AIIMS Bhopal की एक नई रिसर्च ने सिकल सेल रोग से पीड़ित बच्चों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। AIIMS भोपाल सिकल सेल रोग पर किए गए अध्ययन में सामने आया है कि कई बच्चों में हृदय, किडनी और नींद से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामान्य जांच में पकड़ में नहीं आ रहीं। विशेषज्ञों ने बच्चों की शुरुआती और एडवांस स्क्रीनिंग को बेहद जरूरी बताया है।
यह अध्ययन AIIMS भोपाल के पीडियाट्रिक्स विभाग की पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी और हाइपरटेंशन डिवीजन द्वारा किया गया। रिसर्च को इंटरनेशनल पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
AIIMS भोपाल सिकल सेल रोग अध्ययन में क्या सामने आया
रिसर्च में सिकल सेल रोग से पीड़ित बच्चों के ब्लड प्रेशर, नींद, हृदय और किडनी की स्थिति का गहराई से अध्ययन किया गया। अध्ययन के दौरान कई बच्चों में ऐसी समस्याएं पाई गईं जो सामान्य मेडिकल टेस्ट में दिखाई नहीं देतीं।
डॉक्टरों ने 24 घंटे की एम्बुलेटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें कई बच्चों में छिपी हुई ब्लड प्रेशर समस्याएं सामने आईं। कुछ मामलों में सोते समय हाई ब्लड प्रेशर भी पाया गया।
बच्चों में बढ़ रहा स्लीप एपनिया का खतरा
अध्ययन में यह भी सामने आया कि सिकल सेल रोग से पीड़ित कई बच्चों में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की समस्या मौजूद थी। विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या से रक्त वाहिकाओं और हृदय को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
रिसर्च के मुताबिक जिन बच्चों को स्लीप एपनिया था, उनमें कार्डियोवैस्कुलर जटिलताओं का खतरा ज्यादा पाया गया।
सामान्य जांच में नहीं दिखीं कई गंभीर समस्याएं
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लगभग 71 प्रतिशत बच्चों में शुरुआती हृदय और रक्त वाहिका क्षति के संकेत मिले, जबकि अस्पताल की सामान्य जांच में उनका ब्लड प्रेशर सामान्य दिखाई दे रहा था।
इसके अलावा कई बच्चों में प्रोटीन्यूरिया के संकेत भी मिले, जिसे किडनी डैमेज की शुरुआती चेतावनी माना जाता है। पारंपरिक टेस्ट जहां कई मामलों को पहचानने में विफल रहे, वहीं सिस्टेटिन-C जैसे एडवांस टेस्ट में किडनी फंक्शन की कमी का पता चला।
आदिवासी इलाकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही रिसर्च
विशेषज्ञों का कहना है कि यह अध्ययन खासतौर पर मध्य प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य के कई आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल रोग के मरीजों की संख्या अधिक है।
रिसर्च से जुड़े डॉक्टर Dr. Girish Chandra Bhatt ने कहा कि सिकल सेल रोग से पीड़ित बच्चों की केवल सामान्य ब्लड टेस्ट से जांच पर्याप्त नहीं है। शुरुआती स्क्रीनिंग और एडवांस टेस्टिंग से जटिलताओं को समय रहते रोका जा सकता है।
बेहतर इलाज रणनीति बनाने में मिलेगी मदद
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन डॉक्टरों को बेहतर स्क्रीनिंग और उपचार रणनीति तैयार करने में मदद करेगा। इससे बच्चों में लंबे समय तक होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने में सहायता मिल सकती है।
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