एआई एथिकल हैकिंग को लेकर दुनियाभर में नई बहस शुरू हो गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम अब इतने ताकतवर हो चुके हैं कि वे इंसानी हैकर्स से भी तेज़ी से सॉफ्टवेयर की कमजोरियां खोज पा रहे हैं। इसी बीच Anthropic के नए AI मॉडल “Mythos Preview” ने साइबर सुरक्षा जगत में हलचल मचा दी है।
दुनिया की चर्चित एथिकल हैकर वेलेंटीना पाल्मिओटी, जिन्हें ऑनलाइन “चॉम्पी” के नाम से जाना जाता है, ने चेतावनी दी है कि भविष्य में AI कई एथिकल हैकर्स की नौकरियां प्रभावित कर सकता है।
एआई एथिकल हैकिंग से क्यों बढ़ी चिंता
Anthropic का दावा है कि उसका Mythos AI हजारों गंभीर सॉफ्टवेयर कमजोरियों का पता लगा चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह सिस्टम बड़े ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजरों में भी सुरक्षा खामियां खोजने में सफल रहा है।
Mozilla ने भी खुलासा किया कि Mythos Preview ने Firefox ब्राउजर में सैकड़ों बग्स खोजने में मदद की। इसके बाद साइबर सुरक्षा जगत में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या AI भविष्य में इंसानी हैकर्स की जगह ले सकता है।
इंसानी हैकर्स के लिए कितना बड़ा खतरा
चॉम्पी का मानना है कि फिलहाल AI टूल्स एथिकल हैकर्स की मदद कर रहे हैं, लेकिन समय के साथ छोटे और सामान्य बग इंसानों से पहले AI ही ढूंढ लेगा। इससे साइबर सिक्योरिटी रिसर्च में प्रतिस्पर्धा काफी कठिन हो सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि नई और जटिल सुरक्षा प्रणालियों को समझने में अभी भी इंसानी अनुभव और क्रिएटिव सोच की जरूरत है।
AI ने Apple सुरक्षा सिस्टम भी तोड़ा
एक साइबर सुरक्षा स्टार्टअप ने दावा किया कि Mythos AI की मदद से Apple के नए M5 चिप सुरक्षा सिस्टम में कमजोरियां खोजने में सफलता मिली। हालांकि अंतिम एक्सप्लॉइट तैयार करने के लिए इंसानी विशेषज्ञों की भूमिका बेहद अहम रही।
विशेषज्ञों के अनुसार AI पुराने पैटर्न पहचानने में तेज है, लेकिन बिल्कुल नई सुरक्षा तकनीकों को तोड़ने में इंसानी समझ अभी भी जरूरी बनी हुई है।
जिम्मेदारी के साथ AI रिलीज करने की मांग
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इतने शक्तिशाली AI सिस्टम को सीमित और जिम्मेदार तरीके से जारी किया जाना चाहिए। चॉम्पी ने कहा कि सबसे पहले एथिकल हैकर्स और सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे टूल्स तक पहुंच मिलनी चाहिए ताकि साइबर अपराधियों से पहले कमजोरियों को ठीक किया जा सके।
AI तकनीक के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने अब साइबर सुरक्षा उद्योग के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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