अमेरिका ईरान युद्ध संकट एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। खाड़ी क्षेत्र में दो अमेरिकी विमानवाहक पोतों की तैनाती और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कड़ी चेतावनी ने हालात को संवेदनशील बना दिया है। एक अमेरिकी पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन ईरानी तट से लगभग 700 किलोमीटर की दूरी पर तैनात बताया जा रहा है, जबकि दूसरा पोत क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति मजबूत करने के लिए भेजा गया है। खामेनेई ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अमेरिकी ताकत इस्लामिक गणराज्य को झुका नहीं सकती और यदि हमला हुआ तो जवाब भी दिया जाएगा।
जेनेवा में जारी वार्ता, ओमान की मध्यस्थता
तनाव के बीच जेनेवा में ओमान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच बातचीत भी जारी है। सवाल यह है कि क्या यह टकराव वास्तविक युद्ध की प्रस्तावना है या फिर दशकों से चल रहे तनाव का एक और चरण। विशेषज्ञों के अनुसार अनिश्चितता इस बात को लेकर है कि वाशिंगटन वार्ता से वास्तव में क्या हासिल करना चाहता है। यदि परमाणु कार्यक्रम ही मुद्दा है तो समाधान संभव है, लेकिन यदि मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सहयोगियों का समर्थन भी एजेंडे में है तो स्थिति जटिल हो सकती है।
सैन्य दबाव और ‘कोएर्सिव डिप्लोमेसी’
विशेषज्ञ इसे दबाव आधारित कूटनीति की रणनीति मानते हैं, जिसमें सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर समझौते के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि ऐसी स्थिति में गलतफहमी या गलत आकलन युद्ध की चिंगारी बन सकता है। पिछले वर्ष ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान अमेरिका की सीमित भागीदारी ने खतरे को और वास्तविक बना दिया है।
ईरान की दुविधा और आंतरिक दबाव
ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है, लेकिन कई अमेरिकी बेस ऐसे देशों में हैं जिनसे तेहरान के संबंध अपेक्षाकृत बेहतर हैं। कतर में पूर्व हमले के बाद संबंधों में आई खटास ईरान के लिए सबक रही है। साथ ही, देश के भीतर आर्थिक संकट, महंगाई और हालिया विरोध प्रदर्शनों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में अमेरिका ईरान युद्ध संकट केवल सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक संतुलन का भी प्रश्न बन गया है।
होरमुज जलडमरूमध्य
सबसे बड़ी आशंका होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से दुनिया के एक चौथाई समुद्री तेल का परिवहन होता है। यदि तनाव बढ़ता है और ईरान इस मार्ग को बाधित करता है तो वैश्विक तेल कीमतों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। हाल ही में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस क्षेत्र में सैन्य अभ्यास भी किया है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
आगे क्या?
वार्ता जारी है और खाड़ी देशों—सऊदी अरब, कतर, कुवैत और ओमान—की सक्रिय कूटनीति हालात को संतुलित करने की कोशिश कर रही है। फिर भी, बयानबाजी और सैन्य तैयारी के बीच यह एक उच्च दांव वाला खेल बन चुका है। यदि सकारात्मक संकेत ओमान या अन्य मध्यस्थ देशों से आते हैं तो उम्मीद जगी रह सकती है, लेकिन फिलहाल अमेरिका ईरान युद्ध संकट विश्व राजनीति का सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
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