---Advertisement---

राजस्थान वोटर लिस्ट से 44 लाख नाम हटे, चुनावी सूची की बड़ी सफाई या नई बहस की शुरुआत?

राजस्थान वोटर लिस्ट से 44 लाख नाम हटे, चुनावी सूची की बड़ी सफाई या नई बहस की शुरुआत?
---Advertisement---

राजस्थान में चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद राजस्थान वोटर लिस्ट से लगभग 44.27 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इस व्यापक अभियान के बाद अब राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 5,15,19,929 रह गई है। अधिकारियों के अनुसार जिन नामों को हटाया गया उनमें मृत व्यक्ति, दूसरे राज्यों में स्थायी रूप से स्थानांतरित लोग, लंबे समय से अनुपस्थित मतदाता और एक से अधिक जगहों पर दर्ज डुप्लीकेट नाम शामिल थे। इस पूरे अभियान का उद्देश्य राजस्थान वोटर लिस्ट को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है।

विशेष पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत

राज्य में यह विशेष अभियान 4 नवंबर को शुरू किया गया था और लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में इसे लागू किया गया। केवल Anta सीट को इस प्रक्रिया से अलग रखा गया क्योंकि वहां 11 नवंबर को उपचुनाव आयोजित हुआ था। उस समय 199 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 5,46,56,215 मतदाता दर्ज थे और सभी मतदाताओं को सत्यापन के लिए एन्यूमरेशन फॉर्म भेजे गए। डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया 6 दिसंबर तक पूरी कर ली गई थी, जिसके बाद राजस्थान वोटर लिस्ट में दर्ज आंकड़ों की गहन जांच शुरू हुई।

ड्राफ्ट सूची से अंतिम सूची तक

दिसंबर में जारी पहली ड्राफ्ट सूची में ही लगभग 41.84 लाख नाम हटाए गए थे। इसके बाद दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान करीब 2.42 लाख अतिरिक्त नाम हटाए गए। साथ ही लगभग 1.29 लाख नए मतदाताओं को भी अंतिम सूची में जोड़ा गया। इस तरह अंतिम आंकड़ा 5.15 करोड़ मतदाताओं तक पहुंच गया। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी थी ताकि राजस्थान वोटर लिस्ट में केवल वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम ही शामिल रहें।

2002 की सूची से मिलान में सामने आए तथ्य

पुनरीक्षण के दौरान एक और दिलचस्प तथ्य सामने आया। विभाग ने हर मतदाता के रिकॉर्ड को वर्ष 2002 की SIR सूची से मिलाने की कोशिश की, लेकिन करीब 11 लाख मतदाताओं की जड़ें उस सूची से नहीं मिल पाईं। इसके बाद संबंधित लोगों को नोटिस भेजे गए और उनसे दस्तावेज मांगे गए। दावे और आपत्ति की अवधि में दस्तावेज मिलने के बाद अधिकारियों ने प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच की। इस पूरी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और सहायक अधिकारियों को लगाया गया था, जिन्होंने राजस्थान वोटर लिस्ट की सटीकता सुनिश्चित करने का काम किया।

आगे क्या होगा

चुनाव विभाग के अनुसार अंतिम सूची की प्रति राजनीतिक दलों को दे दी गई है और इसे आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है। यदि किसी मतदाता को सूची से जुड़ा कोई विवाद या आपत्ति है तो वह अगले 15 दिनों के भीतर आवेदन कर सकता है। अधिकारियों का कहना है कि जिलों के प्रशासन, हजारों बूथ लेवल अधिकारियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के समन्वय से यह बड़ा अभियान सफलतापूर्वक पूरा हुआ। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई राजस्थान वोटर लिस्ट राज्य की राजनीति और चुनावी समीकरणों को किस तरह प्रभावित करती है।

read also: एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में बड़ा बवाल, यूथ कांग्रेस के विरोध से दिल्ली में मचा राजनीतिक तूफ़ान

Join WhatsApp

Join Now

---Advertisement---

Leave a Comment