छत्रपति शिवाजी महाराज 400वीं जयंती 2030 को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने भव्य वैश्विक समारोह की तैयारियां शुरू कर दी हैं। महान मराठा वीर और दूरदर्शी शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की 400वीं जयंती 2030 को ऐतिहासिक स्तर पर मनाने की घोषणा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे के जुन्नर स्थित शिवनेरी किले में की। छत्रपति शिवाजी महाराज 400वीं जयंती 2030 का यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जाएगा, जिससे उनकी वीरता और न्यायप्रियता का संदेश दुनिया तक पहुंचे।
शिवनेरी से रायगढ़ तक गौरवगाथा
19 फरवरी 1630 को जन्मे छत्रपति शिवाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य की स्थापना की और ‘हिंदवी स्वराज्य’ की नींव रखी। 6 जून 1674 को रायगढ़ किले पर उनका राज्याभिषेक हुआ, जिसने स्वराज की भावना को सशक्त किया। जुन्नर किले में आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, सुनेत्रा पवार और सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार भी उपस्थित रहे। समारोह के दौरान बाल शिवाजी की प्रतिमा का पूजन, राष्ट्रगान और ‘जय जय महाराष्ट्र माझा’ के साथ तीन राउंड की सलामी दी गई।
यूनेस्को से मिला विश्व धरोहर दर्जा
मुख्यमंत्री ने बताया कि यूनेस्को ने ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स ऑफ इंडिया’ को विश्व धरोहर का दर्जा दिया है। इसमें महाराष्ट्र के साल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, खंडेरी, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग किले शामिल हैं, साथ ही तमिलनाडु का जिंजी किला भी सूची में है। छत्रपति शिवाजी महाराज 400वीं जयंती 2030 के अवसर पर इन किलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अतिक्रमण मुक्त होंगे सभी किले
सरकार ने घोषणा की है कि महाराष्ट्र के सभी किलों को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा। पुणे जिले के शिवाजी महाराज से जुड़े किलों को पहले ही अतिक्रमण से मुक्त कर दिया गया है। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखकर आने वाली पीढ़ियों तक गौरवगाथा पहुंचाना है।
छत्रपति शिवाजी महाराज 400वीं जयंती 2030 का यह महाआयोजन न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण होगा। यह उत्सव शिवाजी महाराज की वीरता, रणनीति और न्याय की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का ऐतिहासिक अवसर बनेगा।
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