एसआईआर का ऐसा दबाव : MP में 4 BLO की मौत, 50 बीमार; 12 दिनों में 100% डिजिटल टारगेट कैसे पूरा होगा?
SIR Pressure 4 Deaths 50 Sick in MP | देशभर में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) अभियान के बीच बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) की जान पर बनी हुई है। मध्य प्रदेश सहित 6 राज्यों में 19 दिनों में 15 बीएलओ की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों बीमार पड़ चुके हैं। मप्र में तो हालात और भी चिंताजनक हैं—पिछले 4 दिनों में भोपाल के 50 से अधिक बीएलओ बीमार हो चुके हैं, जिनमें दो को हार्ट अटैक और एक को ब्रेन हेमरेज हुआ। दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल में एक महिला बीएलओ ने काम के दबाव से तंग आकर आत्महत्या कर ली। चुनाव आयोग के इस महत्वपूर्ण वोटर लिस्ट अपडेट अभियान ने BLO की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है—काम का बोझ, डेडलाइन का दबाव और सस्पेंशन का डर उन्हें तोड़ रहा है। सवाल उठ रहा है: क्या इतने कम वेतन और संसाधनों में यह टारगेट पूरा करना संभव है?
19 दिनों में 15 मौतें: MP सबसे प्रभावित, गुजरात के बाद नंबर दो
एसआईआर प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू हुई थी, जो 9 दिसंबर को नई वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट के साथ समाप्त होगी। इस दौरान पूरे देश में BLO घर-घर जाकर गणना पत्रक (फॉर्म) बांट रहे हैं, भरवा रहे हैं और डिजिटल पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं। लेकिन दबाव इतना है कि अब तक 12 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में 15 मौतें दर्ज हो चुकी हैं।
- मध्य प्रदेश: 4 मौतें (रायसेन, दमोह, दतिया और भोपाल में हादसे/बीमारी)।
- गुजरात: 4 मौतें।
- पश्चिम बंगाल: 3 मौतें (इनमें एक आत्महत्या)।
- राजस्थान: 2 मौतें।
- केरल और तमिलनाडु: 1-1 मौत।
मप्र में कुल 65,000 BLO तैनात हैं, जो 5.35 करोड़ वोटर्स की डिटेल्स सत्यापित कर रहे हैं। लेकिन 19 दिनों में केवल 51% (2.75 करोड़) फॉर्म डिजिटल हो पाए हैं। बाकी 49% (2.6 करोड़) को 4 दिसंबर तक ऑनलाइन अपलोड करना है—यानी महज 12 दिनों में दोगुना काम। ऊपर से 35 लाख वोटर ‘लापता’ हैं, जिन्हें कम से कम 3 बार खोजना पड़ रहा है। ये वोटर या तो मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं, या घर बदल चुके हैं, या उपलब्ध ही नहीं हैं। यदि वे नहीं मिले, तो 9 दिसंबर के ड्राफ्ट में उनके नाम कट सकते हैं।
BLO पर क्यों टूट पड़ा दबाव? 4 मुख्य कारण जो जिंदगियां निगल रहे हैं
बीएलओ की हालत किसी युद्धक्षेत्र से कम नहीं। औसतन 15-18 घंटे की ड्यूटी, रात-रात भर जागना और संसाधनों की कमी ने उन्हें हताश कर दिया है। यहां हैं प्रमुख कारण:
- काम का पहाड़, समय की किल्लत: मप्र में गणना पत्रक छपने में देरी हुई, जो BLO को आखिरी समय में मिले। अब हर BLO को 1200-1500 वोटर्स के फॉर्म 3 बार घर जाकर भरवाने हैं। भोपाल जैसे शहर में 21 लाख वोटर्स हैं, लेकिन केवल 25% फॉर्म वापस आए हैं। बाकी 75% 12 दिनों में—यह असंभव सा लगता है।
- तकनीकी खराबी का बोझ: BLO ऐप ठीक से काम नहीं कर रहा। अपलोड में देरी, सर्वर डाउन और डेटा एंट्री की परेशानी से घंटों बर्बाद हो रहे हैं। एक BLO ने बताया, “एप क्रैश हो जाता है, फोटो अपलोड नहीं होती। फिर सुपरवाइजर नोटिस ठोक देते हैं।”
- कार्रवाई का खौफ: सस्पेंशन और नोटिस का डर BLO को सताए जा रहा है। भोपाल में ही 6 BLO पर कार्रवाई हो चुकी है। शनिवार को नरेला में 6 BLO-सुपरवाइजर को लापरवाही के लिए नोटिस जारी हुए। एक BLO बोले, “हर शाम मीटिंग में टारगेट न पूरा होने पर धमकी मिलती है। नींद कहां?”
- कम वेतन, बड़ी जिम्मेदारी: महीने भर की मेहनत के बदले BLO को मात्र 2000 रुपये, जबकि सुपरवाइजर को 1500। “यह सर्वे जीवनभर का दर्द दे गया,” रायसेन के एक BLO के परिजन ने कहा।
हृदयविदारक कहानियां: 4-4 रातों से नींद न आई, फिर मौत ने घेर लिया
- रायसेन: गुरुवार को BLO रमाकांत पांडे (चार रातों से जागते रहे) ऑनलाइन मीटिंग के बाद बेहोश हो गिरे। इलाज में देरी से मौत।
- दमोह: सीताराम गोंड (50) फॉर्म भरते समय बीमार, शुक्रवार को निधन। 6 नवंबर को श्याम शर्मा (45) सड़क हादसे में मारे गए।
- दतिया: उदयभान सिहारे (50) ने 11 नवंबर को टारगेट के दबाव में आत्महत्या की।
- भोपाल: शनिवार को कीर्ति कौशल और मोहम्मद लईक को ड्यूटी पर हार्ट अटैक। दोनों अस्पताल में। पिछले 4 दिनों में 50+ बीएलओ बीमार, दो को ब्रेन हेमरेज।
- रायसेन: नारायण सोनी 6 दिनों से लापता; परिजन बोले, “निलंबन की धमकी से परेशान थे।”
पश्चिम बंगाल में महिला BLO की आत्महत्या के बाद परिजनों ने कहा, “ज्यादा काम ने तोड़ दिया।”
अब क्या रास्ता? चुनाव आयोग चुप, BLO चीख रहे हैं
चुनाव आयोग ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन BLO संगठनों ने मांग की है—टारगेट बढ़ाएं, वेतन दोगुना करें, ऐप सुधारें और कार्रवाई रोकें। मप्र में 35 लाख ‘लापता’ वोटर्स की तलाश जारी है। जो फॉर्म भरे मिलेंगे, वही 9 दिसंबर के ड्राफ्ट में शामिल होंगे। लेकिन सवाल वही—12 दिनों में 100% डिजिटल कैसे? यदि BLO की सेहत पर असर पड़ा, तो लोकतंत्र की नींव कैसे मजबूत होगी?
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यह अभियान वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाने का है, लेकिन BLO की कुर्बानी पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार और चुनाव आयोग को तत्काल हस्तक्षेप करना होगा, वरना यह ‘स्पेशल रिविजन’ ‘स्पेशल ट्रेजडी’ बन जाएगा। (स्रोत: स्थानीय BLO संगठन, परिजनों के बयान और आधिकारिक आंकड़े)
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मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।










