उज्जैन की पावन धरती, जहां विराजते हैं विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल, अब एक नई ऐतिहासिक सौगात पाने जा रही है। सिंहस्थ 2028 से पहले यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और बढ़ते धार्मिक पर्यटन को देखते हुए यह परियोजना प्राथमिकता में रखी गई है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर इस महत्वाकांक्षी योजना को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं, ताकि सिंहस्थ महाकुंभ से पहले उज्जैन इंटरनेशनल एयरपोर्ट का सपना साकार हो सके।
सिंहस्थ 2028 से पहले संचालन का लक्ष्य
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ा दी गई है। प्रशासन का स्पष्ट लक्ष्य है कि आयोजन से पहले एयरपोर्ट का संचालन शुरू कर दिया जाए। उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने जानकारी दी कि परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार चाहती है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सीधी और सुविधाजनक हवाई सेवा उपलब्ध हो।
इस एयरपोर्ट के विकसित होने से न केवल यात्रियों को लाभ मिलेगा, बल्कि उज्जैन की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगी। उज्जैन इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा।
दताना-मताना हवाई पट्टी का होगा विस्तार
उज्जैन-देवास रोड स्थित दताना-मताना की मौजूदा हवाई पट्टी को विस्तार देने की योजना बनाई गई है। शुरुआत में यहां एटीआर-72 जैसे छोटे विमानों के संचालन की तैयारी थी, लेकिन अब इसे बड़े विमानों के अनुकूल विकसित किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, मप्र सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के बीच एमओयू हो चुका है।
विस्तार के बाद यहां बोइंग सी-20 जैसे विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ संभव हो सकेगी। इससे उज्जैन इंटरनेशनल एयरपोर्ट की क्षमता और प्रभाव दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
300 एकड़ में फैलेगा एयरपोर्ट प्रोजेक्ट
प्रारंभिक योजना के अनुसार परियोजना के लिए 241 एकड़ भूमि निर्धारित की गई थी। हालांकि, भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे बढ़ाकर लगभग 300 एकड़ करने का प्रस्ताव है। भूमि विस्तार से आधुनिक टर्मिनल, रनवे और अन्य आवश्यक सुविधाओं का बेहतर विकास संभव होगा।
यह कदम दीर्घकालिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उज्जैन इंटरनेशनल एयरपोर्ट न केवल सिंहस्थ 2028 के दौरान राहत देगा, बल्कि आने वाले दशकों तक शहर की हवाई जरूरतों को पूरा करेगा।
देवी अहिल्याबाई एयरपोर्ट पर घटेगा दबाव
इंदौर स्थित देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में उज्जैन में नया एयरपोर्ट बनने से क्षेत्रीय हवाई यातायात संतुलित होगा। इससे यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे और यात्रा समय में भी कमी आएगी।
उज्जैन इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ व्यावसायिक और निवेश गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। शहर को एक उभरते निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यह बड़ा कदम साबित होगा।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा वैश्विक आयाम
सिंहस्थ महापर्व के दौरान लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। आयोजन के समय परिवहन व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बनती है। ऐसे में उज्जैन इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शुरुआत से हवाई कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रियों को सीधी उड़ान सुविधा मिलेगी।
इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद उज्जैन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त पर्यटन और आर्थिक हब के रूप में उभरेगा। सिंहस्थ 2028 से पहले एयरपोर्ट संचालन का लक्ष्य प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
महाकाल की नगरी को मिलने वाली यह हवाई सौगात आने वाले समय में विकास की नई उड़ान साबित होगी। उज्जैन इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ शहर आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होकर वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान बनाएगा।











