भगवान महाकाल बने दूल्हा, सिर पर सजा तीन क्विंटल फूलों से बना सेहरा

भगवान महाकाल बने दूल्हा, सिर पर सजा तीन क्विंटल फूलों से बना सेहरा

Ujjain News | महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान महाकाल ने अपने भक्तों को 9 दिनों तक अलग-अलग रूपों में दर्शन दिए। महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे और भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। गुरुवार सुबह बाबा महाकाल का सेहरा सजाया गया। सेहरा दर्शन के लिए भी आज मंदिर में बढ़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। Ujjain News

महाशिवरात्रि पर भगवान महाकाल के दर्शन

महाशिवरात्रि पर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। भगवान महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं ने रात भर कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार किया। भगवान महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं ने अपने घरों से दूर-दूर से यात्रा की और भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया।

बाबा महाकाल का सेहरा

गुरुवार सुबह बाबा महाकाल का सेहरा सजाया गया। सेहरा दर्शन के लिए भी आज मंदिर में बढ़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। बाबा महाकाल का सेहरा तीन क्विंटल फूलों से सजाया गया था। इस सेहरे को बनाने में 100 किलो आंकड़े के फूल, सवा लाख बेल पत्र, 200 किलो देसी फूल का उपयोग किया गया था। सेहरे को 11 फीट का बनाया गया था। Ujjain News

सेहरे का प्रसाद लूटने की परंपरा

महाकाल मंदिर के पंडित महेश पुजारी ने बताया कि सेहरा शृंगार का दर्शन पूरा होने के बाद महाकाल को चढ़ाया गया। शृंगार जब उतारा जाता है तो इसे लूटने के लिए भी भक्त उतावले दिखाई देते हैं। इस परंपरा के बारे में शास्त्रों में तो कोई उल्लेख नहीं किया गया है लेकिन इसे सेहरा लूटने की परंपरा कहा जाता है। मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सेहरे के धान को घर में रखने से मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बना रहता है और घर में सुख समृद्धि का वास होता है। वहीं सेहरे के फूलों को लोग अपने घर की तिजोरी में रखते हैं ताकि धन की बरकत बनी रहे। फलों को भक्त प्रसादी के रूप में अपने साथ ले जाते हैं।

आज दोपहर में होगी भस्म आरती

वैसे तो बाबा महाकाल की भस्म आरती तड़के 4 बजे होती है। लेकिन साल भर में एक बार सेहरा उतारे जाने के बाद दोपहर 12 बजे भस्म आरती की जाती है। इस बार दोपहर में होने वाली भस्म आरती में सामान्य श्रद्धालु भी दर्शन कर सकेंगे। भस्म आरती की पूरी व्यवस्था चलायमान रहने वाली है और निरंतर चलते हुए श्रद्धालु बाबा के दर्शन कार्तिकेय मंडपम से कर सकेंगे। मंदिर प्रशासन द्वारा 40 से 45 मिनट में श्रद्धालुओं को दर्शन करवाए जाने का दावा किया जा रहा है। भस्म आरती के बाद 2.30 से 3 बजे तक भोग आरती होगी। शाम 5 से 5:45 तक संध्या पूजन होगा। शाम 6:30 से 7:15 तक संध्या आरती की जाएगी और रात 10:30 बजे शयन आरती के बाद 11 बजे पट बंद कर दिए जाएंगे। Ujjain News

महाकाल मंदिर की विशेषता

महाकाल मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भगवान महाकाल की पूजा की जाती है। भगवान महाकाल को शिव का अवतार माना जाता है। महाकाल मंदिर की स्थापना 11वीं शताब्दी में हुई थी। यह मंदिर उज्जैन शहर में स्थित है। महाकाल मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भगवान महाकाल की पूजा की जाती है और यहां की भस्म आरती प्रसिद्ध है।

महाकाल मंदिर का महत्व

महाकाल मंदिर का महत्व यह है कि यहां भगवान महाकाल की पूजा की जाती है। भगवान महाकाल को शिव का अवतार माना जाता है। महाकाल मंदिर की स्थापना 11वीं शताब्दी में हुई थी। यह मंदिर उज्जैन शहर में स्थित है। महाकाल मंदिर का महत्व यह है कि यहां भगवान महाकाल की पूजा की जाती है और यहां की भस्म आरती प्रसिद्ध है।

महाकाल मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भगवान महाकाल की पूजा की जाती है। भगवान महाकाल को शिव का अवतार माना जाता है। महाकाल मंदिर की स्थापना 11वीं शताब्दी में हुई थी। यह मंदिर उज्जैन शहर में स्थित है। महाकाल मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भगवान महाकाल की पूजा की जाती है और यहां की भस्म आरती प्रसिद्ध है। Ujjain News


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