उत्तराखंड के चमोली में बादल फटने से तबाही: घर-वाहन मलबे में दबे, 20 वर्षीय कविता फंसी, एक व्यक्ति लापता

उत्तराखंड के चमोली में बादल फटने से तबाही: घर-वाहन मलबे में दबे, 20 वर्षीय कविता फंसी, एक व्यक्ति लापता

Uttarakhand News |  चमोली, उत्तराखंड, : उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली तहसील में शुक्रवार देर रात बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा ने क्षेत्र में भूस्खलन और अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी, जिसके परिणामस्वरूप कई घर, दुकानें और वाहन मलबे में दब गए। अधिकारियों के अनुसार, 20 वर्षीय कविता नाम की एक युवती मलबे में फंस गई है, जबकि जोशी नाम का एक अन्य व्यक्ति लापता है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। इस बीच, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी के साथ राज्य के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

यह आपदा शुक्रवार देर रात (22 अगस्त 2025) को चमोली जिले के थराली क्षेत्र में हुई, जब बादल फटने से भारी मात्रा में पानी और मलबा तेजी से बस्तियों की ओर बढ़ा। इस घटना ने थराली बाजार क्षेत्र, तहसील परिसर और आसपास के गांवों में भारी नुकसान पहुंचाया। कई घर, दुकानें, और वाहन मलबे में दब गए, जबकि उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) का आधिकारिक आवास भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल है, और कई लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे।

चमोली के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) विवेक प्रकाश ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, “बादल फटने से थराली और आसपास के क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है। एक 20 वर्षीय युवती, कविता, अपने घर के मलबे में फंसी हुई है, और जोशी नाम का एक व्यक्ति लापता है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें रात से ही बचाव कार्य में जुटी हैं। बाढ़ के कारण सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं, जिससे लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, और जिला मजिस्ट्रेट साइट पर मौजूद हैं।”

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चमोली के जिला मजिस्ट्रेट संदीप तिवारी ने कहा, “थराली तहसील में बादल फटने से भारी तबाही हुई है। मलबे ने कई घरों, बाजारों और एसडीएम आवास को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं, और प्रशासन प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।”

बचाव और राहत कार्य

घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए रात से ही काम कर रहे हैं। हालांकि, भारी बारिश और अवरुद्ध सड़कों ने बचाव कार्यों में बाधा डाली है। थराली-ग्वालदम और थराली-सागवाड़ा सड़कें मलबे और भारी बारिश के कारण बंद हो गई हैं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप है।

प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां विस्थापित लोगों को भोजन, पानी और अस्थायी आश्रय प्रदान किया जा रहा है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने लोगों से बारिश और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, “थराली क्षेत्र में देर रात बादल फटने की दुखद खबर प्राप्त हुई। जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों में जुटे हैं। मैं स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में हूं और स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा हूं। सभी की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करता हूं।”

मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने उत्तराखंड के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें देहरादून, टिहरी, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और अल्मोड़ा जैसे जिलों में गरज के साथ बौछारें, बिजली और “बेहद तीव्र” बारिश की चेतावनी दी गई है। यह अलर्ट शनिवार दोपहर तक प्रभावी रहेगा। आईएमडी ने पिथौरागढ़ में भूस्खलन की संभावना को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने को कहा है।

आईएमडी के अनुसार, उत्तराखंड में मॉनसून के दौरान भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं आम हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन और अनियोजित शहरीकरण ने इनकी तीव्रता और आवृत्ति को बढ़ा दिया है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी दी है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।

अन्य प्रभावित क्षेत्र और हाल की घटनाएं

चमोली में यह बादल फटने की घटना हाल के हफ्तों में उत्तराखंड में आई दूसरी बड़ी आपदा है। इससे पहले, अगस्त की शुरुआत में उत्तरकाशी जिले के धराली और हर्षिल क्षेत्रों में बादल फटने से भारी तबाही हुई थी, जिसमें कम से कम पांच लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक लोग लापता हो गए थे। उस घटना में धराली गांव का एक बड़ा हिस्सा मलबे और बाढ़ में बह गया था।

हाल ही में, 20 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के डबरानी क्षेत्र में गंगोत्री राजमार्ग पर एक पहाड़ी से मलबा गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री धामी ने इसे “बेहद दुखद समाचार” बताया था। इसके अलावा, बारकोट तहसील के स्यांचट्टी में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने और मलबे के कारण पानी आवासीय क्षेत्रों में घुस गया, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

पिथौरागढ़ में भी भूस्खलन के कारण थल-मुनस्यारी और मुनस्यारी-मिलम सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे यात्रियों और स्थानीय निवासियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस ने लोगों से इन क्षेत्रों में सावधानी बरतने और यात्रा से बचने की सलाह दी है।

प्राकृतिक आपदाओं का बढ़ता खतरा

उत्तराखंड, जो पश्चिमी हिमालय में स्थित है, भूस्खलन और बाढ़ के लिए अत्यधिक संवेदनशील है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, अनियोजित शहरीकरण और वनों की कटाई ने इन प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता को बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र की विश्व मौसम संगठन ने पिछले साल कहा था कि जलवायु परिवर्तन के कारण ग्रह का जल चक्र और अधिक अप्रत्याशित हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप बाढ़ और सूखे की घटनाएं बढ़ रही हैं।

हर्षिल क्षेत्र में हाल ही में बनी एक कृत्रिम झील को खाली करने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें काम कर रही हैं, क्योंकि इसका पानी आसपास के कस्बों और गांवों के लिए खतरा बन सकता है। भगीरथी नदी, जो गंगा की मुख्य धारा है, में मलबे के कारण बनी इस झील ने बड़े पैमाने पर जमीन और एक सरकारी हेलीपैड को जलमग्न कर दिया है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

चमोली में इस ताजा आपदा ने स्थानीय समुदाय को गहरे संकट में डाल दिया है। थराली बाजार क्षेत्र, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, मलबे से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई दुकानें और वाहन नष्ट हो गए हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ है। सागवाड़ा गांव में मलबे में फंसी कविता की स्थिति ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है।

यह घटना उत्तराखंड में मॉनसून के दौरान बार-बार होने वाली प्राकृतिक आपदाओं की गंभीरता को उजागर करती है। 2013 में केदारनाथ में हुई भीषण बाढ़ और भूस्खलन, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे, और 2021 में चमोली में आई आपदा, जिसमें 200 से अधिक लोगों की जान गई थी, इस क्षेत्र की भौगोलिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को दर्शाती हैं।

चमोली में बादल फटने की इस घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को उजागर किया है। कविता और जोशी जैसे प्रभावित लोगों की तलाश और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन भारी बारिश और अवरुद्ध सड़कें राहत कार्यों में बाधा डाल रही हैं। प्रशासन और बचाव दल अपनी पूरी ताकत से काम कर रहे हैं, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां चुनौती बनी हुई हैं।

मुख्यमंत्रीधामी ने केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाए रखने और प्रभावित क्षेत्रों में हर संभवसहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है। इस बीच, स्थानीय निवासियों और यात्रियों से सतर्कता बरतने और सुरक्षितस्थानों पर रहने की अपील की गई है। यह घटना न केवल तत्काल राहत और बचाव की आवश्यकता को रेखांकित करती है, बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन रणनीतियों की जरूरत को भी उजागर करती है। Uttarakhand News


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