भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एचसीएलटेक अब देसी कृत्रिम मेधा स्टार्टअप सर्वम एआई में 150 मिलियन डॉलर का निवेश करने जा रही है। Sarvam AI funding के इस दौर में कंपनी की वैल्यूएशन 1.5 अरब डॉलर आँकी गई है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार एचसीएलटेक इस फंडिंग राउंड की अगुआई करेगी। इसके अलावा चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया भी इस राउंड में निवेश करने की दौड़ में बताई जा रही है। सर्वम एआई इस पूरे राउंड में कुल 300 मिलियन डॉलर जुटाने की योजना बना रही है।
दो साल बाद मिल रही है बड़ी फंडिंग
यह सर्वम एआई के लिए दो साल से अधिक समय में पहला फंडिंग राउंड होगा। इससे पहले कंपनी ने दिसंबर 2023 में सीरीज ए राउंड में 41 मिलियन डॉलर जुटाए थे। उस समय की तुलना में यह निवेश कई गुना बड़ा है। Sarvam AI funding का यह नया दौर भारतीय तकनीकी क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक पल माना जा रहा है। पहली बार कोई बड़ी भारतीय आईटी कंपनी किसी देसी कृत्रिम मेधा स्टार्टअप में इतने बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है।
क्या है सर्वम एआई और कौन है इसके पीछे?
सर्वम एआई की स्थापना जुलाई 2023 में विवेक राघवन और प्रत्युष कुमार ने की थी। बेंगलुरु स्थित यह स्टार्टअप भारत के लिए एक संपूर्ण और स्वतंत्र कृत्रिम मेधा कंपनी बनने की दिशा में काम कर रहा है। इसका मुख्य ध्यान भारतीय भाषाओं में कृत्रिम मेधा और आवाज आधारित अनुप्रयोगों पर है। इस वर्ष की शुरुआत में आयोजित इंडियाएआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन में कंपनी ने 30 अरब और 105 अरब पैरामीटर वाले दो बड़े भाषा मॉडल पेश किए, जो पूरी तरह भारत में ही विकसित किए गए। इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वम एआई के स्मार्ट चश्मे भी पहनकर देखे।
चैटजीपीटी और गूगल जेमिनी को दी थी टक्कर
सर्वम एआई ने पहले भी अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है। कंपनी के विज़न और बुलबुल मॉडल ने कुछ विशेष कार्यों में चैटजीपीटी और गूगल जेमिनी जैसी वैश्विक कंपनियों को पीछे छोड़ दिया था। यह उपलब्धि भारतीय तकनीकी समुदाय के लिए गर्व का विषय बनी। Sarvam AI funding से मिलने वाले संसाधनों से कंपनी अपने मॉडलों को और अधिक शक्तिशाली बना सकेगी।
भारतीय आईटी क्षेत्र में क्यों आ रहा है बदलाव?
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र लंबे समय से कृत्रिम मेधा को लेकर सावधान रवैया अपनाता रहा है। एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी कंपनियों के नए उत्पाद आने पर टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो जैसी कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखा गया है। एंथ्रोपिक, जो 2021 में स्थापित हुई, आज भारत की शीर्ष चार आईटी कंपनियों की संयुक्त वैल्यूएशन से भी अधिक मूल्यवान हो चुकी है। इस बदलती परिस्थिति में भारतीय आईटी कंपनियों पर कृत्रिम मेधा में निवेश न करने के आरोप लगते रहे हैं। एचसीएलटेक का यह कदम उसी दिशा में एक ठोस जवाब माना जा रहा है।
एचसीएलटेक का दोहरा दाँव
दिलचस्प बात यह है कि एचसीएलटेक पहले से ही ओपनएआई के साथ एक समझौते के तहत अपने ग्राहकों के लिए कृत्रिम मेधा उपकरण लागू करने का काम कर रही है। अब सर्वम एआई में निवेश से कंपनी एक साथ वैश्विक और देसी — दोनों मोर्चों पर सक्रिय हो जाएगी। यह रणनीति भारतीय आईटी क्षेत्र के लिए एक नई मिसाल कायम कर सकती है। जानकारों का मानना है कि यह निवेश न केवल सर्वम एआई बल्कि पूरे भारतीय स्टार्टअप परिवेश को नई ऊर्जा देगा।
निष्कर्ष
Sarvam AI funding का यह दौर भारतीय तकनीकी जगत के लिए एक निर्णायक मोड़ है। एचसीएलटेक जैसी दिग्गज कंपनी का देसी कृत्रिम मेधा स्टार्टअप पर भरोसा जताना दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक कृत्रिम मेधा दौड़ में सक्रिय भागीदार बनने की राह पर है। 1.5 अरब डॉलर की वैल्यूएशन और एनवीडिया की संभावित भागीदारी इस निवेश को और भी महत्वपूर्ण बनाती है। आने वाले समय में यह साझेदारी भारतीय भाषाओं में कृत्रिम मेधा के विकास को नई गति दे सकती है।
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