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राघव चड्ढा बीजेपी शामिल खबर: AAP को बड़ा झटका, 7 सांसदों का फैसला

राघव चड्ढा बीजेपी शामिल खबर: AAP को बड़ा झटका, 7 सांसदों का फैसला
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राघव चड्ढा बीजेपी शामिल खबर ने देश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान किया है। इस फैसले के साथ ही AAP के राज्यसभा के कई सांसदों ने भी उनके साथ जाने का निर्णय लिया, जिससे पार्टी को बड़ा झटका लगा है।

राघव चड्ढा बीजेपी शामिल खबर और 2/3 सांसदों का फैसला

जानकारी के अनुसार, राघव चड्ढा ने दावा किया है कि AAP के राज्यसभा के दो-तिहाई सदस्य BJP में शामिल हो रहे हैं। संविधान के प्रावधानों के तहत यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद एक साथ दल बदलते हैं, तो उन्हें अयोग्यता का सामना नहीं करना पड़ता।

बताया गया है कि कुल 10 में से लगभग 7 सांसद इस निर्णय का हिस्सा हैं, जिससे संसद में AAP की स्थिति कमजोर हो सकती है।

AAP को बड़ा राजनीतिक झटका

इस घटनाक्रम को AAP के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। पार्टी के अंदर चल रही असहमति और नेतृत्व को लेकर विवाद इस फैसले की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।

राघव चड्ढा ने संकेत दिया कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

किन नेताओं ने लिया साथ छोड़ने का फैसला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल जैसे कई राज्यसभा सांसदों ने भी पार्टी छोड़ने का फैसला किया है।

इन नेताओं के साथ जाने से AAP की संसदीय ताकत पर सीधा असर पड़ा है और राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और बढ़ता विवाद

इस फैसले के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। AAP ने इसे पार्टी के खिलाफ साजिश बताया है, जबकि BJP ने इसे नेताओं का व्यक्तिगत निर्णय बताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।

आगे क्या होगा असर

इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बाद अब नजर इस बात पर है कि AAP इस संकट से कैसे उबरती है और BJP को इससे कितना फायदा मिलता है। यह घटनाक्रम संसद की राजनीति और दलों की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

कुल मिलाकर, यह फैसला भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है, जिसका असर आने वाले समय में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

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