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कर्नाटक नेतृत्व परिवर्तन पर बड़ा संकेत, राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से कहा- अब राष्ट्रीय राजनीति में निभाइए बड़ी भूमिका

कर्नाटक नेतृत्व परिवर्तन पर बड़ा संकेत, राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से कहा- अब राष्ट्रीय राजनीति में निभाइए बड़ी भूमिका
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कर्नाटक नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और राहुल गांधी की अहम मुलाकात के बाद राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस हाईकमान अब 2028 विधानसभा और 2029 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर नई रणनीति तैयार कर रहा है।

राहुल गांधी ने कथित तौर पर सिद्धारमैया से कहा कि वह पार्टी के सबसे बड़े ओबीसी चेहरों में से एक हैं और अब उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।

कर्नाटक नेतृत्व परिवर्तन पर कांग्रेस की नई रणनीति

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की तैयारी कर रहा है। पार्टी चाहती है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए संगठन और सरकार दोनों स्तर पर नई ऊर्जा लाई जाए।

बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव भी दिया है ताकि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सके। हालांकि सिद्धारमैया ने इस पर फैसला लेने के लिए कुछ समय मांगा है।

डीके शिवकुमार को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

राज्य की राजनीति में लंबे समय से सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही है। 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिली थी।

अब माना जा रहा है कि पार्टी डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंप सकती है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व इस बदलाव को अगले कुछ दिनों में अंतिम रूप दे सकता है।

सिद्धारमैया की बैठक पर बढ़ी सियासी चर्चा

सूत्रों के अनुसार सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपने मंत्रियों के साथ नाश्ते की बैठक बुलाई है। इस बैठक को लेकर सियासी अटकलें तेज हैं। चर्चा है कि वह इस दौरान कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला भी बेंगलुरु पहुंचने वाले हैं, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि पार्टी नेतृत्व राज्य में बदलाव को लेकर सक्रिय हो चुका है।

राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ सकती है भूमिका

कांग्रेस का मानना है कि सिद्धारमैया की ओबीसी समुदाय में मजबूत पकड़ पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर फायदेमंद साबित हो सकती है। यही कारण है कि उन्हें राज्य की राजनीति से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय अभियान में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है।

अगर सब कुछ तय रणनीति के मुताबिक चलता है तो अगले एक सप्ताह में कर्नाटक में नई सरकार का गठन हो सकता है।

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