बड़नगर मंडी बंद विवाद के चलते उज्जैन जिले की बड़नगर कृषि उपज मंडी में लगातार पांचवें दिन भी नीलामी और खरीद-फरोख्त बंद रही। व्यापारी और हम्मालों के बीच डाला भरवाई की राशि बढ़ाने को लेकर चल रहे विवाद के कारण मंडी में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। दूर-दराज से अपनी उपज बेचने पहुंचे सैकड़ों किसान पिछले कई दिनों से परेशान हो रहे हैं।
बड़नगर मंडी बंद विवाद: पांचवें दिन भी नहीं शुरू हो पाई नीलामी
बड़नगर मंडी बंद विवाद के कारण गुरुवार, 5 मार्च को भी मंडी में नीलामी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। पिछले चार दिनों से मंडी में व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बंद हैं, जिससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडी प्रशासन ने व्यापारी और हम्मालों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए बैठक बुलाई है। इस बैठक में निर्णय होने के बाद ही मंडी के दोबारा शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
डाला भरवाई की राशि को लेकर शुरू हुआ विवाद
बड़नगर मंडी बंद विवाद की जड़ डाला भरवाई की राशि बढ़ाने की मांग है। जानकारी के अनुसार हम्माल एसोसिएशन ने करीब दो महीने पहले अपनी मांगों को लेकर मंडी सचिव को लिखित आवेदन दिया था। हालांकि, हम्मालों का आरोप है कि मंडी प्रशासन ने उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके बाद यह विवाद बढ़ गया।
शुक्रवार को व्यापारी और हम्मालों के बीच इसी मुद्दे को लेकर विवाद बढ़ गया और नीलामी कार्य पूरी तरह बंद हो गया।
किसानों ने मंडी गेट पर किया प्रदर्शन
बड़नगर मंडी बंद विवाद से सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को हो रही है। फसल बेचने के लिए मंडी पहुंचे सैकड़ों किसानों ने नीलामी बंद होने से नाराज होकर मंडी के मुख्य गेट पर ताला लगाकर प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि कई दिनों से वे मंडी में इंतजार कर रहे हैं, लेकिन फसल की नीलामी नहीं हो पा रही है।
किसानों की इस नाराजगी के चलते मंडी परिसर में तनाव की स्थिति भी देखने को मिली।
मंडी खुलवाने के लिए प्रशासन कर रहा प्रयास
बड़नगर मंडी बंद विवाद को लेकर प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। किसानों के प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद एसडीएम धीरेंद्र पाराशर मंडी पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान पूर्व विधायक मुरली मोरवाल ने भी अधिकारियों से चर्चा कर समाधान निकालने की कोशिश की।
हालांकि अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। मंडी प्रशासन द्वारा आज आयोजित बैठक में व्यापारी और हम्मालों के बीच सहमति बनने की उम्मीद जताई जा रही है।
यदि बैठक में सकारात्मक निर्णय होता है तो जल्द ही मंडी में नीलामी और खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकती है, जिससे किसानों को राहत मिल सकेगी।











