बहुत खतरनाक हैं खेती-किसानी में उपयोग की जाने वाली ये मशीनें — रोटावेटर से अब तक कई जानें गई, सावधानी जरूरी!

बहुत खतरनाक हैं खेती-किसानी में उपयोग की जाने वाली ये मशीनें — रोटावेटर से अब तक कई जाने गई, सावधानी जरूरी!

Rotavator accident news | खेती-किसानी आज तकनीक से जुड़ चुकी है। जहां पहले बैलों से खेत जोते जाते थे, वहीं अब ट्रैक्टर (Tractor), रोटावेटर (Rotavator), थ्रेशर (Thresher), और फॉडर कटर (Fodder Cutter) जैसे आधुनिक उपकरणों ने किसानों की मेहनत कम कर दी है। लेकिन यह सच भी उतना ही गंभीर है कि यही मशीनें किसानों के लिए जानलेवा खतरा भी बन रही हैं।

आज हम बात करेंगे ऐसी मशीनों की जो खेती को आसान तो बना रही हैं, लेकिन जरा सी लापरवाही से जान भी ले सकती हैं। खासकर रोटावेटर (Rotavator) — जो मिट्टी को तोड़ने और खेत को बोआई के लायक बनाने के लिए उपयोग होता है — अब तक देशभर में कई किसानों और मजदूरों की जान ले चुका है।


खेती में मशीनों से बढ़ा उत्पादन, लेकिन बढ़ी मौतें भी

भारत में पिछले 20 वर्षों में खेती में मशीनों का उपयोग 60% से अधिक बढ़ा है। इससे उत्पादन और समय की बचत तो हुई, लेकिन कृषि दुर्घटनाएं (Agriculture Accidents) भी बढ़ गईं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की रिपोर्टों के अनुसार —

  • हर साल भारत में लगभग 40,000 से 45,000 किसान खेती से जुड़ी दुर्घटनाओं में जान गंवाते हैं

  • इनमें से लगभग 25–30% दुर्घटनाएं मशीनों से जुड़ी होती हैं

  • यानी हर साल हजारों किसान किसी न किसी कृषि उपकरण जैसे Rotavator, Thresher, या Tractor Accident का शिकार बनते हैं।


रोटावेटर क्या है और कैसे करता है काम?

रोटावेटर (Rotavator) ट्रैक्टर के पीछे लगाया जाने वाला एक उपकरण है जो मिट्टी को भुरभुरा बनाता है। इसमें लोहे की कई तीखी ब्लेड्स लगी होती हैं, जो बहुत तेज़ी से घूमती हैं और मिट्टी को पलटती हैं।

यही ब्लेड्स यदि किसी व्यक्ति, जानवर, या बच्चे के संपर्क में आ जाएं, तो पल भर में मौत हो सकती है।
हादसे आमतौर पर तब होते हैं जब ट्रैक्टर चल रहा होता है और कोई व्यक्ति उसके पास पहुंच जाता है या रोटावेटर में फंसे पत्थर या घास निकालने की कोशिश करता है।


देशभर में हुई कई दर्दनाक घटनाएं

यह कोई दुर्लभ दुर्घटनाएं नहीं हैं, बल्कि आए दिन अखबारों और न्यूज़ वेबसाइटों में इनकी खबरें छपती रहती हैं।

  1. आज़मगढ़ (उत्तर प्रदेश) – 2025 में 11 साल के मासूम की मौत रोटावेटर की चपेट में आने से हुई। उसका सिर धड़ से अलग हो गया।

  2. वैशाली (बिहार) – खेत में खेल रहे 10 वर्षीय बच्चे की मौत रोटावेटर के ब्लेड में फंसने से हो गई।

  3. फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) – खेत जोतते समय एक किसान ट्रैक्टर पर चढ़ने की कोशिश में फिसल गया और रोटावेटर की ब्लेड में फंसकर कट गया।

  4. हमीरपुर (म.प्र.) – मजदूर मशीन चालू होने के बाद पीछे गया और मशीन में फंस गया, मौके पर ही मौत हो गई।

इन घटनाओं से एक बात स्पष्ट होती है — रोटावेटर (Rotavator) को “हल्की मशीन” समझना बहुत बड़ी भूल है।


हादसे क्यों होते हैं?

दुर्घटनाओं के पीछे मुख्य चार कारण हैं:

जागरूकता की कमी (Lack of Awareness)

अधिकांश किसान मशीनों का सही उपयोग नहीं जानते। वे बिना प्रशिक्षण के मशीन चलाते हैं या मशीन चालू रहते हुए पास चले जाते हैं।

सुरक्षा उपकरणों की कमी (Lack of Safety Equipment)

भारत में बिकने वाले कई रोटावेटर सुरक्षा कवच (Safety Guard) के बिना बेचे जाते हैं। किसान भी मशीन चलाने के समय सेफ्टी शूज़ (Safety Shoes), ग्लव्स (Gloves) या हेलमेट (Helmet) का इस्तेमाल नहीं करते।

जल्दबाज़ी और लापरवाही

काम जल्दी खत्म करने की कोशिश में कई बार किसान चलती मशीन में फंसे मलबे को निकालने लगते हैं, जो मौत का कारण बन जाता है।

बच्चों की मौजूदगी

कई बार किसान अपने बच्चों को खेत में साथ ले जाते हैं। बच्चे खेलते हुए मशीनों के पास पहुंच जाते हैं, जो बेहद खतरनाक है।


रोटावेटर और ट्रैक्टर के उपयोग में बरतें ये सावधानियां

  1. चलती मशीन के पास न जाएं।

  2. बच्चों या बुजुर्गों को मशीन के पास न आने दें।

  3. मशीन बंद किए बिना उसकी सफाई या फंसे मलबे को न निकालें।

  4. मशीन शुरू करने से पहले ब्लेड और शाफ्ट की जांच करें।

  5. केवल प्रशिक्षित व्यक्ति (Trained Operator) ही मशीन चलाए।

  6. सुरक्षा उपकरण (Safety Gear) जैसे जूते, दस्ताने, चश्मा पहनें।

  7. मशीन के साथ लगी चेतावनी स्टिकर को न हटाएं।

  8. ट्रैक्टर में ROPS (Roll Over Protection Structure) जरूर लगवाएं।

  9. रात में या खराब रोशनी में मशीन न चलाएं।

  10. थकान की स्थिति में खेत में मशीन चलाने से बचें।


सरकार और समाज को क्या करना चाहिए?

भारत में खेती से जुड़ी मशीन सुरक्षा नीति (Farm Safety Policy) अभी तक व्यापक नहीं है। जरूरत है कि:

  • कृषि विभाग किसानों को सुरक्षा प्रशिक्षण (Safety Training) दे।

  • रोटावेटर निर्माताओं को सुरक्षा गार्ड (Safety Guard) लगाना अनिवार्य किया जाए।

  • हर जिले में “कृषि यंत्र सुरक्षा सप्ताह” (Farm Machinery Safety Week) मनाया जाए।

  • मीडिया और पत्रकार समाज को जागरूक करने के लिए ऐसे विषयों को प्राथमिकता दें।


तकनीक के साथ सावधानी जरूरी

खेती का आधुनिकीकरण भारत की ज़रूरत है, लेकिन सुरक्षा उसके साथ कदम से कदम मिलाकर चलनी चाहिए।
रोटावेटर जैसी मशीनें हमारे खेतों को भले उपजाऊ बना दें, पर अगर ज़रा सी असावधानी हो जाए, तो किसान की जान ले सकती हैं।

इसलिए हर किसान को याद रखना चाहिए —

“मशीन आपकी मददगार है, लेकिन अगर लापरवाही की तो यही मशीन बन जाएगी जान की दुश्मन।”


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