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शिवपुरी जमीन घोटाला खुलासा राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर करोड़ों की जमीन पर बड़ा खेल

शिवपुरी
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मध्यप्रदेश के शिवपुरी से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है जिसने प्रशासन और आम लोगों दोनों को हिला कर रख दिया है। यहां करैरा अनुविभाग में करोड़ों रुपये की शासकीय जमीन से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। इस मामले में राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं और अब पूरे मामले की जांच तेज हो गई है।

जांच में सामने आया संगठित घोटाले का सच

कलेक्टर के निर्देश पर की गई जांच में कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। डिप्टी कलेक्टर द्वारा की गई जांच में यह साफ हुआ कि राजस्व रिकॉर्ड में जानबूझकर हेरफेर की गई और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर जमीन को खुर्द बुर्द किया गया। रिकॉर्ड से पन्ने गायब करना और गलत जानकारी दर्ज करना इस पूरे मामले को एक बड़े संगठित घोटाले की ओर इशारा करता है।

सात लोगों पर दर्ज हुआ आपराधिक मामला

इस मामले में नायब तहसीलदार पटवारी और अन्य कर्मचारियों समेत सात लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। इनमें कई अधिकारी ऐसे भी हैं जो लंबे समय से इस विभाग में कार्यरत थे। कुछ आरोपी अब इस दुनिया में नहीं हैं और एक सेवानिवृत्त बताया गया है लेकिन जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं।

1980 से चल रहा था गड़बड़ी का खेल

जांच में यह भी सामने आया है कि यह खेल कोई नया नहीं बल्कि कई दशकों से चल रहा था। वर्ष 1980 के बाद से ही जमीन के रिकॉर्ड में धीरे धीरे बदलाव किए गए और 1989 के बाद यह खेल तेजी से बढ़ा। सर्वे नंबर बदलना और बिना अनुमति जमीन का रिकॉर्ड बदलना जैसे कई गंभीर मामले सामने आए हैं।

फर्जी पट्टे और गायब फाइलों ने बढ़ाई गंभीरता

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कई जगहों पर फर्जी पट्टे जारी कर दिए गए जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके साथ ही संबंधित फाइलों का गायब होना इस पूरे मामले को और भी गंभीर बना देता है। यह साफ संकेत देता है कि इस घोटाले को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।

पुलिस चौकी का रिकॉर्ड भी नहीं बचा

इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हेरफेर के दौरान गांव की पुलिस चौकी का सर्वे नंबर तक रिकॉर्ड से हटा दिया गया। यह न सिर्फ लापरवाही बल्कि सिस्टम के भीतर गहरी मिलीभगत को भी दर्शाता है।

शिकायत से खुला पूरा राज

पूरा मामला तब सामने आया जब जमीन की खरीद बिक्री के बाद ऑनलाइन रिकॉर्ड में बदलाव कर उसे प्रतिबंधित दिखाया गया। इस गड़बड़ी की शिकायत कलेक्टर तक पहुंची और फिर जांच शुरू हुई। जांच में करोड़ों रुपये की जमीन से जुड़ा यह पूरा खेल उजागर हो गया।

शिवपुरी का यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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