आज हम आपको अमेरिका के एक प्रतिष्ठित अख़बार से जुड़ी ऐसी खबर बता रहे हैं जिसने पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया है। अमेरिका के मशहूर अख़बार The Washington Post ने अपने कर्मचारियों में बड़ी छंटनी की घोषणा की है। इस फैसले से न्यूजरूम का माहौल भारी और भावुक हो गया है।
एक तिहाई कर्मचारियों की नौकरी पर संकट
बुधवार को किए गए आधिकारिक एलान के अनुसार वॉशिंगटन पोस्ट अपने लगभग एक तिहाई कर्मचारियों को हटाने जा रहा है। इस छंटनी का सबसे ज्यादा असर स्पोर्ट्स लोकल और इंटरनेशनल रिपोर्टिंग से जुड़ी टीमों पर पड़ेगा। कई पत्रकारों के लिए यह खबर अचानक आई और उनके लिए भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा गई।
कार्यकारी संपादक ने क्या कहा कर्मचारियों से
अख़बार के कार्यकारी संपादक Matt Murray ने स्टाफ को एक भावुक नोट लिखा। उन्होंने माना कि यह खबर दुखद है और यह फैसला लेना आसान नहीं था। उनका कहना था कि अगर अख़बार को आगे बढ़ना है और सिर्फ टिके रहना नहीं है तो पत्रकारिता और बिजनेस मॉडल दोनों में नए जोश के साथ बदलाव करना जरूरी है।

डिजिटल दौर और गिरता ट्रैफिक बनी बड़ी वजह
मैट मरे ने अपने संदेश में यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों में अख़बार का ऑनलाइन ट्रैफिक काफी गिरा है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में पाठकों की आदतें तेजी से बदली हैं। उन्होंने यह स्वीकार किया कि अख़बार अच्छा काम करता है लेकिन कई बार एक ही नजरिए से लिखता है और सीमित वर्ग के पाठकों तक ही पहुंच पाता है।
कर्मचारियों का दर्द और इतिहास का काला दिन
इस फैसले से अख़बार के अंदर गहरी नाराजगी देखने को मिली। एक कर्मचारी ने इसे वॉशिंगटन पोस्ट के इतिहास का सबसे डार्क डे बताया। कई मौजूदा और पूर्व नेताओं ने भी इस निर्णय की खुलकर आलोचना की और कहा कि लगातार छंटनी से अख़बार की आत्मा कमजोर होती जा रही है।
जेफ बेजोस से की गई अपील भी बेअसर
छंटनी की घोषणा से पहले फॉरेन और लोकल रिपोर्टरों ने अख़बार के मालिक Jeff Bezos से अपनी नौकरियां बचाने की अपील की थी। लेकिन इसके बावजूद यह कठोर फैसला लिया गया। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उनकी आवाज सुनी जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
यूनियन की चेतावनी और अख़बार का भविष्य
वॉशिंगटन पोस्ट गिल्ड ने बयान जारी कर कहा कि कर्मचारियों को लगातार हटाना अख़बार को और कमजोर करेगा। इससे पाठक दूर होंगे और अख़बार के मूल मिशन को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। यूनियन का मानना है कि पत्रकारों की कमी से गुणवत्ता और भरोसा दोनों पर असर पड़ेगा।
बदलते समय में पत्रकारिता की चुनौती
यह पूरी घटना बताती है कि डिजिटल युग में बड़े मीडिया संस्थान भी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं। तकनीक बदल रही है पाठकों की पसंद बदल रही है और इसके बीच पत्रकारों की नौकरी सबसे ज्यादा असुरक्षित होती जा रही है।










