तीन साल में क्यों बदल देना चाहिए पुखराज, इसके पीछे छिपे वैज्ञानिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक कारण
Why change Yellow Sapphire after 3 years | बहुत से लोग पुखराज (Yellow Sapphire) को एक बार धारण करने के बाद सालों-साल पहनते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर रत्न (Gemstone) की एक निश्चित आयु (lifespan) होती है? विशेष रूप से पुखराज जैसे ग्रह-रत्न की शक्ति समय के साथ कम होती जाती है।
ज्योतिष (Astrology) के अनुसार, पुखराज का सीधा संबंध गुरु ग्रह (Jupiter) से होता है, जो ज्ञान, धन, धर्म, और सौभाग्य का कारक माना जाता है। लेकिन जैसे-जैसे यह रत्न पुराना होता है, इसका कंपन (vibration) और ऊर्जा स्तर घटता जाता है।
यही कारण है कि विद्वान ज्योतिषी यह सलाह देते हैं कि हर 3 साल में पुखराज को बदल देना चाहिए, ताकि गुरु ग्रह की कृपा सतत बनी रहे।
पुखराज का ग्रह संबंध: गुरु (Jupiter) की शक्ति का प्रतीक
गुरु ग्रह (Jupiter) को “देवगुरु” कहा जाता है — यानी देवताओं के गुरु। यह ज्ञान, समृद्धि, संतान सुख, और नैतिकता का प्रतिनिधि है।
जब यह ग्रह कुंडली में मजबूत होता है तो व्यक्ति को सफलता, प्रतिष्ठा, वैवाहिक सुख और धन का वरदान मिलता है।
लेकिन जब यह कमजोर या नीच राशि में होता है, तब व्यक्ति को
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निर्णय लेने में भ्रम,
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आर्थिक नुकसान,
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पारिवारिक तनाव,
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या संतान से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
इसी कमजोरी को दूर करने के लिए ज्योतिष में पुखराज रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है, जो गुरु की शक्ति को सक्रिय करता है।
पुखराज की शक्ति कैसे काम करती है?
पुखराज (Yellow Sapphire) में मौजूद क्रिस्टल स्ट्रक्चर सूर्य और गुरु ग्रह की किरणों को अवशोषित करके शरीर के सौर मणिपुर चक्र (Solar Plexus Chakra) में ऊर्जा पहुंचाता है।
यह चक्र आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र होता है।
परंतु जैसे-जैसे समय बीतता है —
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पसीना, धूल, वातावरण की नमी, और
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शरीर की ऊष्मा (body heat)
रत्न की सतह पर धीरे-धीरे असर डालती है।
इससे उसकी ऊर्जा संप्रेषण क्षमता (energy transmission power) कम होने लगती है।
तीन साल बाद क्यों घट जाती है पुखराज की शक्ति?
अब बात करते हैं मुख्य प्रश्न की — तीन साल में ही क्यों बदलना चाहिए पुखराज?
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🔸 प्राकृतिक कंपन (Natural Vibrations) कम हो जाना:
पुखराज के अणुओं में जो कंपन (vibrations) ग्रहों की ऊर्जा को आकर्षित करते हैं, वे धीरे-धीरे मंद पड़ जाते हैं। लगभग 30-36 महीनों में यह क्षमता 70% तक घट जाती है। -
🔸 रत्न की सतह पर अदृश्य दरारें (Micro Cracks):
लगातार पहनने से रत्न में छोटे-छोटे माइक्रो क्रैक्स बनते हैं, जो नग्न आंखों से नहीं दिखते। ये दरारें ऊर्जा प्रवाह को रोक देती हैं। -
🔸 ग्रहों की चाल (Planetary Transition):
गुरु ग्रह हर 12 से 13 महीने में एक राशि बदलता है। तीन वर्षों में यह लगभग तीन राशियों की यात्रा कर लेता है। इस दौरान आपकी जन्म कुंडली में उसकी स्थिति भी बदल जाती है, जिससे पुराने पुखराज की ऊर्जा असंगत (mismatched) हो सकती है। -
🔸 आध्यात्मिक थकान (Spiritual Fatigue):
किसी भी रत्न में ऊर्जा स्थायी नहीं रहती। यह धीरे-धीरे “थक” जाता है, ठीक वैसे जैसे बैटरी डिस्चार्ज हो जाती है। पुराने पुखराज की ऊर्जा धीरे-धीरे शून्य के करीब पहुंच जाती है। -
🔸 ज्योतिषीय अनुशासन:
प्राचीन ग्रंथों में जैसे बृहद संहिता और रत्न शास्त्र में भी कहा गया है कि —“रत्न त्रिवर्षोपरांत न फलदायकं भवति”
यानी तीन वर्ष के बाद रत्न फलदायक नहीं रहता।
क्या पुराने पुखराज से हानि होती है?
जी हां, अगर आप बहुत पुराने पुखराज को धारण करते रहते हैं, तो इसके उल्टे परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं —
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गुरु ग्रह की कृपा घट सकती है।
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आर्थिक अड़चनें और निर्णयों में असफलता आने लगती है।
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वैवाहिक जीवन में असहमति बढ़ सकती है।
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संतान पक्ष में चिंता या असंतोष उत्पन्न हो सकता है।
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कई बार व्यक्ति के भाग्य का ग्राफ गिरने लगता है, जबकि कोई स्पष्ट कारण नहीं दिखता।
यह सब संकेत हैं कि आपका पुखराज अपनी शक्ति खो चुका है।
नया पुखराज धारण करने का सही समय और प्रक्रिया
नया पुखराज धारण करने के लिए गुरुवार (Thursday) का दिन सबसे शुभ माना जाता है।
विषाखा, पुनर्वसु या पुष्य नक्षत्र में इसे पहनना अत्यंत लाभकारी होता है।
प्रक्रिया:
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गुरुवार सुबह स्नान के बाद शुद्ध पीले वस्त्र पहनें।
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एक पात्र में गंगाजल, कच्चा दूध, शहद और केसर मिलाएं।
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उसमें नया पुखराज 10-15 मिनट तक रखें।
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इसके बाद गुरु बीज मंत्र का 108 बार जाप करें:
“ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।”
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फिर रत्न को सोने की अंगूठी (Gold Ring) में लगाकर दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली (Index Finger) में धारण करें।
वजन का नियम:
पुखराज का वजन आपकी शारीरिक ऊर्जा पर निर्भर करता है —
हर 12 किलो वजन पर लगभग 1 रत्ती (ratti) पुखराज उपयुक्त होता है।
असली और नकली पुखराज की पहचान
जब आप नया पुखराज लें, तो उसकी शुद्धता पर विशेष ध्यान दें। नकली या सिंथेटिक पुखराज आपकी कुंडली पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है।
पहचान के संकेत:
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असली पुखराज में हल्की धुंध या प्राकृतिक रेखाएं दिखती हैं।
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यह बहुत पारदर्शी नहीं होता।
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गर्म करने पर इसका रंग फीका नहीं पड़ता।
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असली पुखराज टोपाज या सिट्रीन की तुलना में भारी होता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पुखराज बदलने का तर्क
विज्ञान की दृष्टि से देखें तो हर रत्न में माइक्रो-एनर्जी फील्ड (micro-energy field) होता है, जो सूर्य की किरणों और शरीर के विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र (bio-magnetic field) के बीच मध्यस्थ का कार्य करता है।
लगातार उपयोग के दौरान —
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यह ऊर्जा धीरे-धीरे डिफ्यूज (diffuse) हो जाती है,
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और रत्न के स्पेक्ट्रल रेंज (spectral range) की क्षमता घट जाती है।
तीन वर्ष के भीतर यह प्रभाव लगभग समाप्त हो जाता है।
इसलिए वैज्ञानिक रूप से भी पुखराज को समय-समय पर बदलना आवश्यक है ताकि ऊर्जा प्रवाह संतुलित बना रहे।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से पुखराज का नवीनीकरण
आध्यात्मिक दृष्टि से रत्नों को जीवित ऊर्जा वाहक (living energy carriers) माना गया है।
जब आप नया पुखराज धारण करते हैं, तो वह आपकी आभा (Aura) में नई चेतना और प्रकाश का संचार करता है।
पुराने पुखराज को बदलने से व्यक्ति में —
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मनोबल बढ़ता है,
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निर्णय क्षमता में सुधार आता है,
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और जीवन में नई सकारात्मक घटनाएँ घटित होती हैं।
पुराने पुखराज का क्या करें?
जब नया पुखराज धारण करें, तो पुराने पुखराज को फेंके नहीं।
इसके बजाय —
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उसे गंगाजल में प्रवाहित कर दें, या
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किसी पीपल या तुलसी के पौधे के नीचे मिट्टी में दबा दें।
इससे उस रत्न की शेष ऊर्जा प्रकृति में लौट जाती है, और कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं रहता।
जीवन में नई ऊर्जा के लिए नया पुखराज
पुखराज (Yellow Sapphire) सिर्फ एक सुंदर पत्थर नहीं है — यह आपकी किस्मत, आत्मविश्वास, और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है।
लेकिन हर माध्यम की एक सीमित अवधि होती है।
तीन वर्ष बाद पुखराज की आंतरिक शक्ति कम हो जाती है, और वह अब उतना फल नहीं दे पाता।
इसलिए, अगर आप चाहते हैं कि गुरु ग्रह (Jupiter) की कृपा निरंतर बनी रहे, तो हर तीन साल में पुखराज अवश्य बदलें।
नया पुखराज नया प्रकाश लेकर आएगा —
ज्ञान, धन, धर्म और सौभाग्य का प्रतीक बनकर।
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धर्मेंद्र (Dharmendra): बॉलीवुड के ही-मैन की जिंदगी और जज़्बे की कहानी
मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।









