादन इकाई दोनों—केबल और सिग्नलिंग सिस्टम—निर्माण में सक्षम है। यह क्षमता वर्तमान मांग से अधिक है, जो भविष्य की तैनाती की तैयारी को दर्शाती है।
मजबूत बैलेंस शीट, लेकिन चुनौती बरकरार
जनवरी 2025 में कंपनी ने IPO के जरिए 290 करोड़ रुपये जुटाए। ताजा पूंजी से कर्ज घटाकर 85 करोड़ से 25 करोड़ रुपये तक लाया गया। रिजर्व बढ़कर 230 करोड़ रुपये हो गए। इससे कंपनी को विस्तार के दौरान वित्तीय लचीलापन मिला है।
फिर भी, क्वाड्रेंट फ्यूचर टेक रेलवे ऑटोमेशन के सामने कार्यशील पूंजी और भुगतान चक्र की चुनौती बनी रहेगी। भारतीय रेलवे में भुगतान आमतौर पर निर्माण, इंस्टॉलेशन और प्रमाणन के बाद मिलता है। इसका मतलब है कि राजस्व दिखने और नकदी आने में समय अंतर रह सकता है।
प्रमोटर नेतृत्व और बाजार मूल्यांकन
कंपनी के प्रबंध निदेशक मोहित वोहरा इस परिवर्तन का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रमोटर समूह के पास लगभग 70% हिस्सेदारी है, जिससे नियंत्रण केंद्रित बना हुआ है। यह संरचना निर्णयों में निरंतरता देती है, लेकिन जिम्मेदारी भी केंद्रित करती है।
आज बाजार कंपनी का मूल्यांकन उसके भविष्य की संभावनाओं के आधार पर कर रहा है, न कि वर्तमान आय पर। शेयर कीमत इश्यू प्राइस के आसपास है, जबकि सिग्नलिंग राजस्व अभी आना बाकी है। यह संकेत देता है कि निवेशक अवसर देख रहे हैं, लेकिन ठोस वित्तीय परिणाम की प्रतीक्षा भी कर रहे हैं।
अवसर और जोखिम का संतुलन
क्वाड्रेंट फ्यूचर टेक रेलवे ऑटोमेशन भारत के रेलवे आधुनिकीकरण चक्र के शुरुआती चरण में है। ऑर्डर बुक मजबूत है और तकनीकी तैयारी स्पष्ट दिखती है। लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव अक्सर समय लेते हैं। अनुमोदन प्रक्रिया, इंस्टॉलेशन शेड्यूल और भुगतान चक्र लाभप्रदता को प्रभावित कर सकते हैं।
असली जोखिम अवसर की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि समय का है। यदि ऑर्डर समय पर राजस्व और नकदी प्रवाह में परिवर्तित होते हैं, तो कंपनी को बड़ा लाभ मिल सकता है। अन्यथा प्रतिस्पर्धा और पूंजी दबाव भविष्य की कहानी बदल सकते हैं।
निष्कर्ष: क्या बनेगी अगली Siemens?
भारत की रेलवे अब विस्तार से ज्यादा ऑटोमेशन पर ध्यान दे रही है। इस बदलाव में क्वाड्रेंट फ्यूचर टेक रेलवे ऑटोमेशन ने खुद को सही समय पर स्थापित किया है। केबल व्यवसाय वर्तमान को स्थिरता देता है, जबकि सिग्नलिंग व्यवसाय भविष्य की संभावना दर्शाता है। यह एक संक्रमण की कहानी है—जहां अवसर स्पष्ट है, पर धैर्य और वित्तीय अनुशासन सफलता तय करेंगे।
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