मानसून का अनोखा ट्रेंड: राजस्थान से समय से पहले विदाई, मुंबई में मूसलाधार बारिश की आफत; जलवायु परिवर्तन और मौसमी कारकों का क्या है असर?
Weather Update | 15 सितंबर 2025 को देशभर में मौसम का मिजाज एकदम अलग दिखाई दे रहा है। जहां एक तरफ दक्षिण-पश्चिम मानसून पश्चिमी राजस्थान से सामान्य तिथि से तीन दिन पहले विदा लेना शुरू कर चुका है, वहीं दूसरी ओर मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भारी बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह ठप कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मुंबई, ठाणे और रायगढ़ के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जबकि राजस्थान, पंजाब और गुजरात में अगले कुछ दिनों में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना जताई गई है। दिल्ली-एनसीआर में बादल छाए रहेंगे, लेकिन बारिश के आसार कम हैं। यह असंगत मौसमी पैटर्न जलवायु परिवर्तन, एल नीनो/ला नीना प्रभाव और अन्य वैश्विक मौसमी कारकों का परिणाम माना जा रहा है। आइए, इस अनोखे ट्रेंड को विस्तार से समझते हैं। Weather Update
मानसून की समय से पहले वापसी: राजस्थान से शुरू हुई विदाई
आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 14 सितंबर 2025 को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से अपनी वापसी शुरू कर दी है। सामान्यतः मानसून की विदाई राजस्थान से 17 सितंबर के आसपास होती है, और पूरे देश से 15 अक्टूबर तक पूरी हो जाती है। लेकिन इस साल यह प्रक्रिया तीन दिन पहले शुरू हो गई है, जो 2015 के बाद पहली बार हो रहा है। 2015 में विदाई 4 सितंबर से ही आरंभ हो गई थी।
इस साल मानसून ने भी समय से पहले दस्तक दी थी। केरल में 30 मई को पहुंचा, जो सामान्य तिथि 1 जून से दो दिन पहले था, और पूरे देश को कवर करने में मात्र 37 दिनों का समय लिया (सामान्य 38 दिन)। कुल मिलाकर, 14 सितंबर तक देश को लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) से 7% अधिक वर्षा प्राप्त हुई है। उत्तर-पश्चिम भारत में 32% अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बाढ़ और फसल नुकसान हुआ।
आईएमडी के विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून की वापसी की शुरुआत उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से होती है, जब साउथवेस्टली विंड रिजीम में बदलाव आता है। 1 सितंबर से पहले चरम उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों से विदाई की कोशिश नहीं की जाती। अगले 2-3 दिनों में राजस्थान, पंजाब और गुजरात में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है, लेकिन विदाई की प्रक्रिया धीरे-धीरे पूरे उत्तर-पश्चिम में फैलेगी। दक्षिणी प्रायद्वीप से पूर्ण विदाई 1 अक्टूबर के बाद ही संभव है।
मुंबई में भारी बारिश की तबाही: रेड अलर्ट और जनजीवन ठप
मुंबई में मानसून की विदाई के बावजूद भारी बारिश का दौर जारी है, जो एक विडंबना है। 14 सितंबर सुबह 8:30 बजे से 15 सितंबर सुबह 5:30 बजे तक मुंबई के विभिन्न इलाकों में अलग-अलग मात्रा में वर्षा दर्ज की गई। कोलाबा में सबसे अधिक 88.2 मिमी, बांद्रा में 82 मिमी, बायकुला में 73 मिमी और टाटा पावर में 70.5 मिमी बारिश हुई। रविवार रात से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने कई इलाकों में जलभराव पैदा कर दिया है।
आईएमडी ने 15 सितंबर के लिए मुंबई, ठाणे और रायगढ़ में रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि गरज-चमक के साथ बहुत तीव्र बारिश और 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इससे ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं—हैरबर लाइन पर कुरला से सीएसएमटी तक सेवाएं निलंबित हैं, जबकि कई फ्लाइट्स डिले या डायवर्ट हो गई हैं। ओवर 100 बीईएसटी बस रूट्स डायवर्ट किए गए हैं। दक्षिण-मध्य मुंबई में पिछले तीन घंटों से लगातार भारी बारिश हो रही है, और अगले दो घंटों तक यह जारी रहने की संभावना है।
महाराष्ट्र के 35 जिलों में अलर्ट जारी हैं, जिनमें पुणे, नासिक, नागपुर और औरंगाबाद शामिल हैं। कोकण क्षेत्र (पालघर, ठाणे, मुंबई, सिंधुदुर्ग) में येलो अलर्ट, जबकि रायगढ़ और रत्नागिरि में ऑरेंज अलर्ट है। पश्चिमी महाराष्ट्र (पुणे, कोल्हापुर, सतारा, सांगली, सोलापुर) में भी गरज के साथ बारिश संभावित है। उत्तर महाराष्ट्र (धुले, नंदुरबार, जळगांव, नासिक) में बिजली के साथ वर्षा हो सकती है। जलभराव से ट्रैफिक जाम, बिजली कटौती और स्कूल-कॉलेज बंद होने की स्थिति बनी हुई है। Weather Update
अन्य क्षेत्रों में मौसम का हाल: दिल्ली से यूपी तक बादल छाए
- दिल्ली-एनसीआर: आज बादलों की आवाजाही रहेगी, लेकिन बारिश के आसार न के बराबर हैं। तापमान सामान्य रहेगा।
- उत्तर प्रदेश: पूर्वी यूपी के कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहेगा। नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है।
- बिहार और झारखंड: कुछ जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा संभव।
- उत्तर-पूर्वी राज्य: अगले तीन दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी।
क्यों है यह मौसमी ट्रेंड अलग? जलवायु परिवर्तन और वैश्विक कारकों का प्रभाव
इस साल मानसून का यह असंगत व्यवहार—समय से पहले आगमन और विदाई—कई वैज्ञानिक कारणों से जुड़ा है। आईएमडी और विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
- सर्कुलेशन पैटर्न में बदलाव: मानसून की विदाई साउथवेस्टली विंड्स के रिजीम में बदलाव पर निर्भर करती है। इस साल उत्तर-पश्चिम भारत में कम दबाव वाले क्षेत्र (लो प्रेशर) कमजोर पड़ गए, जिससे विदाई जल्दी शुरू हो गई। हालांकि, दक्षिणी हिस्सों में सिस्टम सक्रिय हैं, इसलिए मुंबई जैसे क्षेत्रों में बारिश जारी है।
- जलवायु परिवर्तन का असर: ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण मानसून की टाइमिंग और तीव्रता अनियमित हो रही है। एक अध्ययन (सीईईडब्ल्यू) के अनुसार, 2012-2022 के बीच भारत के 48% तहसीलों में अक्टूबर में एलपीए से अधिक वर्षा हुई, जो विलंबित विदाई का संकेत है। लेकिन 2025 में जल्दी विदाई का कारण बढ़ते तापमान और समुद्री सतह के तापमान में उतार-चढ़ाव है। जलवायु परिवर्तन से एक्सट्रीम इवेंट्स जैसे भारी बारिश (मुंबई में) और शुष्क स्पेल्स (राजस्थान में विदाई) बढ़ रहे हैं।
- एल नीनो/ला नीना और अन्य वैश्विक कारक: 2025 में ला नीना का प्रभाव कमजोर रहा, जबकि मॉडन-जूलियन ऑसिलेशन (एमजेओ) ने मानसून को प्रभावित किया। एमजेओ एक वैश्विक मौसमी घटना है जो बादलों और वर्षा को प्रभावित करती है। इसके अलावा, तिब्बती पठार पर तीव्र हीटिंग से लो प्रेशर सिस्टम बने, लेकिन उनकी तीव्रता कम होने से विदाई जल्दी हुई। सोमाली जेट स्ट्रीम की स्थिति भी मानसून के आगमन और विदाई को नियंत्रित करती है।
- क्षेत्रीय भिन्नताएं: इस साल उत्तर-पश्चिम में अधिक वर्षा (32% ऊपर) हुई, जिससे बाढ़ आई, जबकि दक्षिण-पश्चिम में सिस्टम सक्रिय रहे। जलवायु मॉडल्स के अनुसार, 2025 में कुल वर्षा एलपीए का 106% रहने की उम्मीद थी, जो अब तक सही साबित हो रही है। लेकिन जल्दी आगमन (2009 के बाद पहली बार) ने खरीफ फसलों की बुआई को प्रभावित किया, खासकर महाराष्ट्र में।
विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी विदाई फसल क्षेत्र को प्रभावित नहीं करेगी, क्योंकि बुआई पूरी हो चुकी है। जलाशय अच्छे स्तर पर भरे हैं, जो रबी फसल के लिए फायदेमंद होगा। लेकिन एक्सट्रीम मौसम से बाढ़, भूस्खलन और फसल क्षति का खतरा बढ़ा है। Weather Update
सतर्कता और तैयारी जरूरी
यह मौसमी ट्रेंड भारत की कृषि, अर्थव्यवस्था और जनजीवन को प्रभावित कर रहा है। आईएमडी ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों में उत्तर-पूर्व और महाराष्ट्र में भारी बारिश जारी रहेगी। नागरिकों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने, फसल सुरक्षा के उपाय करने और अपडेटेड पूर्वानुमान पर नजर रखने की सलाह दी गई है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में, लंबी अवधि की योजना और आपदा प्रबंधन महत्वपूर्ण हो गया है। अधिक जानकारी के लिए आईएमडी की वेबसाइट mausam.imd.gov.in पर जाएं। Weather Update
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मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।









