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ईवी बनाम हाइब्रिड कार खर्च: 5 साल में कौन बचाएगा लाखों रुपये

ईवी बनाम हाइब्रिड कार खर्च: 5 साल में कौन बचाएगा लाखों रुपये
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ईवी बनाम हाइब्रिड कार खर्च को लेकर भारत में कार खरीदने वाले ग्राहकों के बीच बड़ा कन्फ्यूजन बना हुआ है। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच अब सवाल यह है कि लंबी अवधि में कौन सा विकल्प ज्यादा सस्ता और फायदेमंद साबित होता है। हालिया तुलना में सामने आया है कि 5 साल के खर्च में दोनों तकनीकों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है।

ईवी बनाम हाइब्रिड कार खर्च में बड़ा अंतर

अगर 5 साल के कुल खर्च की बात करें तो इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV) रनिंग कॉस्ट के मामले में काफी सस्ती साबित होती हैं। एक औसत इलेक्ट्रिक कार का प्रति किलोमीटर खर्च लगभग ₹1.5 से ₹2.5 के बीच होता है, जबकि हाइब्रिड कार में यही खर्च ₹3.5 से ₹4.5 प्रति किलोमीटर तक पहुंच जाता है।

इसका मतलब यह है कि जो लोग रोजाना ज्यादा ड्राइव करते हैं, उनके लिए इलेक्ट्रिक कार लंबे समय में हजारों नहीं बल्कि लाखों रुपये तक की बचत कर सकती है। वहीं हाइब्रिड कारें बेहतर माइलेज जरूर देती हैं, लेकिन वे पूरी तरह पेट्रोल पर निर्भर रहती हैं।

खरीद कीमत और टैक्स में भी बड़ा फर्क

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों पर केवल लगभग 5% जीएसटी लगता है, जबकि हाइब्रिड कारों पर यह टैक्स 40% तक पहुंच सकता है। 1 यही कारण है कि कई मामलों में हाइब्रिड कारें शुरुआती कीमत में महंगी पड़ती हैं।

हालांकि कुछ कंपनियां जैसे मारुति ने अपनी इलेक्ट्रिक SUV को बैटरी सब्सक्रिप्शन मॉडल (BaaS) के साथ लॉन्च किया है, जिससे शुरुआती कीमत कम हो जाती है, लेकिन चलाने के दौरान अलग से प्रति किलोमीटर शुल्क देना पड़ता है।

मेंटेनेंस और उपयोग में कौन बेहतर

मेंटेनेंस के मामले में भी इलेक्ट्रिक कारें आगे हैं क्योंकि इनमें इंजन, ऑयल और कई पारंपरिक पार्ट्स नहीं होते। एक अनुमान के अनुसार EV का सालाना मेंटेनेंस खर्च हाइब्रिड की तुलना में काफी कम होता है।

हालांकि हाइब्रिड कारें उन लोगों के लिए बेहतर मानी जाती हैं जिन्हें लंबी दूरी तय करनी होती है या जहां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित है। इनमें पेट्रोल इंजन होने के कारण रेंज की चिंता नहीं रहती।

किसके लिए कौन सा विकल्प सही

अगर आपकी ड्राइविंग ज्यादातर शहर में है और आपके पास घर या ऑफिस में चार्जिंग की सुविधा है, तो इलेक्ट्रिक कार बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। वहीं अगर आप लंबी दूरी की यात्रा ज्यादा करते हैं और चार्जिंग की सुविधा सीमित है, तो हाइब्रिड कार ज्यादा प्रैक्टिकल मानी जाएगी।

कुल मिलाकर, 5 साल के खर्च के हिसाब से इलेक्ट्रिक कारें ज्यादा किफायती नजर आती हैं, जबकि हाइब्रिड कारें सुविधा और लचीलापन प्रदान करती हैं।

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