Ujjain Ayurvedic AIIMS की घोषणा के साथ महाकाल की नगरी उज्जैन को बड़ी सौगात मिली है। वर्ष 2028 में सिंहस्थ (महाकुंभ) का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु देश-विदेश से पहुंचेंगे। बढ़ती आबादी और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए उज्जैन में स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसी क्रम में यहां देश के तीन प्रस्तावित आयुर्वेदिक एम्स संस्थानों में से एक की स्थापना की जाएगी।
सीएम ने दी विकास योजनाओं की जानकारी
11 फरवरी को कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि भगवान धनवंतरी की भूमि पर आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थान की स्थापना गौरव का विषय है। Ujjain Ayurvedic AIIMS आधुनिक तकनीक और पारंपरिक आयुर्वेद के समन्वय से मरीजों को बेहतर उपचार प्रदान करेगा।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज
उज्जैन, जिसे अवंतिका नगरी और मोक्षदायिनी सप्तपुरी में स्थान प्राप्त है, वर्ष 2028 के सिंहस्थ मेले की तैयारियों में जुटा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हरियाखेड़ी जल आवर्धन योजना पर 1133.67 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। योजना पूरी होने के बाद शहर में प्रतिदिन 450 एमएलडी पानी उपलब्ध होगा, जिससे लाखों लोगों को शुद्ध पेयजल मिलेगा।
विकास के साथ रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में 800 करोड़ रुपये की लागत से कई विकास परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। Ujjain Ayurvedic AIIMS और अन्य परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। महिलाओं को रेडीमेड वस्त्र उद्योग में काम के अवसर मिलेंगे और उन्हें अतिरिक्त आर्थिक सहयोग भी दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, Ujjain Ayurvedic AIIMS उज्जैन को स्वास्थ्य और विकास के नए युग में प्रवेश कराने वाला ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
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