उज्जैन टेपा सम्मेलन ने इस बार अंतर्राष्ट्रीय मूर्ख दिवस पर ऐसा माहौल बनाया कि पूरा सभागार हंसी से गूंज उठा। कालिदास अकादमी में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में देर रात तक दर्शक अपनी सीटों से उठ नहीं पाए। उज्जैन टेपा सम्मेलन हर साल की तरह इस बार भी हंसी, व्यंग्य और मनोरंजन का अनोखा संगम बनकर सामने आया, जहां हर पल दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान बनी रही।
उज्जैन टेपा सम्मेलन में राकेश बेदी बने मुख्य आकर्षण
उज्जैन टेपा सम्मेलन के इस आयोजन में बॉलीवुड अभिनेता राकेश बेदी सबसे बड़े आकर्षण के रूप में उभरे। उन्हें मंच पर ‘मुख्य टेपा’ का खिताब दिया गया। खास बात यह रही कि उनके ऊपर मजाकिया अंदाज में एक मुकदमा भी चलाया गया, जिसने पूरे कार्यक्रम में नई जान डाल दी। राकेश बेदी ने अपने कॉमिक अंदाज, शायरी और प्रसिद्ध डायलॉग से दर्शकों को लगातार हंसाया और तालियां बटोरीं।
मंच पर मजाकिया मुकदमों ने बढ़ाया मनोरंजन
उज्जैन टेपा सम्मेलन की सबसे खास पहचान इसके मजाकिया मुकदमे हैं, जो हर साल दर्शकों को खूब गुदगुदाते हैं। इस बार भी कई प्रमुख हस्तियों को हल्के-फुल्के अंदाज में मंच पर कटघरे में खड़ा किया गया। भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश धाकड़ और कांग्रेस नेता सुरेंद्र मरमट जैसे नामी लोगों पर हास्य शैली में मुकदमे चलाए गए, जिसे देखकर दर्शक ठहाके लगाने से खुद को रोक नहीं पाए।
कवियों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
उज्जैन टेपा सम्मेलन में देशभर से आए हास्य कवियों ने भी कार्यक्रम को यादगार बना दिया। मधुबनी के शंभू शिखर, मुंबई के सुभाष काबरा, जयपुर के एकेश पार्थ और मालवा क्षेत्र के कवियों ने अपनी शानदार कविताओं से माहौल को जीवंत कर दिया। उनकी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को लगातार हंसने पर मजबूर किया और पूरे आयोजन में ऊर्जा बनाए रखी।
परंपरा और संस्कृति का जीवंत उदाहरण
उज्जैन टेपा सम्मेलन केवल एक मनोरंजन कार्यक्रम नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। कार्यक्रम का संचालन दिनेश दिग्गज, अशोक भाटी और सुरेंद्र सर्किट ने प्रभावशाली ढंग से किया। आयोजन के सचिव मनीष शर्मा ने बताया कि यह कार्यक्रम समाजसेवी स्वर्गीय लाला अमरनाथ और संस्थापक डॉ. शिव शर्मा की स्मृति में आयोजित किया गया।
उज्जैन टेपा सम्मेलन आज एक ऐसी परंपरा बन चुका है, जहां लोग सिर्फ हंसने नहीं आते, बल्कि जीवन को हल्के और सकारात्मक नजरिए से जीने की प्रेरणा भी लेकर जाते हैं।
निष्कर्ष
उज्जैन टेपा सम्मेलन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हंसी और व्यंग्य समाज को जोड़ने का सबसे मजबूत माध्यम है। यह आयोजन हर साल लोगों को खुशियों से भर देता है और अपनी खास पहचान बनाए रखता है।
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