किडनी का ‘साइलेंट अटैक’: रात की चुप्पी में छिपे ये 5 खतरे—खुजली से सूजन तक, समय रहते पहचानें वरना फेलियर का फंदा कस सकता है!

किडनी का ‘साइलेंट अटैक’: रात की चुप्पी में छिपे ये 5 खतरे—खुजली से सूजन तक, समय रहते पहचानें वरना फेलियर का फंदा कस सकता है!

Silent Kidney Attack Symptoms | SAAOL हार्ट सेंटर के डायरेक्टर डॉ. बिमल छाजड़ की विशेष सलाह—रात में बार-बार टॉयलेट जाना या बेचैनी महसूस होना किडनी की चेतावनी हो सकता है; जानें लक्षण, जांच और बचाव के आसान कदम, क्योंकि 90% केस नजरअंदाज करने से बिगड़ते हैं

कल्पना कीजिए, रात के अंधेरे में जब दुनिया सो रही हो, आपकी किडनी चुपके से ‘अलार्म’ बजा रही हो—लेकिन आप उसे हल्के में उड़ा देते हो। यह ‘साइलेंट अटैक’ किडनी फेलियर का रूप ले सकता है, जो भारत में हर साल लाखों जिंदगियों को लील रहा है। किडनी, हमारी शरीर की ‘फिल्टर फैक्ट्री’, खून को शुद्ध कर टॉक्सिन्स को बाहर फेंकती है। लेकिन लाइफस्टाइल की दौड़ में यह थक जाती है, और पिछले पांच सालों में किडनी रोगों के केस 40% से ज्यादा उछल चुके हैं। एक समाचार पत्र में दिए इंटरव्यू मे “किडनी फेलियर की सबसे बड़ी दुश्मन है इसकी चुप्पी। शुरुआती संकेत इतने हल्के होते हैं कि 90% मरीज इन्हें इग्नोर कर देते हैं। लेकिन रात का समय इन लक्षणों का ‘शोकेस’ बन जाता है—जब दिन की भागदौड़ थम जाती है।”

डॉ. की यह चेतावनी खाली नहीं है। वे कहते हैं, “आजकल डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और अनियमित खान-पान से किडनी पर बोझ बढ़ रहा है। अगर रात में ये संकेत दिखें, तो इसे मजाक न समझें—यह आपकी सेहत का रेड अलर्ट है।” आइए, इन ‘रात्रि वार्निंग्स’ को एक-एक करके समझें, जैसे कोई थ्रिलर स्टोरी का क्लाइमेक्स—जहां हर संकेत एक ट्विस्ट लाता है। हमने इन्हें न सिर्फ लिस्ट किया है, बल्कि डॉ. छाजड़ की व्याख्या के साथ जोड़ा है, ताकि आप इन्हें अपनी जिंदगी से जोड़ सकें। याद रखें, जल्दी पहचान से 70% केस दवाओं से ही कंट्रोल हो जाते हैं!

1. रात का ‘टॉयलेट ट्रिप’ अनकंट्रोल्ड: बार-बार पेशाब का सर्किट टूटना

रात के 2 बजे, नींद टूटे और फिर टॉयलेट की होड़—यह कोई सामान्य आदत नहीं, बल्कि किडनी का ‘SOS’ हो सकता है। डॉ. बताते हैं, “स्वस्थ किडनी रात में पेशाब को कंट्रोल करती है, लेकिन क्षतिग्रस्त किडनी फ्लूइड बैलेंस बिगाड़ देती है। नतीजा? नोक्टूरिया (रात में बार-बार पेशाब) या यहां तक कि अनैच्छिक लीकेज।” अगर यह हफ्ते में 2-3 बार से ज्यादा हो, तो ब्लड शुगर और यूरिन टेस्ट कराएं। एक मरीज की कहानी याद आती है—40 साल के राजेश ने इसे ‘उम्र का असर’ समझा, लेकिन जांच में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) पकड़ा गया।

2. पैरों का ‘भारीपन’: सूजन जो शाम ढलते ही उभर आए

दिन भर दौड़-भाग के बाद शाम को पैरों या टखनों में सूजन—यह किडनी की ‘ओवरलोड’ का निशान है। डॉ. छाजड़ स्पष्ट करते हैं, “किडनी नमक-पानी को फिल्टर न कर पाए तो यह बॉडी टिश्यूज में जमा हो जाता है। रात में ग्रेविटी के कारण पैरों में ज्यादा फूलाव दिखता है, कभी हाथों तक फैल जाता है।” अगर दबाने पर गड्ढा पड़ जाए या सुबह तक न उतरे, तो अलर्ट! प्रिवेंटिव टिप: नमक कम करें, लेकिन डॉक्टर से कंसल्ट बिना न बदलें।

3. स्किन का ‘रात्री विद्रोह’: खुजली-जलन का तांडव

रात की शांति में त्वचा का जलन या खुजली से जूझना—यह टॉक्सिन्स का ‘बैकफायर’ है। “किडनी फेलियर में यूरिया जैसे वेस्ट प्रोडक्ट्स ब्लड में घुलते हैं, जो स्किन पर रैश या इरिटेशन पैदा करते हैं। रात में यह तीव्र क्यों? क्योंकि दिन की व्यस्तता में दिमाग भटक जाता है,” डॉ. छाजड़ की व्याख्या। अगर लोशन लगाने से भी न रुके, तो यूरिन एनालिसिस जरूरी। एक सर्वे बताता है कि 60% CKD पेशेंट्स में यह शुरुआती साइन होता है।

4. नींद का ‘भूत’: बेचैनी और थकान का घेराव

रात भर करवटें बदलना, नींद टूट-टूटकर आना—यह किडनी की थकान का आईना है। डॉ. छाजड़ चेताते हैं, “टॉक्सिन्स ब्रेन को प्रभावित करते हैं, जिससे इंसोम्निया या रेस्टलेसनेस होती है। CKD स्टेज 3 से यह आम हो जाता है।” अगर साथ में डेलाइट स्लीपिनेस भी हो, तो स्लीप स्टडी कराएं। बचाव? रात का डिनर हल्का रखें, लेकिन रूट-कॉज किडनी ही है तो इग्नोर न करें।

5. सांस का ‘स्ट्रगल’: दर्द और सांस फूलना रात के अंधेरे में

रात में अचानक सांस लेने में तकलीफ या सीने का दर्द—यह फ्लूइड ओवरलोड का डरावना रूप है। “किडनी फेलियर में फेफड़ों में पानी भर जाता है (पल्मोनरी एडीमा), जो रात में लेटने पर बदतर हो जाता है,” डॉ. छाजड़ वarn करते हैं। अगर यह बार-बार हो, तो इमरजेंसी! ईसीजी या चेस्ट एक्स-रे से कन्फर्मेशन मिलेगा।

समय रहते एक्शन: जांच से ट्रांसप्लांट तक का सफर

डॉ. की सलाह साफ है: “ये लक्षण दिखें तो घबराएं नहीं, लेकिन टालें भी नहीं। शुरुआत में ब्लड टेस्ट (क्रिएटिनिन, GFR), यूरिन रूटीन, अल्ट्रासाउंड या MRI से स्टेज पता चल जाता है। स्टेज 1-2 में डाइट, दवाएं और लाइफस्टाइल चेंज से रिवर्स हो सकता है। लेकिन एडवांस्ड में डायलिसिस (मशीन से फिल्ट्रेशन) या ट्रांसप्लांट ही रास्ता।” प्रिवेंशन के लिए: रोज 2-3 लीटर पानी, कम नमक-शुगर, और सालाना चेकअप। भारत में 1 करोड़ से ज्यादा CKD पेशेंट्स हैं—आप इसमें न गिनें!

यह स्टोरी सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि जागरूकता का कॉल-टू-एक्शन है। अगर रात की चुप्पी में ये संकेत सुनाई दें, तो डॉक्टर की दस्तक दें। सेहत की कमान आपके हाथ में है—इसे मजबूत पकड़ें! (रिपोर्ट: स्वास्थ्य डेस्क, विशेषज्ञ सलाह: डॉ. बिमल छाजड़, SAAOL हार्ट सेंटर)


यह भी पढ़ें….
मोबाइल में ये 5+ अजीब संकेत दिखें तो अलर्ट हो जाएं: फोन हैक हो चुका है, तुरंत करें ये चेक

Leave a Comment

अहान पांडे कौन हैं? साउथ के मशहूर विलेन कोटा श्रीनिवास का निधन Kota Srinivasa Rao death news शर्मनाक जांच! ठाणे के स्कूल में छात्राओं के कपड़े उतरवाए गए अर्चिता फुकन और Kendra Lust की वायरल तस्‍वीरें! जानिए Babydoll Archi की हैरान कर देने वाली कहानी बाइक और स्कूटर चलाने वालों के लिए बड़ी खबर! Anti-Lock Braking System लो हो गया पंचायत सीजन 4 रिलीज, यहां देखें